IIT बॉम्बे में छात्र की मौत के बाद विवाद, ChatGPT से परीक्षा और छात्र आंदोलन ने खड़े किए गंभीर सवाल
मुंबई, 21 सितंबर 2026: देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे यानी IIT बॉम्बे में एक छात्र की मौत के बाद कैंपस में तनाव और बहस का माहौल बना हुआ है। दूसरे वर्ष के बीटेक छात्र साहिल रविंद्र वाकोडे की मौत के बाद परीक्षा व्यवस्था, विद्यार्थियों पर अकादमिक दबाव, कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI के इस्तेमाल और संस्थागत जवाबदेही को लेकर कई सवाल उठे हैं। मामले की परिस्थितियों की जांच जारी है और संस्थान की ओर से भी अपने शुरुआती संचार को लेकर स्पष्टीकरण दिया गया है।

परीक्षा के दौरान मोबाइल और ChatGPT के इस्तेमाल का मामला
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार साहिल वाकोडे को एक मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था। IIT बॉम्बे के शुरुआती बयान में कहा गया था कि छात्र ने परीक्षा का प्रश्नपत्र ChatGPT पर अपलोड करके उत्तर प्राप्त करने की कोशिश की थी। संस्थान ने यह भी कहा था कि उसके खिलाफ तत्काल कोई कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी।
संस्थान के शुरुआती विवरण के मुताबिक, परीक्षा से जुड़े शिक्षक और विभागाध्यक्ष ने छात्र से बातचीत की तथा उसे समझाया गया था कि इस घटना से उसका अकादमिक भविष्य बर्बाद नहीं होगा। इसके बाद छात्र अपने हॉस्टल लौट गया। बाद में उसकी मौत की सूचना सामने आई।
हालांकि, घटना के बाद छात्रों और परिवार की ओर से इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए। इसी वजह से यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि छात्र की मौत और परीक्षा में हुई घटना के बीच वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं, इसका अंतिम निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही किया जा सकता है। IIT बॉम्बे ने भी बाद में कहा कि मौत से जुड़े घटनाक्रम की जांच चल रही है।
मौत के बाद कैंपस में शुरू हुआ विरोध
साहिल की मौत के बाद IIT बॉम्बे परिसर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने मामले की पारदर्शी जांच, संस्थागत जवाबदेही, छात्र कल्याण और परीक्षा व्यवस्था में बदलाव सहित कई मांगें उठाईं। रिपोर्टों के अनुसार छात्रों ने 18 सूत्रीय मांगों का एक चार्टर प्रशासन के सामने रखा।
प्रदर्शन का केंद्र केवल एक परीक्षा संबंधी घटना नहीं रहा। छात्रों ने व्यापक स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता, अनुशासनात्मक प्रक्रियाओं, परीक्षा निगरानी और प्रशासन तथा विद्यार्थियों के बीच संवाद को लेकर भी सवाल उठाए।
तीन दिनों तक चले विरोध के दौरान प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के अनुसार निदेशक प्रो. शिरीष केदारे ने छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ लंबी बैठक की और 18 सूत्रीय मांगों वाले दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं था कि प्रत्येक मांग पर तत्काल अंतिम कार्रवाई हो गई थी। कुछ मुद्दों पर निर्धारित संस्थागत प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लिया जाना था।
निदेशक के इस्तीफे को लेकर क्या है स्थिति?
इस मामले में सबसे अधिक चर्चा IIT बॉम्बे के निदेशक प्रो. शिरीष बी. केदारे के इस्तीफे को लेकर हुई। कुछ रिपोर्टों में उनके प्रदर्शनकारी छात्रों से इस्तीफा देने की बात कहने का उल्लेख आया। हिंदुस्तान टाइम्स की PTI रिपोर्ट के अनुसार, केदारे ने छात्रों से कहा था कि वह इस्तीफा देंगे, लेकिन इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा और सोमवार को बोर्ड की बैठक के बाद अपना निर्णय बताएंगे।
लेकिन 21 सितंबर को IIT बॉम्बे ने स्पष्ट किया कि निदेशक ने औपचारिक रूप से इस्तीफा नहीं दिया है और इससे संबंधित कुछ खबरों को संस्थान ने गलत बताया। इसलिए फिलहाल इस्तीफे को अंतिम और पूर्ण हो चुका निर्णय मानना सही नहीं होगा।
यह घटनाक्रम बताता है कि विरोध के बीच लिए गए मौखिक या प्रारंभिक फैसलों और औपचारिक संस्थागत प्रक्रिया के बीच अंतर हो सकता है।
संबंधित प्रोफेसर पर भी कार्रवाई
मामले में परीक्षा के दौरान निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला का नाम भी सामने आया है। छात्रों की मांगों में उनके खिलाफ कार्रवाई शामिल थी। बाद के घटनाक्रम में IIT बॉम्बे ने उन्हें प्रशासनिक पद से निलंबित करने की घोषणा की। संस्थान के अनुसार आगे की कार्रवाई जांच और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर की जाएगी।
वहीं, साहिल के परिवार की ओर से प्रोफेसर और संस्थान से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। इन आरोपों की सत्यता का अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
IIT बॉम्बे ने अपने शुरुआती बयान पर जताया खेद
घटना के बाद IIT बॉम्बे के संचार को लेकर भी सवाल उठे। संस्थान ने बाद में अपने पहले के संचार के संबंध में माफी मांगते हुए कहा कि छात्र की मौत के आसपास की परिस्थितियां अभी जांच के अधीन हैं। संस्थान ने यह भी माना कि जांच पूरी होने से पहले घटनाओं को निश्चित रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं था।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी संवेदनशील घटना में शुरुआती जानकारी अधूरी हो सकती है। ऐसे मामलों में तथ्य, आरोप और जांच के निष्कर्ष को अलग-अलग रखना जरूरी होता है।
शिक्षा व्यवस्था के सामने AI की नई चुनौती
इस घटना ने परीक्षा व्यवस्था में ChatGPT जैसे AI उपकरणों के इस्तेमाल पर भी व्यापक बहस को जन्म दिया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने पढ़ाई और शोध के कई तरीकों को बदल दिया है। विद्यार्थी इसका उपयोग अवधारणाएं समझने, अभ्यास करने और जानकारी हासिल करने के लिए कर सकते हैं। लेकिन परीक्षा के दौरान बिना अनुमति AI से उत्तर प्राप्त करना अकादमिक ईमानदारी से जुड़ा अलग विषय है।
यहीं से शिक्षण संस्थानों के सामने नई चुनौती आती है। केवल यह तय करना पर्याप्त नहीं है कि AI का उपयोग प्रतिबंधित है या अनुमति है। संस्थानों को यह भी स्पष्ट करना होगा कि किन परिस्थितियों में AI का इस्तेमाल स्वीकार्य है, परीक्षा में इसकी निगरानी कैसे होगी और नियमों के उल्लंघन पर किस तरह की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
इस घटना ने यह सवाल भी उठाया है कि बदलती तकनीक के साथ परीक्षा प्रणाली को किस तरह विकसित किया जाए, ताकि ईमानदार विद्यार्थियों के साथ निष्पक्षता बनी रहे और नियमों का उल्लंघन करने वाले मामलों को पारदर्शी प्रक्रिया के तहत संभाला जा सके।
अकादमिक अनुशासन और छात्र कल्याण के बीच संतुलन
किसी भी शिक्षण संस्थान में परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखना महत्वपूर्ण है। यदि परीक्षा के दौरान अनुचित साधनों के इस्तेमाल को नजरअंदाज किया जाए, तो मूल्यांकन प्रणाली की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, अनुशासनात्मक प्रक्रिया को विद्यार्थियों की परिस्थितियों और मानसिक कल्याण को ध्यान में रखकर संचालित करना भी आवश्यक है।
IIT बॉम्बे के घटनाक्रम ने इसी संतुलन पर राष्ट्रीय स्तर की चर्चा को जन्म दिया है। छात्रों की मांगों में केवल संबंधित घटना की जांच ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और संस्थागत प्रक्रियाओं में बदलाव जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।
आगे जांच से सामने आएगी पूरी तस्वीर
फिलहाल इस पूरे मामले में कई तथ्य जांच के दायरे में हैं। छात्र की मौत के पीछे तत्काल परिस्थितियां क्या थीं, परीक्षा के दौरान वास्तव में क्या हुआ, बातचीत में क्या कहा गया और विभिन्न पक्षों के दावों में कितना तथ्य है—इन सभी सवालों के उत्तर जांच से सामने आने हैं।
इसलिए किसी एक पक्ष के दावे को अंतिम सत्य मानने के बजाय आधिकारिक जांच और कानूनी प्रक्रिया के निष्कर्षों की प्रतीक्षा करना जरूरी है।
साहिल वाकोडे की मौत ने IIT बॉम्बे जैसे उच्च शिक्षण संस्थान में पढ़ाई, परीक्षा अनुशासन, AI तकनीक, मानसिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक जवाबदेही के बीच संबंधों पर गंभीर चर्चा शुरू कर दी है। आने वाले समय में इस मामले से जुड़े संस्थागत फैसले न केवल IIT बॉम्बे के लिए बल्कि देश के अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए भी परीक्षा और AI उपयोग से संबंधित नीतियों पर विचार का आधार बन सकते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी विद्यार्थी की जान से बढ़कर कोई परीक्षा, अंक या अकादमिक उपलब्धि नहीं हो सकती। साथ ही, शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए स्पष्ट नियम, निष्पक्ष प्रक्रिया, संवेदनशील संवाद और विद्यार्थियों के लिए प्रभावी सहायता व्यवस्था—इन सभी का साथ-साथ मजबूत होना आवश्यक है।