जालौन में मिलावटखोरों पर डीएम समीर का सख्त रुख, खाद्य पदार्थों से लेकर नकली दवाओं तक होगी जांच; दोषियों पर चलेगा कार्रवाई का डंडा
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
दूध, पनीर, मावा, घी और मिठाइयों की दुकानों पर प्रशासन की पैनी नजर, नियमित छापेमारी के साथ नमूने लेकर होगी प्रयोगशाला में जांच; नुक्कड़ नाटकों से लोगों को किया जाएगा जागरूक

उरई (जालौन), 2 नवंबर 2026।
उत्तर प्रदेश के जालौन जनपद में मिलावटी खाद्य पदार्थों और नकली दवाओं के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। आम लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले कारोबारियों और प्रतिष्ठान संचालकों को जिलाधिकारी समीर ने कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट करने या नकली दवाओं का कारोबार करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित विभागों को नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।
त्योहारी सीजन और बाजारों में खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग को देखते हुए प्रशासन ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। दूध, पनीर, मावा, घी, खाद्य तेल, मसाले और मिठाइयों की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। इसके साथ ही होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई की दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण किया जाएगा, ताकि लोगों तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री पहुंच सके।
इस संबंध में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी समीर ने की। इसमें खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने, मिलावट पर नियंत्रण लगाने और नकली दवाओं की बिक्री रोकने के लिए विभागीय अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की गई।
दूध, पनीर और मिठाइयों की दुकानों पर रहेगी विशेष निगरानी
बैठक में जिलाधिकारी ने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनपद के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित खाद्य प्रतिष्ठानों की नियमित जांच की जाए। विशेष रूप से उन दुकानों पर ध्यान दिया जाए जहां दूध, पनीर, मावा, घी और मिठाइयों का निर्माण एवं बिक्री होती है।
उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान मिठाइयों और दुग्ध उत्पादों की खपत बढ़ जाती है। इस दौरान कुछ असामाजिक तत्व अधिक मुनाफा कमाने के उद्देश्य से खाद्य सामग्री में मिलावट करने का प्रयास कर सकते हैं। इसलिए विभागीय अधिकारियों को केवल औपचारिक निरीक्षण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि बाजारों में सक्रिय रहकर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि निरीक्षण के दौरान यदि किसी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता संदिग्ध पाई जाती है तो उसका नियमानुसार नमूना लिया जाए। इसके बाद नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाए। प्रयोगशाला की रिपोर्ट में खाद्य पदार्थ मानकों के विपरीत पाए जाने पर संबंधित दुकानदार या प्रतिष्ठान के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाए।
होटल और रेस्टोरेंट भी जांच के दायरे में
डीएम समीर ने होटल, ढाबों, रेस्टोरेंट और अन्य खाद्य कारोबार करने वाले प्रतिष्ठानों की स्वच्छता व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि खाद्य पदार्थों को तैयार करने, रखने और ग्राहकों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में साफ-सफाई के नियमों का पालन होना चाहिए।
खाद्य सामग्री की गुणवत्ता के साथ-साथ उसकी भंडारण व्यवस्था, इस्तेमाल किए जा रहे तेल और अन्य सामग्री की स्थिति की भी जांच की जाए। यदि किसी प्रतिष्ठान में अस्वच्छ वातावरण या खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन मिलता है तो संबंधित संचालक को नियमानुसार नोटिस और आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाई जाए।
प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि बाजार में खाद्य सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है।
मिठाई खरीदते समय उपभोक्ता भी रहें सतर्क
जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से अपील की कि वे बाजार से खाद्य सामग्री खरीदते समय स्वयं भी सावधानी बरतें। विशेषकर त्योहारों के अवसर पर मिठाइयों की खरीदारी करते समय उनकी गुणवत्ता और ताजगी पर ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने लोगों को सलाह दी कि मिठाई खरीदने से पहले दुकान की साफ-सफाई, खाद्य सामग्री की स्थिति और पैकिंग पर अंकित विवरण अवश्य देखें। अत्यधिक चमकीले रंगों वाली या असामान्य दिखाई देने वाली मिठाइयों को लेकर सतर्क रहें। खुले में रखी खाद्य सामग्री और संदिग्ध मावे से तैयार उत्पादों की खरीदारी से बचें।
इसके अलावा बिना लेबल वाले खाद्य तेल, मसाले और अन्य पैकिंग रहित सामग्री खरीदते समय भी विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। उपभोक्ताओं को केवल सस्ते दाम देखकर खाद्य पदार्थ नहीं खरीदने चाहिए, बल्कि उनकी गुणवत्ता और सुरक्षित होने को प्राथमिकता देनी चाहिए।
नुक्कड़ नाटकों और कार्यशालाओं से फैलेगी जागरूकता
खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए प्रशासन अब जनभागीदारी बढ़ाने की दिशा में भी काम करेगा। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
इसके तहत कार्यशालाएं, संगोष्ठियां और नुक्कड़ नाटक आयोजित कर लोगों को खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, मिलावट के संभावित खतरे और उपभोक्ताओं के अधिकारों की जानकारी दी जाएगी।
डीएम ने कहा कि मिलावट के खिलाफ अभियान तभी प्रभावी हो सकता है, जब आम नागरिक भी जागरूक और सतर्क रहें। लोगों को यह जानकारी होनी चाहिए कि संदिग्ध खाद्य सामग्री मिलने पर कहां शिकायत करनी है और किस प्रकार संबंधित विभाग तक अपनी बात पहुंचानी है।
जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से दुकानदारों और खाद्य कारोबारियों को भी निर्धारित मानकों का पालन करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। प्रशासन चाहता है कि बाजार में सुरक्षित खाद्य सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारी, व्यापारी और उपभोक्ता मिलकर जिम्मेदारी निभाएं।
नकली और एक्सपायरी दवाओं की बिक्री पर भी कार्रवाई
खाद्य पदार्थों में मिलावट के साथ-साथ जिलाधिकारी ने नकली और मानकों के विपरीत दवाओं की बिक्री को भी गंभीर मामला बताया। उन्होंने औषधि विभाग के अधिकारियों को मेडिकल स्टोरों और दवा प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि बाजार में बिकने वाली दवाओं की गुणवत्ता और वैधता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। किसी भी व्यक्ति के स्वास्थ्य के साथ दवाओं के माध्यम से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।
औषधि निरीक्षकों को निर्देशित किया गया कि मेडिकल स्टोरों पर उपलब्ध दवाओं की निर्धारित मानकों के अनुसार जांच करें। एक्सपायरी दवाओं की बिक्री, संदिग्ध दवाओं के भंडारण और नियमों के विपरीत दवाएं बेचने के मामलों में तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाए।
इसके अलावा नकली दवाओं के कारोबार से जुड़े लोगों की पहचान करने के लिए मजबूत सूचना तंत्र विकसित करने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटाने के साथ विभागीय स्तर पर प्रभावी निगरानी व्यवस्था बनाई जाए।
व्यापारिक संगठनों से भी लिया जाएगा सहयोग
जिलाधिकारी समीर ने अभियान को सफल बनाने के लिए व्यापारिक संगठनों और स्वैच्छिक संस्थाओं की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि बाजार में खाद्य सुरक्षा और दवाओं की गुणवत्ता बनाए रखना केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि कारोबारियों को भी अपनी भूमिका समझनी होगी।
व्यापारिक संगठनों के सहयोग से दुकानदारों को खाद्य सुरक्षा नियमों और निर्धारित मानकों की जानकारी दी जा सकती है। इससे मिलावट जैसी गतिविधियों को रोकने में मदद मिलेगी और उपभोक्ताओं का बाजार व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होगा।
अधिकारियों को जिम्मेदारी के साथ काम करने के निर्देश
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि अभियान को गंभीरता से संचालित किया जाए। निरीक्षण, नमूना संग्रहण और जांच की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। साथ ही दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध कानूनी प्रक्रिया के तहत प्रभावी कार्रवाई की जाए।
बैठक में सहायक आयुक्त खाद्य, औषधि निरीक्षक रेखा सचान, डीजीसी क्रिमिनल रामलखन सहित खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन से जुड़े अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
प्रशासन के इस सख्त रुख से उम्मीद है कि जनपद में मिलावटी खाद्य पदार्थों और नकली दवाओं के कारोबार पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी। अब देखना होगा कि अधिकारियों द्वारा शुरू की जाने वाली नियमित जांच और कार्रवाई का अभियान बाजारों में किस स्तर तक प्रभावी साबित होता है।
हिट एंड हॉट न्यूज़ | जालौन ब्यूरो
