प्रसव के दौरान महिला की मौत, परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप

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कमलेश कुमार

हिट एंड हॉट न्यूज़ रिपोर्टर बहराइच

बहराइच/सुजौली। जनपद बहराइच के थाना सुजौली क्षेत्र के कैलाशपुरी गांव में प्रसव के दौरान एक महिला की मौत के बाद परिजनों ने निजी अस्पताल के चिकित्सकों और प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। मृतका की पहचान करिश्मा, पत्नी विकास साहनी, निवासी कैलाशपुरी के रूप में हुई है। महिला की मौत के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। परिजन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

परिजनों का कहना है कि करिश्मा को प्रसव के लिए न्यू इंडिया हॉस्पिटल ले जाया गया था। वहां उपचार के दौरान उसकी हालत बिगड़ने की बात सामने आई। इसके बाद उसे पहले बहराइच के एक अन्य निजी अस्पताल और फिर लखनऊ के जगरानी अस्पताल ले जाया गया। लखनऊ में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच की मांग उठ रही है।

पहले से ही कम बताया गया था हीमोग्लोबिन

परिवार के अनुसार, प्रसव से पहले करिश्मा की जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट में उसका हीमोग्लोबिन लगभग 7.7 ग्राम बताया गया था। परिजनों का कहना है कि इस स्थिति में महिला के स्वास्थ्य को लेकर विशेष सावधानी की आवश्यकता थी।

बताया गया कि जिस समय करिश्मा को अस्पताल ले जाया गया, उस समय उसके पति विकास साहनी घर पर मौजूद नहीं थे। उनकी माता और पड़ोस की एक महिला करिश्मा को लेकर न्यू इंडिया हॉस्पिटल पहुंचीं। परिवार का आरोप है कि अस्पताल में चिकित्सकीय प्रक्रिया के संबंध में उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई और इसके बाद महिला का ऑपरेशन कर दिया गया।

हालांकि, ऑपरेशन से जुड़े सभी चिकित्सकीय तथ्यों और निर्णयों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इन आरोपों की वास्तविकता जांच और उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।

ऑपरेशन के बाद बिगड़ी हालत का आरोप

परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के दौरान करिश्मा की स्थिति बिगड़ गई। आरोप है कि अस्पताल की ओर से परिवार को उसकी गंभीर स्थिति के बारे में समय रहते पूरी जानकारी नहीं दी गई। स्थिति गंभीर होने के बाद मरीज को बहराइच के एक अन्य निजी अस्पताल ले जाया गया।

परिवार के अनुसार, वहां चिकित्सकों ने करिश्मा की हालत को गंभीर बताया और बेहतर उपचार के लिए उसे लखनऊ ले जाने की सलाह दी। इसके बाद परिजन उसे लखनऊ स्थित जगरानी अस्पताल लेकर पहुंचे।

इस दौरान परिवार के सामने मरीज की हालत लगातार चिंता का विषय बनी रही। परिजन उपचार के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास करते रहे, लेकिन आखिरकार चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद करिश्मा की जान नहीं बचाई जा सकी।

लखनऊ में इलाज के दौरान हुई मौत

मृतका के पति विकास साहनी के अनुसार, जगरानी अस्पताल में चिकित्सकों ने करिश्मा की हालत को बेहद गंभीर बताया। परिवार का दावा है कि वहां चिकित्सकों ने पूर्व में किए गए ऑपरेशन और मरीज की गंभीर स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए।

परिजनों के मुताबिक, इलाज के दौरान करिश्मा की किडनी से संबंधित गंभीर समस्या सामने आई और उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। उपचार के दौरान अंततः उसकी मौत हो गई।

महिला की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। पति और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार का कहना है कि करिश्मा को प्रसव के लिए अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन उपचार के बाद उसकी हालत इस स्तर तक बिगड़ गई कि उसे बचाया नहीं जा सका।

परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लगाए आरोप

करिश्मा की मौत के बाद परिजनों ने न्यू इंडिया हॉस्पिटल के संचालक राजन सिंह और अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि यदि उपचार के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

परिजनों ने मांग की है कि अस्पताल में महिला के उपचार से संबंधित सभी दस्तावेज, जांच रिपोर्ट, ऑपरेशन से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य चिकित्सकीय कागजात की जांच कराई जाए। परिवार यह भी चाहता है कि पूरे मामले की जांच किसी सक्षम अधिकारी अथवा स्वास्थ्य विभाग की टीम से कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

परिजनों की मांग है कि यदि जांच में किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

पोस्टमार्टम के बाद सामने आ सकता है मौत का कारण

महिला की मौत के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट इस मामले में महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि इससे मृत्यु के चिकित्सकीय कारणों को समझने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड की जांच होने से पहले मौत के लिए किसी एक कारण या व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। महिला की स्वास्थ्य स्थिति, प्रसव से पहले की जांच, ऑपरेशन के दौरान की परिस्थितियां, बाद में सामने आई जटिलताएं और अलग-अलग अस्पतालों में किए गए उपचार की जानकारी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी पूरी सच्चाई

इस घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजनों का कहना है कि उन्हें अपनी पत्नी और बहू की मौत की वास्तविक वजह जानने का अधिकार है। परिवार चाहता है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से हो और यदि किसी स्तर पर गलती सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जाए।

वहीं, अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस पूरे मामले में क्या स्पष्टीकरण दिया गया है, यह भी जांच के दौरान महत्वपूर्ण रहेगा। अस्पताल की ओर से सामने आने वाले मेडिकल रिकॉर्ड और पक्ष को भी जांच में शामिल किया जाना आवश्यक है।

फिलहाल महिला की मौत को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, उपचार से संबंधित दस्तावेज और स्वास्थ्य विभाग अथवा पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि करिश्मा की मौत किन चिकित्सकीय परिस्थितियों में हुई और क्या उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी।

परिजनों ने संबंधित अधिकारियों से मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराने और दोष सिद्ध होने की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। घटना के बाद क्षेत्र में भी इस मामले को लेकर चर्चा बनी हुई है।

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