लाठीचार्ज के विरोध में आयुष डॉक्टरों का कैंडल मार्च, 1090 चौराहे पर जताया विरोध
अमरेश त्रिपाठी
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में आयुष डॉक्टरों ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में कैंडल मार्च निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। 1090 चौराहे पर आयोजित इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर पिछले दिन हुई घटना पर नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों ने घटना को अपने आंदोलन के इतिहास का एक काला दिन बताते हुए घायल हुए साथियों के लिए न्याय की मांग उठाई।

आयुष डॉक्टरों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनका दावा है कि आंदोलन के दौरान पुलिस की कार्रवाई में कई साथी घायल हुए, जिसके बाद डॉक्टरों में आक्रोश बढ़ गया। इसी के विरोध में बुधवार को डॉक्टरों ने कैंडल मार्च के माध्यम से अपनी बात सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया।
1090 चौराहे पर जुटे आयुष डॉक्टर
लखनऊ का 1090 चौराहा बुधवार को आयुष डॉक्टरों के विरोध प्रदर्शन का केंद्र बना। शाम के समय डॉक्टरों का समूह यहां एकत्र हुआ और हाथों में मोमबत्तियां लेकर मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों ने अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाई और पिछले दिन की पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए।
कैंडल मार्च का उद्देश्य केवल विरोध दर्ज कराना ही नहीं, बल्कि घायल प्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता जाहिर करना भी बताया गया। डॉक्टरों ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखना उनका अधिकार है और इसी उद्देश्य से वे आंदोलन कर रहे हैं।
मोमबत्तियों के साथ निकाले गए मार्च में डॉक्टरों ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में नारे भी लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आंदोलन के दौरान हुई घटना को लेकर जिम्मेदार पक्षों पर कार्रवाई होनी चाहिए और घायल हुए डॉक्टरों को न्याय मिलना चाहिए।
पिछली घटना को बताया ‘ब्लैक डे’
आयुष डॉक्टरों ने पिछले दिन हुई घटना को ‘ब्लैक डे’ बताया। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, आंदोलन के दौरान पुलिस की कार्रवाई से कई डॉक्टर प्रभावित हुए और कुछ साथी घायल हुए। डॉक्टरों ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से सुना जाना चाहिए था।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनकी मांगों पर बातचीत के माध्यम से समाधान निकाला जाना चाहिए। उनका कहना है कि किसी भी आंदोलन का उद्देश्य व्यवस्था को बाधित करना नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी समस्याओं और मांगों को रखना होता है।
डॉक्टरों ने सरकार और प्रशासन से अपील की कि वह उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे और आंदोलन से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान निकालने की दिशा में कदम उठाए।

घायल साथियों के लिए न्याय की मांग
कैंडल मार्च के दौरान आयुष डॉक्टरों ने प्रदर्शन के दौरान घायल हुए अपने साथियों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। डॉक्टरों ने कहा कि आंदोलन में शामिल साथियों के साथ हुई घटना की निष्पक्ष तरीके से जांच होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसके लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि घायल हुए डॉक्टरों और उनके परिवारों की स्थिति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से घटना की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने और उचित कार्रवाई की मांग की।
डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ माहौल बनाना नहीं है, बल्कि अपनी मांगों को संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से सामने रखना है।
शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखने का ऐलान
आयुष डॉक्टरों ने कैंडल मार्च के बाद भी अपना आंदोलन जारी रखने की बात कही। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आगे होने वाले कार्यक्रमों में भी शांतिपूर्ण तरीके अपनाए जाएंगे। डॉक्टरों ने प्रशासन से अपील की कि आंदोलनकारियों के साथ संवाद स्थापित किया जाए, ताकि विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाया जा सके।
डॉक्टरों का कहना है कि वे स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े पेशेवर हैं और समाज में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए उनकी समस्याओं और मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
सरकार से बातचीत की मांग
कैंडल मार्च के दौरान डॉक्टरों ने सरकार से बातचीत की मांग भी दोहराई। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, लंबे समय से उठाई जा रही मांगों पर यदि संबंधित विभाग और सरकार के प्रतिनिधि डॉक्टरों के साथ बातचीत करें तो समाधान का रास्ता निकल सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि वे टकराव नहीं चाहते। उनका प्रयास है कि उनकी मांगों को संबंधित अधिकारियों तक व्यवस्थित तरीके से पहुंचाया जाए और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट निर्णय लिया जाए।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि आंदोलन को लेकर किसी भी तरह की गलतफहमी नहीं होनी चाहिए। वे अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखना चाहते हैं और प्रशासन से भी संयम तथा संवाद की अपेक्षा करते हैं।
कैंडल मार्च से दिया एकजुटता का संदेश
1090 चौराहे पर आयोजित कैंडल मार्च ने आयुष डॉक्टरों की एकजुटता को भी सामने रखा। डॉक्टरों ने मोमबत्तियां जलाकर घायल साथियों के प्रति संवेदना व्यक्त की और अपनी मांगों के समर्थन में एकजुट रहने का संदेश दिया।
प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों ने कहा कि पिछली घटना से वे निराश जरूर हैं, लेकिन इससे उनका आंदोलन समाप्त नहीं होगा। वे आगे भी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
आयुष डॉक्टरों का कहना है कि किसी भी मांग के समाधान के लिए संवाद सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए सरकार और प्रशासन को डॉक्टरों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझना चाहिए।
आंदोलन के अगले चरण पर नजर
कैंडल मार्च के बाद अब आयुष डॉक्टरों के आंदोलन के अगले चरण को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। डॉक्टरों ने संकेत दिया है कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के बजाय लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखेंगे।
हालांकि, आगे आंदोलन किस स्वरूप में होगा और प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर स्थिति संबंधित पक्षों के अगले निर्णयों पर निर्भर करेगी। फिलहाल डॉक्टरों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है।
आयुष डॉक्टरों का यह कैंडल मार्च लाठीचार्ज के विरोध के साथ-साथ सरकार और प्रशासन तक अपनी मांगों को पहुंचाने का माध्यम बना। डॉक्टरों ने घायल साथियों के लिए न्याय, पिछली घटना की निष्पक्ष जांच और अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई की मांग दोहराई।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा और वे बातचीत के माध्यम से समाधान चाहते हैं। अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है और डॉक्टरों की मांगों को लेकर आगे किस स्तर पर बातचीत होती है।