यूपी में भारत टैक्सी सेवा शुरू: जीरो कमीशन मॉडल से ड्राइवरों को राहत, चार शहरों से शुरुआत

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लखनऊ, 23 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश में परिवहन और कैब सेवा के क्षेत्र में एक नई पहल की शुरुआत हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को राजधानी लखनऊ में भारत टैक्सी सेवा का शुभारंभ किया। सहकारी मॉडल पर आधारित इस सेवा का उद्देश्य टैक्सी, दोपहिया और तिपहिया वाहन चालकों को एक ऐसे प्लेटफॉर्म से जोड़ना है, जहां उनकी कमाई में प्लेटफॉर्म कमीशन की कटौती न हो और उन्हें सामाजिक सुरक्षा का लाभ भी मिल सके।

भारत टैक्सी की शुरुआत फिलहाल लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और प्रयागराज से की गई है। सरकार की ओर से इसे केवल यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने वाली सेवा के रूप में नहीं, बल्कि ड्राइवरों के आर्थिक हित और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी पहल के तौर पर भी प्रस्तुत किया गया है।

जीरो कमीशन मॉडल पर जोर

भारत टैक्सी सेवा की सबसे प्रमुख विशेषताओं में इसका जीरो-कमीशन मॉडल बताया गया है। सामान्य तौर पर ऐप आधारित परिवहन सेवाओं में ड्राइवरों को अपनी बुकिंग से प्राप्त राशि में से प्लेटफॉर्म को कमीशन देना पड़ सकता है। भारत टैक्सी के मॉडल में पंजीकृत ड्राइवरों से सवारी पर प्लेटफॉर्म कमीशन नहीं लेने की बात कही गई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लॉन्च कार्यक्रम में इस व्यवस्था को ड्राइवरों की आय और सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना जरूरी है। आधिकारिक तौर पर बताए गए मॉडल के अनुसार टैक्सी के अलावा बाइक और ऑटो जैसे वाहन चलाने वाले लोग भी पंजीकरण कराकर इस व्यवस्था का हिस्सा बन सकते हैं।

इस व्यवस्था से ड्राइवरों के लिए यह महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है कि उन्हें अपनी मेहनत से अर्जित रकम में से नियमित प्लेटफॉर्म कमीशन का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। हालांकि वास्तविक आय पर असर यात्राओं की संख्या, किराया, परिचालन खर्च और अन्य संबंधित लागतों पर भी निर्भर करेगा।

पांच लाख रुपये तक की सामाजिक सुरक्षा

भारत टैक्सी सेवा में ड्राइवरों के लिए सामाजिक सुरक्षा को भी प्रमुखता दी गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस व्यवस्था से जुड़ने वाले चालकों को पांच लाख रुपये तक की सामाजिक सुरक्षा कवरेज उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

ड्राइवरों का काम अक्सर सड़क, यातायात और अनिश्चित आय से जुड़ा होता है। ऐसे में सामाजिक सुरक्षा का प्रावधान उनके लिए आर्थिक जोखिम को कम करने में मददगार हो सकता है। हालांकि इस कवरेज की सटीक शर्तें, पात्रता और दावों से जुड़ी प्रक्रिया संबंधित नियमों के अनुसार लागू होगी।

सरकार की ओर से इस पहल को ड्राइवरों के सम्मान और गरिमा से भी जोड़ा गया है। लॉन्च के दौरान यह बात सामने आई कि टैक्सी चालकों को केवल सेवा प्रदाता के तौर पर नहीं, बल्कि परिवहन व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में सामाजिक सुरक्षा देने की दिशा में काम किया जा रहा है।

चार प्रमुख शहरों से शुरुआत

भारत टैक्सी सेवा को शुरुआती चरण में उत्तर प्रदेश के चार शहरों में संचालित किया जा रहा है। इनमें लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और प्रयागराज शामिल हैं। ये शहर राज्य के प्रमुख शहरी और धार्मिक-पर्यटन केंद्रों में गिने जाते हैं, जहां स्थानीय परिवहन और कैब सेवाओं की लगातार मांग रहती है।

लखनऊ राज्य की राजधानी और प्रमुख प्रशासनिक केंद्र है। वाराणसी धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों के कारण महत्वपूर्ण शहर है। प्रयागराज धार्मिक आयोजनों और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है, जबकि गोरखपुर पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रमुख शहर और परिवहन केंद्र है। इन शहरों से शुरुआत के बाद सेवा के संचालन और अनुभव के आधार पर आगे इसके विस्तार की दिशा तय की जा सकती है।

सहकारी मॉडल की अवधारणा

भारत टैक्सी को सहकारिता आधारित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म के रूप में संचालित किए जाने की जानकारी दी गई है। इसका परिचालन सहकार टैक्सी सहकारिता लिमिटेड द्वारा किए जाने की बात सामने आई है।

सहकारी मॉडल का मूल विचार यह है कि सेवा से जुड़े चालक केवल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले व्यक्ति न रहकर सहकारी व्यवस्था का हिस्सा बनें। इससे ड्राइवरों की भागीदारी, आय और सामाजिक सुरक्षा को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

यह मॉडल पारंपरिक ऐप आधारित कैब सेवाओं से अलग संरचना प्रस्तुत करता है। इसमें ड्राइवरों को कमीशन-मुक्त व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा का लाभ देने पर विशेष जोर है।

यात्रियों के लिए भी क्या बदल सकता है?

भारत टैक्सी का असर केवल ड्राइवरों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। यदि सेवा का नेटवर्क बढ़ता है तो यात्रियों को भी एक अतिरिक्त कैब और ऑटो बुकिंग विकल्प मिल सकता है। इससे परिवहन क्षेत्र में विकल्पों की संख्या बढ़ेगी और अलग-अलग प्लेटफॉर्म के बीच प्रतिस्पर्धा भी देखने को मिल सकती है।

हालांकि यात्रियों के लिए किराए, उपलब्धता, बुकिंग प्रक्रिया और सेवा की गुणवत्ता जैसे पहलू स्थानीय संचालन पर निर्भर करेंगे। ऐसे में शुरुआती चरण में इन शहरों में सेवा के अनुभव और प्रतिक्रिया को महत्वपूर्ण माना जाएगा।

सितंबर के मध्य में केंद्र सरकार के सहकारिता मंत्रालय ने भी उत्तर प्रदेश में भारत टैक्सी मॉडल को सभी 75 जिलों तक विस्तार देने से संबंधित जानकारी प्रकाशित की थी। इससे संकेत मिलता है कि आगे चलकर इस मॉडल को बड़े भौगोलिक क्षेत्र तक ले जाने की योजना पर काम हो रहा है।

ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाने की योजना

भारत टैक्सी के विस्तार को केवल बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों तक ले जाने की योजना की भी रिपोर्ट सामने आई है। इससे छोटे शहरों और गांवों में स्थानीय परिवहन सेवाओं को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और परिवहन दोनों से जुड़ी जरूरतें मौजूद हैं। यदि सहकारी मॉडल वहां सफलतापूर्वक लागू होता है तो स्थानीय वाहन चालकों को एक संगठित प्लेटफॉर्म मिल सकता है। इसके साथ ही छोटे शहरों में यात्रियों को डिजिटल बुकिंग आधारित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने का रास्ता भी खुल सकता है।

रोजगार के अवसरों पर भी नजर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत टैक्सी को युवाओं के लिए रोजगार से जोड़ते हुए परिवहन क्षेत्र में नए अवसर पैदा करने की बात कही है। साथ ही उन्होंने भारत टैक्सी की तर्ज पर ग्रामीण बस सेवा को आगे बढ़ाने की दिशा में भी निर्देश दिए हैं।

यदि सेवा का विस्तार प्रदेश के अन्य जिलों तक होता है तो बड़ी संख्या में वाहन चालक इससे जुड़ सकते हैं। इससे प्रत्यक्ष रूप से ड्राइविंग से जुड़े रोजगार के साथ-साथ वाहन रखरखाव, सर्विसिंग और अन्य सहायक सेवाओं की मांग भी बढ़ सकती है।

डिजिटल परिवहन व्यवस्था को मिल सकता है विस्तार

भारत में शहरी परिवहन तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रहा है। कैब, ऑटो और बाइक जैसी सेवाओं की ऑनलाइन बुकिंग ने यात्रियों के लिए परिवहन का एक नया तरीका विकसित किया है। भारत टैक्सी इसी क्षेत्र में सहकारी मॉडल को सामने ला रही है।

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में इस प्रकार की सेवा का विस्तार होने पर डिजिटल परिवहन व्यवस्था का दायरा भी बढ़ सकता है। हालांकि किसी भी नई परिवहन सेवा की सफलता के लिए समय पर वाहन उपलब्धता, पारदर्शी किराया, ड्राइवरों की भागीदारी, यात्रियों की सुरक्षा और शिकायत निवारण जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण रहेंगी।

आगे के विस्तार पर निगाह

फिलहाल भारत टैक्सी की शुरुआत चार शहरों से हुई है। आने वाले समय में इसकी पहुंच कितने शहरों और जिलों तक बढ़ती है, यह इसके संचालन और प्रशासनिक व्यवस्था पर निर्भर करेगा। सरकार की ओर से प्रदेश के सभी 75 जिलों तक मॉडल के विस्तार की योजना से संबंधित जानकारी पहले ही सामने आ चुकी है।

उत्तर प्रदेश में भारत टैक्सी की शुरुआत ऐसे समय हुई है जब ऐप आधारित परिवहन सेवाओं का इस्तेमाल शहरों में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में सहकारी और जीरो-कमीशन मॉडल का प्रदर्शन आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेगा।

कुल मिलाकर, भारत टैक्सी सेवा की यूपी में शुरुआत ड्राइवर-केंद्रित सहकारी परिवहन मॉडल की दिशा में एक नई पहल है। जीरो कमीशन और पांच लाख रुपये तक की सामाजिक सुरक्षा जैसे प्रावधानों के जरिए ड्राइवरों की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल चार शहरों से शुरू हुई यह सेवा आगे कितने जिलों तक पहुंचती है और यात्रियों तथा वाहन चालकों के बीच इसे कैसी प्रतिक्रिया मिलती है, इस पर आने वाले महीनों में नजर रहेगी।

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