मानव-वन्यजीव संघर्ष के समाधान की दिशा में बड़ा कदम: राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र और राष्ट्रीय पोर्टल का शुभारंभ

भारत में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और वन्यजीव संरक्षण को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित सलीम अली सेंटर फॉर ऑर्निथोलॉजी एंड नेचुरल हिस्ट्री (SACON) में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence for Human-Wildlife Conflict) का उद्घाटन किया। इसी अवसर पर उन्होंने मानव-वन्यजीव संघर्ष राष्ट्रीय पोर्टल का भी शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य देशभर में ऐसी घटनाओं की निगरानी, विश्लेषण और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है।
बढ़ती चुनौती से निपटने की नई पहल
पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न राज्यों में मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। जंगलों के सीमित होते दायरे, बढ़ते शहरीकरण और मानव गतिविधियों के विस्तार के कारण हाथी, बाघ, तेंदुए और अन्य वन्यजीव अक्सर आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं। इससे जान-माल की हानि होने के साथ-साथ वन्यजीवों का संरक्षण भी चुनौतीपूर्ण बन जाता है।
इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए स्थापित किया गया यह उत्कृष्टता केंद्र वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और व्यवहारिक नीति निर्माण के माध्यम से प्रभावी रणनीतियां तैयार करेगा।
टाइगर रिजर्व से बाहर भी रहेगा विशेष फोकस
उद्घाटन समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष केवल संरक्षित वन क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। इसलिए ऐसी योजनाएं तैयार करना आवश्यक है, जिनके माध्यम से टाइगर रिजर्व और संरक्षित क्षेत्रों के बाहर भी बाघ, तेंदुए और हाथियों से जुड़े संघर्षों का प्रभावी प्रबंधन किया जा सके।
उन्होंने विशेषज्ञों से स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप समाधान विकसित करने और राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाने का भी आह्वान किया।
जन-जागरूकता को बनाया जाएगा अभियान का आधार
मंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए आम नागरिकों की भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मिशन मोड में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे, ताकि लोगों को यह जानकारी मिल सके कि वन्यजीवों के संपर्क में आने पर किस प्रकार सुरक्षित व्यवहार करना चाहिए। सही जानकारी और सतर्कता कई दुर्घटनाओं को रोक सकती है।
राष्ट्रीय पोर्टल से मिलेगा एकीकृत डेटा
मानव-वन्यजीव संघर्ष राष्ट्रीय पोर्टल इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से देशभर से संघर्ष की घटनाओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इससे विभिन्न राज्यों में होने वाली घटनाओं का विश्लेषण करना आसान होगा और वैज्ञानिक आधार पर नीतियां बनाई जा सकेंगी।
यह पोर्टल संबंधित विभागों को वास्तविक समय में जानकारी उपलब्ध कराने, प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने तथा त्वरित कार्रवाई की योजना बनाने में भी सहायक सिद्ध होगा।
उत्कृष्टता केंद्र की प्रमुख जिम्मेदारियां
यह केंद्र कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कार्य करेगा, जिनमें शामिल हैं—
- मानव-वन्यजीव संघर्ष पर वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना।
- राज्यों और वन अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
- आधुनिक तकनीकों और डेटा विश्लेषण के आधार पर समाधान विकसित करना।
- नीति निर्माण के लिए विशेषज्ञ सुझाव उपलब्ध कराना।
- स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाकर सह-अस्तित्व की संस्कृति को मजबूत करना।
- संघर्ष की घटनाओं को कम करने के लिए व्यवहारिक मॉडल तैयार करना।
संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन
वन्यजीव संरक्षण केवल जंगलों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। यदि वन्यजीव सुरक्षित रहेंगे तो प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र भी मजबूत रहेगा। वहीं, वैज्ञानिक योजना और प्रभावी प्रबंधन के माध्यम से मानव जीवन की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकती है।
राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र और डिजिटल पोर्टल इन दोनों उद्देश्यों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
निष्कर्ष
मानव-वन्यजीव संघर्ष भारत के सामने उभरती हुई प्रमुख पर्यावरणीय और सामाजिक चुनौतियों में से एक है। कोयंबटूर में स्थापित मानव-वन्यजीव संघर्ष पर राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र तथा राष्ट्रीय पोर्टल इस समस्या के समाधान के लिए एक दूरदर्शी पहल हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान, सटीक डेटा, प्रभावी नीतियां और जन-जागरूकता के माध्यम से यह पहल न केवल संघर्ष की घटनाओं को कम करने में मदद करेगी, बल्कि मानव और वन्यजीवों के बीच सुरक्षित एवं संतुलित सह-अस्तित्व की दिशा में भी एक मजबूत आधार तैयार करेगी।
