यूपी की 58 हजार ग्राम पंचायतों का बदलेगा विकास मॉडल, योगी सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को दिए निर्देश
अमरेश त्रिपाठी
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ कानपुर देहात
क्रासर : अब गांवों के विकास की योजनाएं अनुमान नहीं, बल्कि वास्तविक जरूरतों और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर होंगी तैयार; विकसित ग्राम पंचायत प्लान (VGPP) पोर्टल के माध्यम से बनेगा विकास का रोडमैप, अधिकारियों और कर्मचारियों को दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की ग्रामीण विकास व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में योगी सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। प्रदेश की लगभग 58 हजार ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की योजना तैयार करने के पारंपरिक तरीके में बदलाव किया जाएगा। अब गांवों के विकास से जुड़ी योजनाएं केवल सामान्य अनुमान या पुराने आंकड़ों के आधार पर नहीं बनाई जाएंगी, बल्कि स्थानीय जरूरतों, उपलब्ध संसाधनों और प्रमाणिक तथ्यों को ध्यान में रखकर विकास का खाका तैयार किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य प्रत्येक ग्राम पंचायत को उसकी वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप विकास की दिशा देना है।
इस नई व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए ग्राम्य विकास विभाग ने प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। ग्राम्य विकास आयुक्त प्रमोद कुमार उपाध्याय की ओर से प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि ग्राम पंचायतों में योजनाबद्ध विकास की प्रक्रिया को गति दी जाए और संबंधित विभागों के अधिकारियों तथा कर्मचारियों को नई प्रणाली के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
अब गांवों की जरूरतों के हिसाब से बनेगा विकास प्लान
प्रदेश सरकार की इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत के विकास की योजना स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाई जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं पेयजल की समस्या प्रमुख है तो कहीं सड़क, नाली, जल निकासी, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी जरूरतें अधिक हैं। इसी तरह कुछ गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाने की आवश्यकता है तो कुछ स्थानों पर सिंचाई और कृषि संबंधी सुविधाओं को बेहतर बनाने की जरूरत है।
नई व्यवस्था के तहत इन सभी पहलुओं का अध्ययन करके ग्राम पंचायत स्तर पर प्राथमिकताएं निर्धारित की जाएंगी। इसके बाद उपलब्ध संसाधनों और विकास की आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों का चयन किया जाएगा। इससे गांवों में उन योजनाओं को पहले स्थान मिल सकेगा, जिनकी स्थानीय लोगों को सबसे अधिक आवश्यकता है।
सरकार की मंशा है कि विकास कार्यों का चयन करते समय जमीनी वास्तविकताओं को प्राथमिकता दी जाए। इससे अनावश्यक कार्यों पर खर्च होने वाली धनराशि को कम करने और उपलब्ध बजट का बेहतर उपयोग करने में सहायता मिल सकती है।
VGPP पोर्टल बनेगा विकास योजना तैयार करने का प्रमुख माध्यम
ग्राम पंचायतों के विकास की इस नई प्रक्रिया में विकसित ग्राम पंचायत प्लान यानी वीजीपीपी (VGPP) पोर्टल की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। सरकार इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग को बढ़ावा देना चाहती है, ताकि ग्राम पंचायतों की योजनाओं को व्यवस्थित तरीके से तैयार किया जा सके।
पोर्टल के माध्यम से गांवों की आवश्यकताओं, विकास संबंधी प्रस्तावों और उपलब्ध आंकड़ों को एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत संकलित करने पर जोर दिया जाएगा। इससे योजना तैयार करने के दौरान जरूरी सूचनाएं एक ही डिजिटल व्यवस्था में उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
तकनीक के इस्तेमाल से विकास योजनाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने के साथ ही उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया को भी बेहतर किया जा सकता है। डिजिटल माध्यम से तैयार होने वाले रिकॉर्ड के आधार पर संबंधित अधिकारी योजनाओं की समीक्षा कर सकेंगे और आवश्यकतानुसार सुधार के कदम उठा सकेंगे।
इस व्यवस्था का एक अन्य महत्वपूर्ण उद्देश्य ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाना है। जब योजनाएं उपलब्ध आंकड़ों और निर्धारित प्राथमिकताओं के आधार पर तैयार होंगी, तो उनके चयन और क्रियान्वयन को लेकर जवाबदेही भी मजबूत हो सकेगी।
पहले प्रदेश मुख्यालय पर होगा प्रशिक्षण
नई प्रणाली को जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए सरकार ने प्रशिक्षण को भी प्राथमिकता दी है। ग्राम्य विकास आयुक्त की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार सबसे पहले प्रदेश मुख्यालय पर संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके बाद एक सप्ताह के भीतर विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी।
प्रशिक्षण के दौरान वीजीपीपी पोर्टल के संचालन, आवश्यक आंकड़ों को दर्ज करने, ग्राम पंचायत की जरूरतों का आकलन करने और विकास योजनाओं को तैयार करने से संबंधित जानकारी दी जाएगी।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गांवों में काम करने वाले अधिकारी और कर्मचारी नई तकनीकी व्यवस्था को सही तरीके से समझ सकें। यदि जमीनी स्तर पर तैनात कर्मचारियों को पोर्टल के इस्तेमाल और योजना निर्माण की प्रक्रिया की पर्याप्त जानकारी होगी, तभी इस पहल का लाभ सभी ग्राम पंचायतों तक पहुंच सकेगा।
इसके लिए जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में प्रशिक्षण संबंधी तैयारियों और संबंधित अधिकारियों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
पंचायतों को मिलेगा योजनाबद्ध विकास का आधार
उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतें ग्रामीण प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं। गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन और स्थानीय समस्याओं का समाधान काफी हद तक पंचायतों की कार्यप्रणाली पर निर्भर करता है।
ऐसे में विकास योजनाओं को तथ्यों और वास्तविक जरूरतों के आधार पर तैयार करने की पहल को ग्रामीण प्रशासन में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इससे प्रत्येक ग्राम पंचायत अपनी समस्याओं और विकास की संभावनाओं को बेहतर ढंग से सामने रख सकेगी।
उदाहरण के तौर पर किसी गांव में पेयजल की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती है तो वहां जलापूर्ति से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जा सकेगी। वहीं किसी अन्य गांव में संपर्क मार्गों की स्थिति खराब होने पर सड़क निर्माण और मरम्मत से जुड़े प्रस्तावों को प्रमुखता मिल सकती है।
इसी तरह शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, जल संरक्षण, कृषि और ग्रामीण आजीविका से जुड़े विषयों को भी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास योजना में शामिल किया जा सकेगा।
स्वामित्व योजना में 1.05 करोड़ से अधिक घरौनियां तैयार
ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार की ओर से अन्य योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। इसी क्रम में स्वामित्व योजना के तहत प्रदेश में 1.05 करोड़ से अधिक घरौनियां तैयार कर वितरित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
स्वामित्व योजना का उद्देश्य ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में लोगों को उनके आवासीय भवनों और संपत्तियों के संबंध में आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध कराना है। इससे ग्रामीण परिवारों को अपनी संपत्ति का रिकॉर्ड प्राप्त करने में मदद मिलती है।
घरौनी दस्तावेज मिलने से संपत्ति संबंधी पहचान और अभिलेखों को व्यवस्थित करने का आधार तैयार होता है। इसके अलावा गांवों में संपत्तियों के रिकॉर्ड को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित रखने की दिशा में भी यह योजना महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति संबंधी विवादों को कम करने और लोगों को उनके आवासीय अधिकारों से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने में सहायता मिल सकती है।
फार्मर रजिस्ट्री में 1.44 करोड़ से अधिक पंजीकरण
किसानों से संबंधित सरकारी योजनाओं को अधिक व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से फार्मर रजिस्ट्री का कार्य भी आगे बढ़ रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश में इस व्यवस्था के अंतर्गत 1.44 करोड़ से अधिक पंजीकरण पूरे किए जा चुके हैं।
फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से किसानों की पहचान और उनसे संबंधित जरूरी जानकारियों को डिजिटल रिकॉर्ड में व्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे पात्र किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने और कृषि क्षेत्र से संबंधित सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
डिजिटल किसान रिकॉर्ड तैयार होने से सरकारी विभागों को किसानों से संबंधित सूचनाओं के प्रबंधन में सुविधा मिल सकती है। साथ ही योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया को भी अधिक व्यवस्थित बनाने का रास्ता तैयार होता है।
ग्रामीण विकास में तकनीक और पारदर्शिता पर जोर
योगी सरकार की ओर से ग्राम पंचायतों के विकास मॉडल में प्रस्तावित बदलाव का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं की गुणवत्ता और उपयोगिता बढ़ाना है। लगभग 58 हजार ग्राम पंचायतों को इस व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी अपने आप में एक बड़ा प्रशासनिक कार्य है।
हालांकि इस पहल की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ग्राम पंचायत स्तर पर आंकड़े कितने सही तरीके से जुटाए जाते हैं, स्थानीय लोगों की जरूरतों को योजनाओं में कितनी प्राथमिकता मिलती है और प्रस्तावित कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के लिए कितना प्रभावी प्रयास किया जाता है।
प्रशासनिक अधिकारियों, विकासखंड स्तर के कर्मचारियों और ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल भी इस पूरी प्रक्रिया के लिए जरूरी होगा।
कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों की विकास योजना तैयार करने के तरीके को डिजिटल और साक्ष्य आधारित बनाने की यह पहल ग्रामीण प्रशासन को नई दिशा देने की क्षमता रखती है। यदि योजनाओं का निर्माण वास्तविक समस्याओं के आधार पर किया जाता है और उनका क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से होता है, तो आने वाले समय में गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, संसाधनों के बेहतर उपयोग और विकास कार्यों की जवाबदेही को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
