अतरौली ग्राम सभा में प्रधान पर भ्रष्टाचार के आरोप, ग्रामीणों ने डीएम से की निष्पक्ष जांच की मांग
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
मनरेगा में कथित फर्जी जॉब कार्ड बनवाकर भुगतान लेने और आवास योजना के लाभार्थियों से रुपये मांगने का आरोप, विकास कार्यों की जांच कराने की उठाई मांग

उरई (जालौन)। माधौगढ़ विकासखंड की ग्राम सभा अतरौली के अंतर्गत आने वाले टिकुरी, छुटका की खोड़ और धर्मपुरा गांवों में विकास कार्यों को लेकर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में अनियमितता बरतने और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस संबंध में ग्रामीणों ने बुधवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट सुनील कुमार को सौंपा। उन्होंने संबंधित योजनाओं और निर्माण कार्यों की जांच किसी सक्षम अधिकारी से कराने तथा आरोपों की पुष्टि होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की।
ग्रामीणों की शिकायत में मनरेगा के तहत कथित फर्जी जॉब कार्ड बनवाकर भुगतान लेने, प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र लाभार्थियों से धनराशि मांगने और विभिन्न विकास निधियों से कराए गए कार्यों में गड़बड़ी किए जाने जैसे मुद्दे शामिल हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि गांवों में सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचना चाहिए और विकास के लिए आवंटित धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के अनुसार होना चाहिए।
मनरेगा में फर्जी जॉब कार्ड बनवाने का आरोप
ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान शत्रुघन सिंह पर वर्ष 2021 से अब तक मनरेगा योजना में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया है। ज्ञापन के अनुसार, ग्राम प्रधान के परिवार के सदस्यों के नाम पर कथित रूप से फर्जी जॉब कार्ड बनवाकर भुगतान प्राप्त किया गया। शिकायत में वैभव सिंह, अजीत सिंह, उमा देवी, शिवपूजन, सोनम, पंजाब सिंह और वृजेश सिंह समेत अन्य लोगों के नामों का उल्लेख किया गया है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित अवधि के दौरान जारी किए गए जॉब कार्ड, कार्यों की स्वीकृति, श्रमिकों की उपस्थिति और भुगतान से जुड़े अभिलेखों की जांच कराई जाए। इसके साथ ही यह भी सत्यापित किया जाए कि जिन लोगों के नाम पर भुगतान हुआ, उन्होंने वास्तव में संबंधित कार्यों में श्रम किया था या नहीं।
मनरेगा के अंतर्गत मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने और ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोगी परिसंपत्तियों के निर्माण का प्रावधान है। ऐसे में योजना के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की अनियमितता की शिकायत सामने आने पर अभिलेखों का सत्यापन और मौके पर किए गए कार्यों का भौतिक निरीक्षण महत्वपूर्ण माना जाता है। ग्रामीणों ने भी इसी आधार पर मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग रखी है।
हालांकि, ज्ञापन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले में संबंधित अधिकारियों की जांच और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
विकास निधियों के इस्तेमाल पर भी उठाए सवाल
शिकायतकर्ताओं ने केवल मनरेगा तक ही अपनी आपत्ति सीमित नहीं रखी, बल्कि गांव में अलग-अलग योजनाओं और निधियों के माध्यम से कराए गए विकास कार्यों पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सांसद निधि, विधायक निधि, ब्लॉक निधि और जिला पंचायत से प्राप्त धनराशि का समुचित उपयोग नहीं किया गया।
ज्ञापन में कुछ कार्यों को कागजों पर पूरा दिखाए जाने की आशंका जताई गई है। इसके अलावा इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण को लेकर भी शिकायत की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक रास्तों को प्राथमिकता देने के बजाय कुछ स्थानों पर कथित तौर पर चहेते लोगों के दरवाजों तक इंटरलॉकिंग का काम कराया गया।
शिकायतकर्ताओं ने संबंधित निर्माण कार्यों की स्वीकृतियों, लागत, भुगतान और वास्तविक स्थिति की जांच कराने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि विकास कार्यों का उद्देश्य पूरे गांव के लोगों को सुविधा उपलब्ध कराना होना चाहिए। यदि किसी निर्माण में नियमों की अनदेखी हुई है या सरकारी धन का गलत इस्तेमाल किया गया है, तो उसकी जिम्मेदारी निर्धारित की जानी चाहिए।
ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित योजनाओं के तहत कराए गए कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। मौके पर मौजूद निर्माण और सरकारी अभिलेखों में दर्ज विवरण का मिलान करके यह पता लगाया जाए कि स्वीकृत धनराशि के अनुरूप कार्य हुआ है या नहीं।
आवास योजना में 25-25 हजार रुपये मांगने की शिकायत
ज्ञापन में गरीब परिवारों के लिए संचालित आवास योजना को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि योजना के पात्र लाभार्थियों से आवास दिलाने के नाम पर कथित रूप से 25-25 हजार रुपये की मांग की गई। शिकायत के मुताबिक, जिन लोगों ने रुपये देने से इनकार किया, उनके नाम सूची से हटाने और अपात्र लोगों को योजना का लाभ दिलाने की बात कही गई।
इस मामले में ग्रामीणों ने शिमला पत्नी तिजोले, टिल्लू पत्नी हरमुख, महेश पुत्र जबर सिंह और रामवती पत्नी जबर सिंह समेत अन्य लोगों का उल्लेख किया है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि आवास योजना की लाभार्थी सूची की दोबारा जांच की जाए और पात्रता के निर्धारित मानकों के आधार पर लाभार्थियों का सत्यापन कराया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि आवास योजना का उद्देश्य जरूरतमंद और पात्र परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने में सहायता देना है। इसलिए लाभार्थियों के चयन में पारदर्शिता जरूरी है। यदि किसी पात्र परिवार का नाम अनुचित तरीके से सूची से हटाया गया है, तो उसकी शिकायत की जांच होनी चाहिए। वहीं, किसी व्यक्ति से योजना का लाभ दिलाने के बदले अवैध धनराशि मांगे जाने का आरोप सही पाया जाता है, तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
पेयजल और अन्य निर्माण कार्यों में भी अनियमितता का आरोप
ग्रामीणों ने पेयजल व्यवस्था को लेकर भी अपनी शिकायत दर्ज कराई है। ज्ञापन में कहा गया है कि नमामि गंगे योजना के अंतर्गत बनाई गई पानी की टंकी अब तक चालू नहीं हुई है। इसके साथ ही जल जीवन मिशन से संबंधित कार्यों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ कामों को अभिलेखों में दर्शाया गया, लेकिन उनकी वास्तविक स्थिति की जांच किए जाने की आवश्यकता है।
यदि पानी की टंकी का निर्माण पूरा होने के बावजूद उससे नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही है, तो इसकी वजह का पता लगाना जरूरी है। इसके लिए टंकी की निर्माण स्थिति, पाइपलाइन, बिजली या अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं और जलापूर्ति से जुड़े अभिलेखों की जांच की जा सकती है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि समस्या निर्माण अधूरा होने, तकनीकी खामी या संचालन संबंधी किसी अन्य कारण से उत्पन्न हुई है।
इसके अतिरिक्त ग्रामीणों ने चकमार्ग, भूमि समतलीकरण, नाली निर्माण और बरसाती नाले से संबंधित कार्यों में भी कथित अनियमितताओं की शिकायत की है। इन कार्यों का उद्देश्य ग्रामीणों को आवागमन की सुविधा देना, जलनिकासी की समस्या कम करना और कृषि संबंधी गतिविधियों को सुगम बनाना है। ग्रामीणों ने संबंधित कार्यों की गुणवत्ता, लागत और उपयोगिता का परीक्षण कराने की मांग की है।
निष्पक्ष जांच और धनराशि की वसूली की मांग
कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपने पहुंचे ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराने की अपील की। उनका कहना है कि शिकायत में जिन योजनाओं और कार्यों का उल्लेख किया गया है, उनकी अलग-अलग जांच कराई जानी चाहिए, ताकि किसी भी आरोप को बिना सत्यापन के सही या गलत न माना जाए।
ग्रामीणों ने मांग की कि मनरेगा के भुगतान, आवास योजना की लाभार्थी सूची, विकास निधियों के खर्च और पेयजल परियोजनाओं से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाए। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित गांवों में मौके का निरीक्षण कराकर ग्रामीणों के बयान भी दर्ज किए जाएं। इससे शिकायत में उठाए गए सवालों का तथ्यात्मक आधार सामने आ सकेगा।
शिकायतकर्ताओं ने यह भी कहा कि यदि जांच में सरकारी धन के दुरुपयोग या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार धनराशि की वसूली की जाए और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो। साथ ही आवास योजना के वास्तविक पात्र लाभार्थियों को उनका अधिकार दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
ज्ञापन सौंपने के दौरान मौजूद रहे ग्रामीण
इस दौरान भगवानदास, माता प्रसाद, महादेव प्रसाद, राहुल सिंह, राजीव सिंह, प्रीतम, राजेंद्र, अशोक सिंह, सतीश कुमार, प्रभु दयाल और रतीराम समेत कई ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराकर उचित कार्रवाई किए जाने की मांग की।
फिलहाल यह मामला ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोपों और प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन पर आधारित है। ग्राम प्रधान का पक्ष, संबंधित विभागों की जांच रिपोर्ट और प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई की जानकारी सामने आने के बाद ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
