जुलाई 1, 2026

हिज़्बुल्लाह का खतरा खत्म होने तक दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगा इज़राइल: प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू

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दक्षिणी लेबनान में जारी तनाव के बीच इज़राइल के प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक हिज़्बुल्लाह से सुरक्षा संबंधी खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक इज़राइली सेना इस क्षेत्र से पीछे नहीं हटेगी। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका की मध्यस्थता से इज़राइल और लेबनान के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक नया समझौता हुआ है, जिसके तहत कुछ क्षेत्रों का नियंत्रण लेबनानी सेना को सौंपने की योजना बनाई गई है।

दक्षिणी लेबनान में सैनिकों से मिले नेतन्याहू

दक्षिणी लेबनान के कब्ज़े वाले इलाके के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अग्रिम मोर्चे पर तैनात इज़राइली सैनिकों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि इज़राइल की पहली प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है और जब तक हिज़्बुल्लाह की सैन्य गतिविधियां समाप्त नहीं होतीं, तब तक सेना अपनी मौजूदा स्थिति बनाए रखेगी।

उनके अनुसार, किसी भी जल्दबाज़ी में पीछे हटने का फैसला भविष्य में इज़राइल की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।

सुरक्षा समझौते के बावजूद सतर्क रुख

हाल ही में अमेरिका की मध्यस्थता से हुए सुरक्षा समझौते के तहत इज़राइल दो सीमावर्ती “पायलट ज़ोन” से चरणबद्ध तरीके से पीछे हटने पर सहमत हुआ है। इन इलाकों में आगे चलकर लेबनानी सेना की तैनाती की जाएगी, ताकि सीमा क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखी जा सके।

हालांकि, नेतन्याहू ने संकेत दिया कि समझौते का पालन तभी पूरी तरह संभव होगा, जब यह सुनिश्चित हो जाए कि हिज़्बुल्लाह दोबारा इन क्षेत्रों में अपनी सैन्य मौजूदगी स्थापित नहीं करेगा।

हिज़्बुल्लाह के हथियारों पर जताई चिंता

प्रधानमंत्री ने दावा किया कि हिज़्बुल्लाह के पास अब भी बड़ी संख्या में रॉकेट और मिसाइलें मौजूद हैं। उनके अनुसार संगठन के पास लगभग 12,000 रॉकेट और मिसाइलों का भंडार है, जो इज़राइल के उत्तरी हिस्से के लिए गंभीर सुरक्षा चुनौती बना हुआ है।

इज़राइल का मानना है कि जब तक इस सैन्य क्षमता को निष्क्रिय नहीं किया जाता, तब तक सीमा क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

संघर्ष की पृष्ठभूमि

मार्च 2026 में इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया था। इस टकराव ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी और दोनों पक्षों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

इस संघर्ष के दौरान लेबनान में हजारों लोगों की मौत हुई, जबकि बड़ी संख्या में नागरिकों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। दूसरी ओर, हिज़्बुल्लाह के हमलों में इज़राइली सैनिकों और नागरिकों की भी जान गई।

सीमा पर सुरक्षा क्षेत्र बनाने की रणनीति

इज़राइल ने अपनी उत्तरी सीमा की सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से सीमा से लगभग 10 किलोमीटर भीतर तक एक सुरक्षा क्षेत्र विकसित किया है। इज़राइली सरकार का कहना है कि इस बफर ज़ोन का उद्देश्य सीमावर्ती बस्तियों को रॉकेट हमलों और घुसपैठ से सुरक्षित रखना है।

सरकार का दावा है कि यह कदम पूरी तरह सुरक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

लेबनान में मानवीय संकट गहराया

लगातार सैन्य अभियानों और संघर्ष के कारण दक्षिणी लेबनान के कई गांव प्रभावित हुए हैं। बड़ी संख्या में परिवार अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं और अनेक इलाकों में बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है।

स्थानीय लोगों के सामने आवास, भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और पुनर्वास जैसी गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। मानवीय संगठनों ने भी क्षेत्र की स्थिति पर चिंता व्यक्त की है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चिंता

अमेरिका की मध्यस्थता से हुए सुरक्षा समझौते को तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। इसके बावजूद सीमा पर हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं और किसी भी छोटी घटना से तनाव फिर बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष समझौते की शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं करते, तो क्षेत्र में फिर से व्यापक संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है।

निष्कर्ष

दक्षिणी लेबनान के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का बयान यह संकेत देता है कि इज़राइल फिलहाल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखने के पक्ष में है। वहीं, दूसरी ओर लेबनान में मानवीय संकट और क्षेत्रीय तनाव लगातार गहराता जा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका की मध्यस्थता, लेबनानी सेना की भूमिका और हिज़्बुल्लाह की गतिविधियां इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित होंगी।

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