⚖️ उन्नाव रेप केस में नया कानूनी मोड़: दिल्ली हाई कोर्ट में कुलदीप सिंह सेंगर की आखिरी दलील, ‘पीड़िता की उम्र’ पर छिड़ी बड़ी बहस
नई दिल्ली: देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल उन्नाव दुष्कर्म मामले में एक…

नई दिल्ली: देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल उन्नाव दुष्कर्म मामले में एक बार फिर कानूनी बहस तेज हो गई है। आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की अंतिम अपील पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पीड़िता की उम्र, मेडिकल साक्ष्यों और ट्रायल कोर्ट की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत में हुई सुनवाई ने इस बहुचर्चित मामले को एक नए कानूनी मोड़ पर ला खड़ा किया है।
🔍 पीड़िता की उम्र बनी सुनवाई का सबसे बड़ा मुद्दा
सेंगर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने अदालत में दलील दी कि पीड़िता की वास्तविक उम्र को लेकर रिकॉर्ड में स्पष्टता नहीं है। उनके अनुसार, केस रिकॉर्ड में अलग-अलग जन्मतिथियों वाले कई आयु प्रमाण पत्र मौजूद हैं, जिससे यह तय करना कठिन हो जाता है कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी या वयस्क।
बचाव पक्ष ने कहा कि निचली अदालत ने सभी उपलब्ध दस्तावेजों का समान रूप से परीक्षण करने के बजाय केवल एक निजी विद्यालय द्वारा जारी प्रमाण पत्र को अधिक महत्व दिया। उनका तर्क था कि इस दस्तावेज की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न उठते हैं और इसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक थी।
🧪 मेडिकल रिपोर्टों में अंतर का दावा
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने बोन ऑसिफिकेशन टेस्ट सहित विभिन्न मेडिकल रिपोर्टों का भी उल्लेख किया। वकीलों के अनुसार, उन्नाव, लखनऊ और दिल्ली में अलग-अलग मेडिकल परीक्षण हुए, जिनकी रिपोर्टों में कथित रूप से अंतर दिखाई देता है।
बचाव पक्ष ने अदालत से कहा कि यदि वैज्ञानिक रिपोर्टों में मतभेद हैं, तो उम्र निर्धारण के लिए सभी साक्ष्यों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
⚖️ ट्रायल कोर्ट की प्रक्रिया पर उठे सवाल
सेंगर के वकील ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने अदालत में कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में जल्दबाजी उचित नहीं होती और सभी साक्ष्यों का निष्पक्ष तथा विस्तृत परीक्षण आवश्यक है। उन्होंने यह भी दावा किया कि आरोप तय किए जाने और दोषसिद्धि के दौरान लागू की गई कानूनी धाराओं को लेकर भी गंभीर कानूनी प्रश्न मौजूद हैं, जिन पर हाई कोर्ट को विचार करना चाहिए।
👥 पीड़ित पक्ष ने रखा अपना पक्ष
मामले में पीड़िता की ओर से अधिवक्ता महमूद प्राचा ने बचाव पक्ष की दलीलों का विरोध किया और ट्रायल कोर्ट के निर्णय का समर्थन किया। उन्होंने अदालत से कहा कि निचली अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के आधार पर फैसला सुनाया था तथा दोषसिद्धि को बरकरार रखा जाना चाहिए।
📜 अब हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें
दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष अब दोनों पक्षों की दलीलें दर्ज हो चुकी हैं। अदालत सभी दस्तावेजों, मेडिकल साक्ष्यों और कानूनी पहलुओं का परीक्षण करने के बाद अपना निर्णय सुनाएगी। यह फैसला न केवल इस बहुचर्चित मामले की दिशा तय करेगा, बल्कि भविष्य में उम्र निर्धारण और वैज्ञानिक साक्ष्यों से जुड़े मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल बन सकता है।
📌 निष्कर्ष
उन्नाव दुष्कर्म मामले की सुनवाई एक बार फिर यह दर्शाती है कि गंभीर आपराधिक मामलों में प्रत्येक दस्तावेज, मेडिकल रिपोर्ट और कानूनी प्रक्रिया का गहन परीक्षण कितना आवश्यक है। फिलहाल यह मामला न्यायालय के विचाराधीन है और अंतिम सत्य का निर्धारण केवल अदालत के निर्णय से ही होगा। न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी पक्ष के दावों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
