हर घर तिरंगा अभियान के तहत सांसदों की बाइक रैली, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने दिखाई हरी झंडी

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‘हर घर तिरंगा’ अभियान को सांसदों की बाइक रैली जैसे जनभागीदारी वाले कार्यक्रम से जोड़ना राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और नागरिक सहभागिता का संदेश देता है। वहीं ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का अवसर स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास और राष्ट्रीय चेतना को नई पीढ़ी से जोड़ने का अवसर भी है। ऐसे आयोजनों की वास्तविक प्रभावशीलता इस बात से तय होगी कि देशभक्ति के संदेश के साथ नागरिकों में संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता कितनी मजबूत होती है।

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नई दिल्ली। देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और नागरिक सहभागिता के संदेश के साथ बुधवार, 12 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत सांसदों की विशेष बाइक रैली आयोजित की गई। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भारत मंडपम से इस रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह आयोजन राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किया गया।

रैली में सांसदों के साथ केंद्रीय मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य तिरंगे के प्रति सम्मान, राष्ट्रीय गौरव और नागरिक भागीदारी की भावना को व्यापक स्तर पर मजबूत करना रहा। रैली भारत मंडपम से शुरू होकर मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम तक पहुंची।

वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने का विशेष अवसर

इस वर्ष देश में ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से याद किया जा रहा है। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में इस राष्ट्रीय गीत का विशेष स्थान रहा है। इसके शब्दों और भाव ने स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान लोगों में देश के प्रति समर्पण और राष्ट्रीय चेतना की भावना को मजबूत करने में भूमिका निभाई।

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि ‘वंदे मातरम्’ ने मातृभूमि के प्रति प्रेम को राष्ट्रीय कर्तव्य की भावना से जोड़ने का काम किया। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत से प्रेरित होने वाले लोगों के साहस, त्याग और संघर्ष को भी याद किया।

हर घर तिरंगा बना जनभागीदारी का अभियान

‘हर घर तिरंगा’ अभियान की शुरुआत वर्ष 2022 में की गई थी। इसके बाद यह अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों की भागीदारी से जुड़े अभियान का रूप ले चुका है।

सरकारी जानकारी के अनुसार, इस अभियान के तहत तिरंगा यात्राओं, बाइक और साइकिल रैलियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा अन्य गतिविधियों का आयोजन किया जाता रहा है। उपराष्ट्रपति ने भी इसे जनभागीदारी से जुड़ा आंदोलन बताया और जनप्रतिनिधियों से अपने-अपने क्षेत्रों में नागरिकों को अभियान से जोड़ने का आह्वान किया।

इस वर्ष ‘हर घर तिरंगा’ और ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ से जुड़े कार्यक्रमों को एक साथ व्यापक स्तर पर आयोजित किया जा रहा है। सरकार की योजना में देशभक्ति की भावना को नागरिक सहभागिता से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है।

सांसदों की बाइक रैली ने दिया एकता का संदेश

बाइक रैली में विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। तिरंगे के साथ निकली इस रैली ने राजधानी की सड़कों पर राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति का संदेश देने का काम किया।

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राजीव रंजन सिंह, वीरेंद्र कुमार, जी. किशन रेड्डी, किरेन रिजिजू और जितेंद्र सिंह सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी रहा कि इसमें राष्ट्रीय पर्व से जुड़े पारंपरिक कार्यक्रमों के बजाय बाइक रैली जैसे माध्यम के जरिए लोगों तक संदेश पहुंचाने का प्रयास किया गया। इससे युवाओं और आम नागरिकों को भी अभियान के साथ जोड़ने की कोशिश दिखाई देती है।

स्वतंत्रता आंदोलन की यादों से जुड़ा वंदे मातरम्

‘वंदे मातरम्’ का इतिहास भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ा हुआ है। इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना के रूप में जाना जाता है और समय के साथ यह देशभक्ति तथा राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण प्रतीक बना।

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अनेक स्वतंत्रता सेनानियों और नेताओं ने इसके माध्यम से लोगों में राष्ट्रीय भावना जगाने का प्रयास किया। यही कारण है कि इसके 150 वर्ष पूरे होने का अवसर केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास को याद करने का भी अवसर माना जा रहा है।

सरकार की ओर से वर्षभर चलने वाली गतिविधियों में ‘वंदे मातरम्’ के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के योगदान को लोगों तक पहुंचाने की योजनाएं भी शामिल की गई हैं।

अंडमान यात्रा का भी किया उल्लेख

अपने संबोधन के दौरान उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने हाल की अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप और ऐतिहासिक सेल्युलर जेल से जुड़ी स्मृतियों को याद किया।

उन्होंने 1943 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा वहां तिरंगा फहराए जाने तथा सेल्युलर जेल में बंद स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का उल्लेख किया। इस संदर्भ में उन्होंने स्वतंत्रता संघर्ष और ‘वंदे मातरम्’ के बीच जुड़े भावनात्मक संबंध को रेखांकित किया।

दक्षिण भारत के स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान भी याद

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में तमिलनाडु के स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रवादी नेताओं के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने वी.ओ. चिदंबरम पिल्लै, सुब्रमणिया शिवा, तिरुप्पुर कुमारन और वंचीनाथन जैसे नामों को याद किया।

राष्ट्रीय कवि सुब्रमणिया भारती के योगदान का भी उल्लेख किया गया। इससे यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि स्वतंत्रता आंदोलन में देश के अलग-अलग क्षेत्रों और भाषाई समुदायों की महत्वपूर्ण भागीदारी रही थी।

तिरंगा केवल ध्वज नहीं, राष्ट्रीय भावना का प्रतीक

भारत का राष्ट्रीय ध्वज देश की संप्रभुता, एकता और राष्ट्रीय पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक है। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के माध्यम से नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और उससे जुड़े भावनात्मक संबंध को व्यक्त करने का अवसर मिलता है।

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में तिरंगे को एक मातृभूमि के प्रति साझा भावना का दृश्य प्रतीक बताया। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्रों के लोगों को अभियान से जोड़ें और नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान के साथ भागीदारी के लिए प्रेरित करें।

युवा पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने की कोशिश

ऐसे आयोजनों का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य नई पीढ़ी को देश के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय प्रतीकों के ऐतिहासिक महत्व से परिचित कराना भी है। बाइक रैली जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से पारंपरिक इतिहास को वर्तमान समय की गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

विशेष रूप से ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में इतिहास, संस्कृति और नागरिक सहभागिता को एक साथ जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

आगे भी जारी रहेंगे कार्यक्रम

‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ को लेकर वर्षभर विभिन्न चरणों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। आधिकारिक योजना के अनुसार देश के अलग-अलग हिस्सों में सांस्कृतिक गतिविधियों, जागरूकता कार्यक्रमों, प्रदर्शनी, रेडियो-टीवी कार्यक्रमों और अन्य माध्यमों से इसके ऐतिहासिक महत्व को लोगों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है।

निष्कर्ष

नई दिल्ली में सांसदों की ‘हर घर तिरंगा’ बाइक रैली ने राष्ट्रीय ध्वज, देशभक्ति और नागरिक सहभागिता का संदेश सामने रखा। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन द्वारा रैली को हरी झंडी दिखाना ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ से जुड़े कार्यक्रमों की श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

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