कतरनियाघाट के मतही पचासा में पिंजड़े में कैद हुआ तेंदुआ, बिजली कटौती को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी
अमृत पाल बहराइच
रिपोर्टर हिट एंड हॉट न्यूज़
बहराइच। कतरनियाघाट वन्यजीव प्रभाग से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली जानवरों की मौजूदगी ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मतही पचासा गांव में बीती देर रात एक तेंदुआ पिंजड़े में कैद किए जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। बताया जा रहा है कि पिछले कई दिनों से इलाके में तेंदुए की गतिविधियां देखे जाने के कारण गांव के लोग डर और आशंका के बीच रह रहे थे। बचन सिंह के घर के समीप वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजड़े में तेंदुए के फंसने की सूचना के बाद विभागीय टीम मौके पर पहुंची और आगे की प्रक्रिया शुरू की।
तेंदुए के पकड़े जाने से फिलहाल ग्रामीणों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन इस घटना ने कतरनियाघाट के आसपास वन्यजीवों और मानव आबादी के बीच बढ़ते संपर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास तौर पर ग्रामीणों ने रात में होने वाली बिजली कटौती को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि सेंचुरी क्षेत्र के आसपास बसे गांवों में रात के समय अंधेरा रहने से जंगली जानवरों की गतिविधियों का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

कई दिनों से तेंदुए की मौजूदगी से सहमे थे ग्रामीण
मतही पचासा गांव और आसपास के इलाकों में तेंदुए की आवाजाही की खबरों के बाद लोगों में भय का वातावरण बना हुआ था। ग्रामीणों के अनुसार, जंगल से सटे होने के कारण यहां अक्सर वन्यजीवों की हलचल देखने को मिलती है, लेकिन जब कोई तेंदुआ आबादी के करीब पहुंचता है तो खतरा काफी बढ़ जाता है।
रात के समय ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकलने से बचते हैं। बच्चों और बुजुर्गों को लेकर परिवारों की चिंता और बढ़ जाती है। खेतों तथा घरों के आसपास काम करने वाले लोगों को भी अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ती है। ऐसे माहौल में तेंदुए का पिंजड़े में कैद होना गांव के लोगों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
वन विभाग को तेंदुए की गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद निगरानी और रेस्क्यू की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। घर के नजदीक पिंजड़ा लगाए जाने के बाद वन्यजीव के उसमें फंसने का इंतजार किया गया। देर रात तेंदुए के पकड़े जाने के बाद मौके पर मौजूद लोगों में हलचल मच गई।
वन विभाग की टीम ने संभाला मोर्चा
तेंदुआ पिंजड़े में कैद होने की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। वन्यजीव को सुरक्षित रखने तथा विभागीय नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
वन्यजीव रेस्क्यू के दौरान सबसे महत्वपूर्ण चुनौती भीड़ को नियंत्रित रखना होती है। किसी जंगली जानवर के आसपास बड़ी संख्या में लोगों के जमा होने से वन्यजीव के साथ-साथ ग्रामीणों की सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में प्रशिक्षित कर्मचारियों की निगरानी में कार्रवाई किया जाना जरूरी होता है।
ग्रामीणों के मुताबिक, वन विभाग की सक्रियता से तेंदुए को सुरक्षित तरीके से पिंजड़े में कैद किया जा सका। इससे इलाके में तत्काल खतरे की स्थिति कुछ कम हुई है।
बिजली कटौती को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
तेंदुए के रेस्क्यू के साथ ही गांव में बिजली व्यवस्था को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सेंचुरी क्षेत्र से जुड़े संवेदनशील गांवों में रात के समय बिजली आपूर्ति बाधित होने से अंधेरा छा जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल के करीब रहने वाले इलाकों में रात का अंधेरा सुरक्षा की चुनौती को बढ़ा सकता है।
लोगों का तर्क है कि यदि बिजली लंबे समय तक बंद रहती है तो घरों के आसपास की गतिविधियों पर नजर रखना कठिन हो जाता है। जंगल की ओर से आने वाले वन्यजीवों की मौजूदगी का समय रहते पता लगाना भी मुश्किल हो सकता है।
हालांकि, बिजली कटौती और तेंदुए की आबादी वाले क्षेत्र में मौजूदगी के बीच प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि संबंधित विभागों की जांच और आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही की जा सकती है। फिलहाल बिजली व्यवस्था को लेकर सामने आई बातें स्थानीय ग्रामीणों की शिकायतों और आशंकाओं पर आधारित हैं।
अंधेरे में बढ़ती है वन्यजीवों की गतिविधि को लेकर चिंता
कतरनियाघाट वन्यजीव प्रभाग घने वन क्षेत्र और विविध वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। जंगल से सटे गांवों में रहने वाले लोगों का वन्यजीवों से सामना होना असामान्य नहीं है। कई बार भोजन और पानी की तलाश में जंगली जानवर जंगल की सीमा से बाहर निकलकर खेतों या आबादी के आसपास पहुंच जाते हैं।
तेंदुआ भी ऐसा वन्यजीव है जिसकी मौजूदगी आबादी वाले क्षेत्र में ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बन सकती है। खासकर रात के समय इसकी गतिविधियों को लेकर लोगों में स्वाभाविक रूप से भय बना रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली व्यवस्था बेहतर रहने पर घरों और रास्तों के आसपास रोशनी बनी रहती है, जिससे लोगों को आवाजाही में सुविधा मिलती है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना आसान होता है। इसी कारण उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को लेकर प्रशासन से गंभीरता से विचार करने की मांग की है।
प्रशासन से रात की बिजली व्यवस्था पर ध्यान देने की मांग
तेंदुए के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत तो जताई, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी उपाय किए जाने की मांग भी की है। उनका कहना है कि केवल वन्यजीव के पकड़े जाने से समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होती। जंगल से सटे गांवों में लगातार निगरानी, जागरूकता और बेहतर समन्वय जरूरी है।
स्थानीय लोगों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि सेंचुरी क्षेत्र के आसपास बिजली आपूर्ति की व्यवस्था की समीक्षा की जाए। विशेष रूप से रात के समय होने वाली रोस्टिंग या बिजली कटौती को लेकर स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग वन्यजीवों की निगरानी और रेस्क्यू में अपनी भूमिका निभा रहा है, लेकिन मानव बस्तियों की सुरक्षा के लिए दूसरे संबंधित विभागों को भी सहयोग करना चाहिए।
मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकना बड़ी चुनौती
कतरनियाघाट जैसे वन क्षेत्रों के आसपास मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन के लिए लगातार चुनौती बना रहता है। जंगल और आबादी के बीच दूरी कम होने पर वन्यजीवों के गांवों की ओर आने की संभावना बनी रहती है। ऐसे में स्थानीय लोगों को सावधानी बरतने के साथ-साथ वन विभाग की निगरानी व्यवस्था भी मजबूत रखना जरूरी है।
तेंदुए के पकड़े जाने की घटना यह संकेत देती है कि वन क्षेत्र से लगे गांवों में वन्यजीवों की गतिविधियों को लेकर लगातार सतर्कता आवश्यक है। ग्रामीणों को भी रात में अकेले जंगल या सुनसान इलाकों की ओर जाने से बचना चाहिए और वन्यजीव दिखाई देने पर उसे घेरने या उसके करीब जाने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचना देनी चाहिए।
मतही पचासा में तेंदुए के रेस्क्यू के बाद फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि वन विभाग आगे तेंदुए के संबंध में क्या कदम उठाता है और बिजली व्यवस्था को लेकर प्रशासन उनकी शिकायतों पर क्या निर्णय लेता है।
ग्रामीणों की मांग साफ है कि कतरनियाघाट सेंचुरी से सटे इलाकों में मानव सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण दोनों को ध्यान में रखकर व्यवस्था बनाई जाए। रात के समय रोशनी, वन विभाग की निगरानी और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल से ऐसी घटनाओं में जोखिम कम किया जा सकता है। फिलहाल तेंदुए के पिंजड़े में कैद होने से गांव में तत्काल भय का माहौल कम हुआ है, लेकिन इलाके के लोग चाहते हैं कि भविष्य में किसी संभावित घटना से पहले ही सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं।
