बौध में सरकारी प्रायोजन सहायता प्राप्त बच्चों और उनके परिवारों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

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सुदाम बाबू स्टेट ब्यूरो ओडिशा

हिट एंड हॉट न्यूज़

बौध (ओडिशा), 28 अक्टूबर 2026। ओडिशा के बौध जिले में सरकारी प्रायोजन सहायता प्राप्त बच्चों और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने तथा उनके जीवन स्तर में सुधार लाने के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कलेक्ट्रेट स्थित सद्भावना सम्मेलन कक्ष में आयोजित इस कार्यक्रम में बाल संरक्षण, परिवारों की आर्थिक मजबूती, रोजगार के अवसर और विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उनके परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रोत्साहित करना रहा।

यह कार्यक्रम महिला एवं बाल विकास विभाग, ओडिशा सरकार के अंतर्गत जिला बाल संरक्षण इकाई (डीसीपीयू), बौध की ओर से आयोजित किया गया। इसमें संबंधित विभागों के अधिकारियों, बाल कल्याण समिति के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। अधिकारियों ने परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया समझाई और उपलब्ध अवसरों का उपयोग करके अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने के लिए प्रेरित किया।

बच्चों और परिवारों के कल्याण पर प्रशासन का जोर

कार्यक्रम में बौध के कलेक्टर बिभूति भूषण नायक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि सरकारी सहायता प्राप्त कर रहे बच्चों और उनके परिवारों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसके लिए ग्राम पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर कार्यरत विभागों के बीच बेहतर तालमेल होना आवश्यक है।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे पात्र परिवारों की पहचान कर उन्हें योजनाओं से जोड़ने के लिए समन्वित प्रयास करें। केवल योजनाओं की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि पात्र लाभार्थियों को निर्धारित सुविधाएं समय पर मिलें।

कलेक्टर ने बच्चों की सुरक्षा और परिवारों की आर्थिक स्थिति को एक-दूसरे से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताते हुए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। परिवारों को सरकारी सहायता, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के अवसर मिलने से बच्चों के बेहतर भविष्य की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट अनिरुद्ध प्रधान ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने कहा कि बच्चों और उनके परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सभी संबंधित विभागों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने जरूरतमंद परिवारों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने और उन्हें उपलब्ध सुविधाओं का लाभ लेने में सहयोग देने की आवश्यकता पर बल दिया।

बाल कल्याण समिति के सदस्यों ने रखे विचार

कार्यक्रम में बौध बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के अध्यक्ष प्रमोद साहू सहित समिति के सदस्य सीताकांत साहू, राधाकांत बाग, अनुसया होता और सुधामयी रथ उपस्थित रहे। उन्होंने बच्चों के संरक्षण, परिवारों की सामाजिक स्थिति में सुधार और कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ाने से संबंधित विषयों पर अपने विचार साझा किए।

वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों के हितों की रक्षा के लिए परिवार, प्रशासन और समाज की सामूहिक भूमिका महत्वपूर्ण है। आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे परिवारों को समय पर सहायता और उचित मार्गदर्शन मिलने से वे बच्चों की शिक्षा, देखभाल और सुरक्षित भविष्य पर बेहतर ध्यान दे सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान सरकारी प्रायोजन सहायता प्राप्त करने वाले परिवारों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया गया। साथ ही पात्रता की शर्तों, आवेदन की प्रक्रिया और योजनाओं से संबंधित आवश्यक जानकारी भी उपलब्ध कराई गई, ताकि लाभार्थियों को सरकारी सुविधाएं प्राप्त करने में अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

खेती और स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भरता का संदेश

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा परिवारों को रोजगार और आय बढ़ाने के व्यावहारिक विकल्पों से परिचित कराना रहा। कृषि विज्ञान केंद्र की कृषि वैज्ञानिक डॉ. संस्मिता पाल ने संसाधन व्यक्ति के रूप में भाग लिया। उन्होंने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से कम लागत वाली और आधुनिक कृषि गतिविधियों की जानकारी दी।

डॉ. पाल ने मशरूम उत्पादन, सब्जियों की खेती, मुर्गीपालन, बकरी पालन और मत्स्य पालन जैसे कार्यों के बारे में बताया। उन्होंने समझाया कि परिवार अपनी उपलब्ध जमीन, स्थानीय संसाधनों और आर्थिक क्षमता के अनुसार इन गतिविधियों को आजीविका के विकल्प के रूप में अपना सकते हैं।

उन्होंने इन कार्यों से जुड़ी संभावनाओं और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी देते हुए परिवारों को आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने के लिए प्रेरित किया। स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल कृषि और पशुपालन संबंधी गतिविधियां अपनाने से परिवारों को अपनी आजीविका मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

कार्यक्रम में इस बात को भी महत्व दिया गया कि सरकारी सहायता के साथ-साथ कौशल विकास और स्वरोजगार के अवसर परिवारों को लंबे समय तक आर्थिक रूप से सक्षम बनाने में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

श्रमिक कार्ड और बाल श्रम कानून की दी जानकारी

बौध के जिला श्रम अधिकारी रंजन किशोर बेहरा ने श्रमिक कार्ड के महत्व और उससे संबंधित सरकारी लाभों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पात्र श्रमिकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाने हेतु आवश्यक पंजीकरण और संबंधित प्रक्रियाओं की जानकारी होना जरूरी है।

उन्होंने बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम के प्रावधानों पर भी प्रकाश डाला। इस विषय के माध्यम से बच्चों को श्रम से बचाने, उनके अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के महत्व को रेखांकित किया गया।

बाल श्रम की रोकथाम के लिए परिवारों में जागरूकता बढ़ाना महत्वपूर्ण है। बच्चों को शिक्षा, संरक्षण और विकास के अवसर उपलब्ध कराना समाज तथा प्रशासन की साझा जिम्मेदारी है। ऐसे कार्यक्रम लोगों को कानूनी प्रावधानों और बच्चों के हित में उठाए जाने वाले कदमों के प्रति जागरूक करने में सहायक होते हैं।

अनुसूचित जाति और जनजाति के बच्चों के लिए योजनाओं पर चर्चा

अतिरिक्त कल्याण अधिकारी चंद्रकांति बेउरा ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों से संबंधित बच्चों के लिए उपलब्ध विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने पात्र परिवारों को इन योजनाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त करने और निर्धारित नियमों के अनुसार लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।

इस दौरान सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों तक सहायता पहुंचाने की आवश्यकता पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। अधिकारियों और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय से पात्र परिवारों की पहचान तथा उन्हें उचित योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

रोजगार कार्ड और आवास योजनाओं की जानकारी

वीबी-जी रामजी के समन्वयक निरोद कुमार मिश्रा ने जॉब कार्ड के उपयोग और स्थानीय स्तर पर रोजगार प्राप्त करने के उपलब्ध अवसरों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाओं तथा संबंधित प्रक्रियाओं को समझाते हुए परिवारों को उपलब्ध विकल्पों के प्रति जागरूक किया।

उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना और अंत्योदय गृह योजना के बारे में भी जानकारी साझा की। इन योजनाओं से संबंधित पात्रता, लाभ और प्रक्रिया की जानकारी जरूरतमंद परिवारों के लिए उपयोगी हो सकती है। आवास संबंधी सहायता तथा स्थानीय रोजगार के अवसर परिवारों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने और जीवन स्तर में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यक्रम में विभिन्न विभागों की ओर से दी गई जानकारी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि परिवार अपनी आवश्यकताओं के अनुसार उपयुक्त योजनाओं की पहचान कर सकें और उनका लाभ लेने के लिए सही प्रक्रिया अपना सकें।

अधिकारियों के समन्वय से मजबूत होगा बाल संरक्षण

कार्यक्रम का समन्वय जिला बाल संरक्षण अधिकारी राहुल प्रधान ने किया। गैर-संस्थागत देखभाल संरक्षण अधिकारी सुशांत भोई ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और कार्यक्रम में शामिल अधिकारियों, विशेषज्ञों तथा अन्य प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

बौध में आयोजित यह जागरूकता कार्यक्रम बच्चों की सुरक्षा, परिवारों के सामाजिक विकास और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सरकारी योजनाओं की सफलता तभी सुनिश्चित हो सकती है, जब पात्र लाभार्थियों तक उनकी जानकारी पहुंचे और उन्हें आवेदन से लेकर लाभ प्राप्त करने तक आवश्यक मार्गदर्शन मिले।

बाल संरक्षण और परिवार कल्याण के लिए प्रशासनिक सहयोग, सामाजिक जागरूकता तथा रोजगार के अवसरों का विस्तार आवश्यक है। विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल से जरूरतमंद परिवारों को सामाजिक सुरक्षा, आजीविका और आवास संबंधी योजनाओं से जोड़ने में मदद मिल सकती है। इससे बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने और उनके परिवारों को अधिक स्थिर तथा आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

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