कालपी बार संघ अध्यक्ष गयादीन अहिरवार हत्याकांड में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, मुठभेड़ में दो आरोपी घायल और तीन गिरफ्तार
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
जोल्हूपुर-मदारीपुर मार्ग पर कार बरामदगी के दौरान हुई पुलिस मुठभेड़, दो तमंचे, कारतूस और वारदात में इस्तेमाल स्विफ्ट डिजायर कार बरामद; मुख्य साजिशकर्ता के खुलासे से जांच को मिला नया मोड़

कालपी (जालौन), 2 नवंबर 2026।
उत्तर प्रदेश के जालौन जनपद में कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता गयादीन अहिरवार की अपहरण के बाद हत्या के मामले में पुलिस ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। हत्याकांड की जांच के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल कार बरामद करने पहुंची पुलिस टीम और आरोपियों के बीच मुठभेड़ हो गई। पुलिस के अनुसार, इस दौरान आरोपियों की ओर से फायरिंग की गई, जिसके जवाब में पुलिस ने कार्रवाई की। मुठभेड़ में दो आरोपी गोली लगने से घायल हो गए, जबकि तीसरे आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे और घटनास्थल से दो अवैध तमंचे, पांच जिंदा कारतूस, दो खोखा कारतूस तथा अधिवक्ता के अपहरण और हत्या की घटना में इस्तेमाल की गई स्विफ्ट डिजायर कार बरामद करने की जानकारी दी है। इसके अलावा खून लगा पाना और एक जैक भी पुलिस के हाथ लगे हैं। घायल आरोपियों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है। वहीं, मामले का मुख्य आरोपी मोनू यादव अभी फरार बताया जा रहा है।
चाय पीने के बहाने कार में बैठाकर किया गया था अपहरण
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता गयादीन अहिरवार का अपहरण 31 अक्टूबर को किया गया था। आरोप है कि कुछ लोगों ने उन्हें एक मुकदमे के सिलसिले में बातचीत करने और साथ में चाय पीने का बहाना बनाया। इसी दौरान उन्हें कार में बैठाकर अपने साथ ले जाया गया।
जब काफी समय तक अधिवक्ता घर नहीं पहुंचे तो परिजनों को चिंता हुई। परिवार के लोगों ने उनकी तलाश शुरू की और घटना की जानकारी पुलिस को दी। इसके बाद कालपी कोतवाली में अपहरण से संबंधित मुकदमा दर्ज किया गया।
मामला एक वरिष्ठ अधिवक्ता और बार एसोसिएशन के अध्यक्ष से जुड़ा होने के कारण पुलिस प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया। अधिवक्ता की तलाश के लिए कई पुलिस टीमों को लगाया गया। जांच और तलाश अभियान के दौरान पुलिस को ऐसे साक्ष्य मिले, जिनसे मामला अपहरण से आगे बढ़कर हत्या की वारदात के रूप में सामने आया।
आठ थानों की पुलिस टीमों ने चलाया अभियान
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक और अपर पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में विशेष अभियान चलाया गया। इसमें तीन क्षेत्राधिकारियों के साथ आठ थानों की पुलिस टीमों को लगाया गया।
पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर संदिग्धों की तलाश की। पूछताछ और जांच के आधार पर सर्वेश, आशीष और केशव नाम के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का दावा है कि आरोपियों से पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर कानपुर जनपद के सचेंडी क्षेत्र के पास से अधिवक्ता गयादीन अहिरवार का शव बरामद किया गया।
इसके साथ ही हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार की बरामदगी भी की गई। शव मिलने की जानकारी के बाद परिजनों और अधिवक्ता समुदाय में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया। घटना ने जालौन के साथ-साथ आसपास के जिलों में भी चर्चा का विषय बना दिया।
32 बीघा जमीन का विवाद जांच में आया सामने
पुलिस की जांच में हत्या के पीछे जमीन से जुड़ा विवाद सामने आने की बात कही गई है। जानकारी के मुताबिक, कदौरा थाना क्षेत्र में स्थित करीब 32 बीघा जमीन को लेकर अधिवक्ता गयादीन अहिरवार और कानपुर निवासी इंद्रजीत यादव के बीच मुकदमेबाजी चल रही थी।
पुलिस ने इसी विवाद को हत्याकांड की संभावित वजह मानते हुए जांच का दायरा बढ़ाया। पूछताछ के दौरान इंद्रजीत यादव की भूमिका सामने आने के बाद उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।
पुलिस का दावा है कि इंद्रजीत यादव को इस पूरे घटनाक्रम का मुख्य साजिशकर्ता माना जा रहा है। उसके मोबाइल फोन की जांच के दौरान व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। इन साक्ष्यों में घटना से पहले और बाद की बातचीत होने की बात पुलिस ने कही है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित तौर पर पैसों का लालच देकर मोनू यादव और उसके साथियों के माध्यम से हत्या की योजना को अंजाम दिलाया गया। हालांकि, इस साजिश से जुड़े सभी आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।
मुख्य आरोपी मोनू यादव की तलाश जारी
पुलिस की पूछताछ में मोनू यादव का नाम सामने आने के बाद उसकी तलाश तेज कर दी गई है। पुलिस के मुताबिक, मोनू यादव इस हत्याकांड का प्रमुख आरोपी है और फिलहाल फरार चल रहा है।
जांच में सामने आए कथित आर्थिक लेनदेन, मोबाइल चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस इन साक्ष्यों के आधार पर घटना की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है।
अधिकारियों का प्रयास है कि हत्या की योजना बनाने से लेकर अपहरण और वारदात को अंजाम देने तक शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका स्पष्ट की जा सके।
कार बरामदगी के दौरान जोल्हूपुर-मदारीपुर मार्ग पर मुठभेड़
हत्याकांड में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस को वारदात में इस्तेमाल कार के संबंध में जानकारी मिली। इसी आधार पर कालपी पुलिस, एसओजी और सर्विलांस की संयुक्त टीम आरोपियों को लेकर जोल्हूपुर-मदारीपुर मार्ग पर अन्ना फार्म हाउस की ओर पहुंची।
पुलिस के अनुसार, इसी स्थान पर कार की बरामदगी के दौरान झाड़ियों में छिपे आरोपियों ने पुलिस टीम को निशाना बनाकर फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई फायरिंग के बाद पुलिस टीम ने जवाबी कार्रवाई की।
इस दौरान सर्वेश शुक्ला उर्फ सब्बू और आशीष विश्वकर्मा के पैर में गोली लगने से वे घायल हो गए। वहीं, तीसरे आरोपी केशव कटियार को पुलिस ने सुरक्षित हिरासत में ले लिया।
मुठभेड़ के बाद पुलिस ने घटनास्थल की तलाशी ली और हथियारों तथा अन्य सामान को कब्जे में लिया। घायल आरोपियों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
पुलिस ने बरामद किए हथियार और कार
मुठभेड़ के बाद पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मौके से निम्नलिखित सामान बरामद किया गया है।
- दो अवैध तमंचे, 315 बोर।
- पांच जिंदा कारतूस।
- दो खोखा कारतूस।
- एक स्विफ्ट डिजायर कार।
- खून लगा एक पाना।
- एक जैक।
पुलिस का मानना है कि बरामद कार का इस्तेमाल अधिवक्ता के अपहरण की वारदात में किया गया था। बरामद सामान को जांच का हिस्सा बनाते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई में गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों की पहचान इस प्रकार है।
- सर्वेश शुक्ला उर्फ सब्बू – निवासी बर्रा, कानपुर नगर। मुठभेड़ में घायल।
- आशीष विश्वकर्मा – निवासी न्यू डायमंड सिटी, कानपुर नगर। मुठभेड़ में घायल।
- केशव कटियार – निवासी वरुण विहार कॉलोनी, कानपुर नगर। पुलिस हिरासत में।
इन आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
अधिवक्ता समुदाय में घटना को लेकर चिंता
बार एसोसिएशन अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता की हत्या की घटना से कानूनी जगत में चिंता का माहौल है। एक अधिवक्ता का इस तरह अपहरण और फिर हत्या किए जाने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
परिजन और अधिवक्ता समुदाय पहले से ही आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। ऐसे में पुलिस की ओर से की गई गिरफ्तारी और मुठभेड़ की कार्रवाई को जांच की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल फरार मुख्य आरोपी मोनू यादव की गिरफ्तारी और कथित साजिश में शामिल अन्य लोगों की भूमिका का है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। डिजिटल साक्ष्यों, बरामद सामान, आरोपियों के बयानों और अन्य परिस्थितिजन्य तथ्यों के आधार पर हत्याकांड की पूरी कड़ी जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस की आगे की कार्रवाई और न्यायिक जांच से ही घटना के सभी पहलुओं की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
हिट एंड हॉट न्यूज़ | जालौन ब्यूरो
