किसानों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर एसआईआर प्रक्रिया समाप्त करने की उठाई मांग

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

क्रासर— मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग
क्रासर— मतदाता सूची में नाम बहाल करने, चुनाव सुधार और आनुपातिक प्रतिनिधित्व व्यवस्था लागू करने पर दिया जोर

उरई (जालौन)। लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने आवाज बुलंद की है। संगठन के जिला प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह गौड़ के नेतृत्व में किसानों ने विरोध मार्च के माध्यम से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी के जरिए भेजा। ज्ञापन में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को तत्काल समाप्त करने, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने तथा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग उठाई गई। किसानों ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए प्रत्येक पात्र नागरिक का मतदान अधिकार सुरक्षित रहना आवश्यक है।

भारतीय किसान यूनियन की ओर से भेजे गए ज्ञापन में चुनाव व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया गया। संगठन ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि किसी भी नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटाने से पहले निर्धारित नियमों का पालन किया जाना चाहिए। किसानों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति का नाम सूची से हटाया जाता है तो उसे इसकी जानकारी मिलनी चाहिए और अपनी आपत्ति दर्ज कराने का पर्याप्त अवसर भी दिया जाना चाहिए।

एसआईआर प्रक्रिया पर जताई चिंता

किसान यूनियन ने विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां राष्ट्रपति तक पहुंचाईं। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूची में नामों की जांच और संशोधन के दौरान पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। ज्ञापन में कहा गया कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियादी पहचान है और इस अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासनिक स्तर पर निष्पक्ष व्यवस्था होनी चाहिए।

किसानों ने मांग की कि एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल रोककर इसकी समीक्षा की जाए। संगठन के अनुसार, मतदाता सूची में नाम शामिल करने और हटाने की प्रक्रिया स्पष्ट नियमों के तहत संचालित होनी चाहिए, ताकि किसी पात्र नागरिक को मतदान से वंचित होने की स्थिति का सामना न करना पड़े।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि मतदाता सूची से नाम हटाने की शिकायतों का समाधान निर्धारित समय में किया जाना चाहिए। जिन नागरिकों के नाम कथित तौर पर सूची से हटाए गए हैं, उनके मामलों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। संगठन ने मतदान के अधिकार से प्रभावित लोगों को राहत देने और उनके नाम पुनः शामिल करने की मांग की।

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग

भारतीय किसान यूनियन ने ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग भी शामिल की। संगठन ने उनके खिलाफ संवैधानिक जिम्मेदारियों के निर्वहन को लेकर सवाल उठाते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

किसान नेताओं का कहना है कि निर्वाचन व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों से निष्पक्षता, पारदर्शिता और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप कार्य करने की अपेक्षा की जाती है। ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त पर संवैधानिक शपथ के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई।

संगठन ने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली पर जनता का विश्वास बनाए रखना आवश्यक है। इसके लिए चुनाव संबंधी निर्णयों और मतदाता सूची के संशोधन की प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग जैसी संवैधानिक प्रक्रिया पर विचार करने की मांग भी उठाई गई। हालांकि संगठन की ओर से लगाए गए आरोपों को लेकर संबंधित पक्ष का पक्ष ज्ञापन में शामिल नहीं था।

मताधिकार बहाली को बताया लोकतंत्र की प्राथमिकता

किसान यूनियन ने राष्ट्रपति से अपील की कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के कारण मतदान से वंचित हुए पात्र नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। संगठन ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया का उद्देश्य जनता को अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर देना है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि मताधिकार केवल चुनाव के दिन मतदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाता सूची में नाम दर्ज होना भी इसकी महत्वपूर्ण शर्त है। इसलिए सूची में नाम जोड़ने, संशोधन करने और हटाने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और नागरिकों के लिए सुलभ बनाया जाना चाहिए।

किसानों ने मांग की कि मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों के निस्तारण के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। पात्र नागरिकों को अपने दस्तावेज प्रस्तुत करने और नाम दर्ज कराने का उचित अवसर मिले। संगठन ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को प्रक्रिया की जानकारी के अभाव में मतदान के अधिकार से वंचित नहीं होना चाहिए।

चुनाव सुधारों को लेकर उठाई आवाज

भारतीय किसान यूनियन ने ज्ञापन के माध्यम से चुनाव व्यवस्था में व्यापक सुधार लागू करने की मांग की। संगठन का कहना है कि लोकतंत्र को अधिक प्रतिनिधिक और मजबूत बनाने के लिए मौजूदा चुनाव प्रणाली की समीक्षा आवश्यक है।

ज्ञापन में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली लागू करने की मांग की गई। किसान नेताओं के अनुसार, इस व्यवस्था पर विचार करने से चुनावी प्रतिनिधित्व को लेकर व्यापक चर्चा का अवसर मिलेगा। संगठन ने कहा कि चुनाव प्रणाली में ऐसे सुधार किए जाने चाहिए, जिससे जनता की भागीदारी और प्रतिनिधित्व के सवालों का समाधान हो सके।

इसके अलावा चुनावों में धनबल और बाहुबल के प्रभाव को रोकने की मांग भी उठाई गई। संगठन का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में आर्थिक संसाधनों और अनुचित प्रभाव का इस्तेमाल लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकता है। इसलिए चुनाव के दौरान निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी निगरानी और सख्त नियम लागू किए जाने चाहिए।

किसान यूनियन ने चुनावों में सरकारी फंडिंग की व्यवस्था लागू करने की मांग भी की। संगठन के अनुसार, चुनावी खर्च और राजनीतिक दलों के वित्तपोषण को लेकर पारदर्शी व्यवस्था विकसित करने पर विचार किया जाना चाहिए। इससे चुनावी प्रक्रिया में आर्थिक असमानता और धन के प्रभाव को कम करने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है।

चयन पैनल में मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने की मांग

ज्ञापन में वर्ष 2023 के संबंधित कानून में संशोधन करने का मुद्दा भी उठाया गया। भारतीय किसान यूनियन ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के चयन से संबंधित व्यवस्था में मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने की मांग की।

संगठन का कहना है कि निर्वाचन अधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया में निष्पक्षता और संस्थागत संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। चयन व्यवस्था को लेकर विभिन्न संवैधानिक और लोकतांत्रिक पहलुओं पर विचार किया जाना चाहिए।

किसान नेताओं ने कहा कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए नियुक्ति प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिस पर जनता का विश्वास कायम रहे और सभी संबंधित पक्षों को पारदर्शिता का अनुभव हो।

लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए एकजुटता का आह्वान

भारतीय किसान यूनियन ने ज्ञापन में कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है। संगठन ने किसानों और आम नागरिकों से चुनाव सुधार तथा मताधिकार की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जागरूक रहने की अपील की।

किसान नेताओं का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाता सूची की शुद्धता और निष्पक्ष प्रशासन लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रमुख आधार हैं। इन विषयों पर उठने वाली शिकायतों का समाधान उचित प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए।

संगठन ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाए। एसआईआर प्रक्रिया की समीक्षा, मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों का निस्तारण, चुनाव सुधारों पर चर्चा और पात्र नागरिकों के मतदान अधिकारों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

किसानों ने प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति तक पहुंचाई मांग

भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह गौड़ ने किसानों के विरोध मार्च के दौरान ज्ञापन सौंपते हुए चुनाव व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। संगठन ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही आवश्यक है।

ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने चुनाव व्यवस्था में सुधार, मतदाता सूची की पारदर्शिता और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की। संगठन का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की शिकायत का समाधान निर्धारित नियमों और निष्पक्ष जांच के आधार पर होना चाहिए।

इस अवसर पर डा. केदारनाथ सिमिरिया, बृजेश राजपूत, भवन राजपूत, महेश यादव, चतुर सिंह, देवकरन सिंह सहित भारतीय किसान यूनियन के अन्य नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

किसान यूनियन ने राष्ट्रपति से उम्मीद जताई कि ज्ञापन में उठाए गए विषयों पर उचित स्तर पर विचार किया जाएगा और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। संगठन ने मताधिकार की सुरक्षा, चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतिनिधित्व को लोकतंत्र की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण बताया।

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किसानों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर एसआईआर प्रक्रिया समाप्त करने की उठाई मांग

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 23, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

क्रासर— मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग
क्रासर— मतदाता सूची में नाम बहाल करने, चुनाव सुधार और आनुपातिक प्रतिनिधित्व व्यवस्था लागू करने पर दिया जोर

उरई (जालौन)। लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने आवाज बुलंद की है। संगठन के जिला प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह गौड़ के नेतृत्व में किसानों ने विरोध मार्च के माध्यम से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी के जरिए भेजा। ज्ञापन में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को तत्काल समाप्त करने, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने तथा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग उठाई गई। किसानों ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए प्रत्येक पात्र नागरिक का मतदान अधिकार सुरक्षित रहना आवश्यक है।

भारतीय किसान यूनियन की ओर से भेजे गए ज्ञापन में चुनाव व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया गया। संगठन ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि किसी भी नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटाने से पहले निर्धारित नियमों का पालन किया जाना चाहिए। किसानों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति का नाम सूची से हटाया जाता है तो उसे इसकी जानकारी मिलनी चाहिए और अपनी आपत्ति दर्ज कराने का पर्याप्त अवसर भी दिया जाना चाहिए।

एसआईआर प्रक्रिया पर जताई चिंता

किसान यूनियन ने विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां राष्ट्रपति तक पहुंचाईं। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूची में नामों की जांच और संशोधन के दौरान पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। ज्ञापन में कहा गया कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियादी पहचान है और इस अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासनिक स्तर पर निष्पक्ष व्यवस्था होनी चाहिए।

किसानों ने मांग की कि एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल रोककर इसकी समीक्षा की जाए। संगठन के अनुसार, मतदाता सूची में नाम शामिल करने और हटाने की प्रक्रिया स्पष्ट नियमों के तहत संचालित होनी चाहिए, ताकि किसी पात्र नागरिक को मतदान से वंचित होने की स्थिति का सामना न करना पड़े।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि मतदाता सूची से नाम हटाने की शिकायतों का समाधान निर्धारित समय में किया जाना चाहिए। जिन नागरिकों के नाम कथित तौर पर सूची से हटाए गए हैं, उनके मामलों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। संगठन ने मतदान के अधिकार से प्रभावित लोगों को राहत देने और उनके नाम पुनः शामिल करने की मांग की।

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग

भारतीय किसान यूनियन ने ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग भी शामिल की। संगठन ने उनके खिलाफ संवैधानिक जिम्मेदारियों के निर्वहन को लेकर सवाल उठाते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

किसान नेताओं का कहना है कि निर्वाचन व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों से निष्पक्षता, पारदर्शिता और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप कार्य करने की अपेक्षा की जाती है। ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त पर संवैधानिक शपथ के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई।

संगठन ने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली पर जनता का विश्वास बनाए रखना आवश्यक है। इसके लिए चुनाव संबंधी निर्णयों और मतदाता सूची के संशोधन की प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग जैसी संवैधानिक प्रक्रिया पर विचार करने की मांग भी उठाई गई। हालांकि संगठन की ओर से लगाए गए आरोपों को लेकर संबंधित पक्ष का पक्ष ज्ञापन में शामिल नहीं था।

मताधिकार बहाली को बताया लोकतंत्र की प्राथमिकता

किसान यूनियन ने राष्ट्रपति से अपील की कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के कारण मतदान से वंचित हुए पात्र नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। संगठन ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया का उद्देश्य जनता को अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर देना है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि मताधिकार केवल चुनाव के दिन मतदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाता सूची में नाम दर्ज होना भी इसकी महत्वपूर्ण शर्त है। इसलिए सूची में नाम जोड़ने, संशोधन करने और हटाने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और नागरिकों के लिए सुलभ बनाया जाना चाहिए।

किसानों ने मांग की कि मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों के निस्तारण के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। पात्र नागरिकों को अपने दस्तावेज प्रस्तुत करने और नाम दर्ज कराने का उचित अवसर मिले। संगठन ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को प्रक्रिया की जानकारी के अभाव में मतदान के अधिकार से वंचित नहीं होना चाहिए।

चुनाव सुधारों को लेकर उठाई आवाज

भारतीय किसान यूनियन ने ज्ञापन के माध्यम से चुनाव व्यवस्था में व्यापक सुधार लागू करने की मांग की। संगठन का कहना है कि लोकतंत्र को अधिक प्रतिनिधिक और मजबूत बनाने के लिए मौजूदा चुनाव प्रणाली की समीक्षा आवश्यक है।

ज्ञापन में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली लागू करने की मांग की गई। किसान नेताओं के अनुसार, इस व्यवस्था पर विचार करने से चुनावी प्रतिनिधित्व को लेकर व्यापक चर्चा का अवसर मिलेगा। संगठन ने कहा कि चुनाव प्रणाली में ऐसे सुधार किए जाने चाहिए, जिससे जनता की भागीदारी और प्रतिनिधित्व के सवालों का समाधान हो सके।

इसके अलावा चुनावों में धनबल और बाहुबल के प्रभाव को रोकने की मांग भी उठाई गई। संगठन का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में आर्थिक संसाधनों और अनुचित प्रभाव का इस्तेमाल लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकता है। इसलिए चुनाव के दौरान निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी निगरानी और सख्त नियम लागू किए जाने चाहिए।

किसान यूनियन ने चुनावों में सरकारी फंडिंग की व्यवस्था लागू करने की मांग भी की। संगठन के अनुसार, चुनावी खर्च और राजनीतिक दलों के वित्तपोषण को लेकर पारदर्शी व्यवस्था विकसित करने पर विचार किया जाना चाहिए। इससे चुनावी प्रक्रिया में आर्थिक असमानता और धन के प्रभाव को कम करने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है।

चयन पैनल में मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने की मांग

ज्ञापन में वर्ष 2023 के संबंधित कानून में संशोधन करने का मुद्दा भी उठाया गया। भारतीय किसान यूनियन ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के चयन से संबंधित व्यवस्था में मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने की मांग की।

संगठन का कहना है कि निर्वाचन अधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया में निष्पक्षता और संस्थागत संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। चयन व्यवस्था को लेकर विभिन्न संवैधानिक और लोकतांत्रिक पहलुओं पर विचार किया जाना चाहिए।

किसान नेताओं ने कहा कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए नियुक्ति प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिस पर जनता का विश्वास कायम रहे और सभी संबंधित पक्षों को पारदर्शिता का अनुभव हो।

लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए एकजुटता का आह्वान

भारतीय किसान यूनियन ने ज्ञापन में कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है। संगठन ने किसानों और आम नागरिकों से चुनाव सुधार तथा मताधिकार की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जागरूक रहने की अपील की।

किसान नेताओं का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाता सूची की शुद्धता और निष्पक्ष प्रशासन लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रमुख आधार हैं। इन विषयों पर उठने वाली शिकायतों का समाधान उचित प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए।

संगठन ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाए। एसआईआर प्रक्रिया की समीक्षा, मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों का निस्तारण, चुनाव सुधारों पर चर्चा और पात्र नागरिकों के मतदान अधिकारों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

किसानों ने प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति तक पहुंचाई मांग

भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह गौड़ ने किसानों के विरोध मार्च के दौरान ज्ञापन सौंपते हुए चुनाव व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। संगठन ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही आवश्यक है।

ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने चुनाव व्यवस्था में सुधार, मतदाता सूची की पारदर्शिता और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की। संगठन का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की शिकायत का समाधान निर्धारित नियमों और निष्पक्ष जांच के आधार पर होना चाहिए।

इस अवसर पर डा. केदारनाथ सिमिरिया, बृजेश राजपूत, भवन राजपूत, महेश यादव, चतुर सिंह, देवकरन सिंह सहित भारतीय किसान यूनियन के अन्य नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

किसान यूनियन ने राष्ट्रपति से उम्मीद जताई कि ज्ञापन में उठाए गए विषयों पर उचित स्तर पर विचार किया जाएगा और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। संगठन ने मताधिकार की सुरक्षा, चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतिनिधित्व को लोकतंत्र की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण बताया।