ऑनलाइन ठगी वाले विज्ञापनों पर Meta की बड़ी कार्रवाई, भारत की चेतावनी के बाद Facebook और Instagram से हटाए गए संदिग्ध विज्ञापन

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नई दिल्ली, 6 सितंबर 2026: सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऑनलाइन ठगी का खतरा भी लगातार गंभीर होता जा रहा है। साइबर अपराधी अब केवल फोन कॉल, मैसेज या ईमेल के जरिए ही लोगों को निशाना नहीं बना रहे, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विज्ञापनों का सहारा लेकर भी उपयोगकर्ताओं को फर्जी वेबसाइटों और संदिग्ध मोबाइल एप्लिकेशन तक पहुंचा रहे हैं। इसी तरह के एक मामले में Meta ने Facebook और Instagram पर चल रहे कई भ्रामक विज्ञापनों को हटाया है। यह कार्रवाई भारत सरकार की ओर से ऐसे साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क को लेकर चेतावनी दिए जाने के बाद सामने आई है।

भारत की चेतावनी के बाद सामने आया मामला

भारतीय अधिकारियों ने हाल ही में ऐसे दुर्भावनापूर्ण Android एप्लिकेशन के बारे में चेतावनी जारी की थी, जिन्हें आकर्षक विज्ञापनों के जरिए लोगों तक पहुंचाया जा रहा था। राष्ट्रीय साइबर अपराध खतरा विश्लेषण इकाई ने बताया कि कुछ ऐप सामान्य या मनोरंजन से जुड़े एप्लिकेशन की तरह दिखाई देते थे, लेकिन उनका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं से संवेदनशील जानकारी हासिल करना और उन्हें वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार बनाना हो सकता था।

इन ऐप्स तक पहुंच बनाने के लिए सोशल मीडिया विज्ञापनों का इस्तेमाल किया जा रहा था। विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद उपयोगकर्ता को ऐसी वेबसाइट पर भेजा जाता था जहां उसे किसी ऐप की फाइल डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया जाता था। इस तरह सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाला एक सामान्य-सा विज्ञापन साइबर हमले की शुरुआती कड़ी बन सकता था।

Meta ने हटाए दर्जनों विज्ञापन

रिपोर्ट के अनुसार, भारत की चेतावनी के बाद भी कुछ संदिग्ध विज्ञापन Meta के प्लेटफॉर्म पर दिखाई दे रहे थे। Reuters की रिपोर्टिंग में कम से कम 39 ऐसे विज्ञापनों की पहचान की गई, जिन्हें बाद में Meta ने हटा दिया। इनमें ऐसे विज्ञापन भी शामिल थे जो उपयोगकर्ताओं को संदिग्ध Android ऐप डाउनलोड करने के लिए दूसरी वेबसाइटों की ओर भेज रहे थे।

यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Facebook और Instagram दुनिया के सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में शामिल हैं। इन प्लेटफॉर्मों पर विज्ञापन बड़ी संख्या में लोगों तक तेजी से पहुंच सकते हैं। यदि किसी विज्ञापन के पीछे साइबर अपराधी सक्रिय हों तो कम समय में बहुत बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं को निशाना बनाया जा सकता है।

फर्जी विज्ञापन कैसे बनते हैं साइबर ठगी का माध्यम?

ऑनलाइन ठगी करने वाले अपराधी अक्सर विज्ञापनों को इस तरह तैयार करते हैं कि वे पहली नजर में वास्तविक दिखाई दें। विज्ञापन में आकर्षक तस्वीरें, सनसनीखेज दावे या किसी लोकप्रिय सेवा से मिलते-जुलते नामों का इस्तेमाल किया जा सकता है। उपयोगकर्ता को किसी विशेष ऐप या वेबसाइट पर जाने के लिए प्रेरित किया जाता है।

इसके बाद उसे किसी बाहरी वेबसाइट पर पहुंचाया जाता है। वहां ऐप डाउनलोड करने, किसी लिंक पर क्लिक करने या जरूरी अनुमति देने के लिए कहा जा सकता है। समस्या तब गंभीर हो जाती है जब उपयोगकर्ता बिना जांच किए किसी अनजान स्रोत से एप्लिकेशन इंस्टॉल कर लेता है।

भारतीय गृह मंत्रालय की चेतावनी के अनुसार, ऐसे कुछ दुर्भावनापूर्ण ऐप संवेदनशील अनुमतियां मांग सकते हैं। गलत हाथों में जाने पर इन अनुमतियों का इस्तेमाल डिवाइस और निजी जानकारी को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है।

बैंकिंग जानकारी को हो सकता है खतरा

इस तरह के साइबर अभियान का सबसे गंभीर पहलू वित्तीय धोखाधड़ी है। अधिकारियों के अनुसार, दुर्भावनापूर्ण ऐप कुछ परिस्थितियों में बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी और वन-टाइम पासवर्ड जैसी जानकारी को निशाना बना सकते हैं। इसके जरिए अपराधी पीड़ित के खाते से अनधिकृत लेनदेन करने की कोशिश कर सकते हैं।

इसलिए किसी भी अनजान विज्ञापन के जरिए ऐप डाउनलोड करना जोखिमपूर्ण हो सकता है। खासतौर पर तब, जब विज्ञापन उपयोगकर्ता को आधिकारिक ऐप स्टोर के बजाय किसी दूसरी वेबसाइट से एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए कहे।

साइबर अपराध का बदलता तरीका

यह मामला दिखाता है कि साइबर अपराधी लगातार अपनी रणनीति बदल रहे हैं। पहले जहां ठगी के लिए फर्जी फोन कॉल और संदेशों पर अधिक निर्भरता देखी जाती थी, वहीं अब सोशल मीडिया विज्ञापन भी अपराधियों के लिए महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं।

Meta ने स्वयं बताया है कि उसने 2025 में अपनी नीतियों का उल्लंघन करने वाले 159 मिलियन से अधिक scam ads हटाए थे। कंपनी ने Facebook और Instagram से जुड़े ऐसे करोड़ों खातों पर भी कार्रवाई की है जिनका संबंध कथित scam centers से था।

Meta ने ऑनलाइन ठगी से निपटने के लिए नए तकनीकी उपायों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग बढ़ाने की बात भी कही है। कंपनी के अनुसार, साइबर अपराधी लगातार नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं और इससे निपटने के लिए तकनीक के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी जरूरी है।

भारत में बढ़ती डिजिटल धोखाधड़ी चिंता का विषय

भारत में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं के तेजी से विस्तार ने लोगों की सुविधा बढ़ाई है, लेकिन इसके साथ साइबर धोखाधड़ी का जोखिम भी बढ़ा है। Reuters के अनुसार, सरकारी आंकड़ों में 2025 के दौरान भारत में साइबर धोखाधड़ी से लगभग 2.4 अरब डॉलर के नुकसान का उल्लेख किया गया है।

ऐसे माहौल में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिखाई देने वाले विज्ञापनों को लेकर सतर्कता जरूरी हो जाती है। केवल यह तथ्य कि कोई विज्ञापन Facebook या Instagram पर दिखाई दे रहा है, उसके वास्तविक होने की गारंटी नहीं देता।

उपयोगकर्ताओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

साइबर सुरक्षा के लिहाज से लोगों को किसी भी अनजान विज्ञापन पर जल्दबाजी में क्लिक करने से बचना चाहिए। यदि कोई विज्ञापन किसी ऐप को बाहरी वेबसाइट से डाउनलोड करने के लिए कहता है तो विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

भारतीय अधिकारियों ने सलाह दी है कि एप्लिकेशन केवल भरोसेमंद स्रोतों से ही डाउनलोड किए जाएं और अनजान ऐप को संवेदनशील डिवाइस अनुमतियां देने से बचा जाए। संदिग्ध लिंक, फर्जी वेबसाइट और अनजान APK फाइलों से दूरी रखना भी महत्वपूर्ण है।

यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसके साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी हुई है, तो उसे तुरंत संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था को सूचित करना चाहिए और आधिकारिक साइबर अपराध शिकायत व्यवस्था के माध्यम से शिकायत दर्ज करनी चाहिए।

सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी भी अहम

इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े किए हैं। विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर आने वाले प्रत्येक विज्ञापन की जांच करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े विज्ञापनों की पहचान और उन्हें तेजी से हटाना उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

Meta पहले से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य तकनीकी प्रणालियों की मदद से संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने पर काम कर रहा है। कंपनी ने निवेश और भुगतान संबंधी धोखाधड़ी के खिलाफ भी कई कदमों की जानकारी दी है।

निष्कर्ष

Facebook और Instagram से संदिग्ध विज्ञापनों को हटाए जाने का यह मामला बताता है कि ऑनलाइन ठगी अब केवल फर्जी कॉल या संदेशों तक सीमित नहीं रही है। साइबर अपराधी विज्ञापन प्रणाली, सोशल मीडिया और मोबाइल एप्लिकेशन जैसे डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करके लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

भारत की चेतावनी के बाद Meta की कार्रवाई एक महत्वपूर्ण कदम जरूर है, लेकिन साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए केवल प्लेटफॉर्म की कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। सरकार, तकनीकी कंपनियों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और आम उपयोगकर्ताओं के बीच लगातार सहयोग जरूरी है।

डिजिटल दुनिया में सावधानी सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच है। किसी भी आकर्षक विज्ञापन पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता जांचना, अनजान वेबसाइटों से ऐप डाउनलोड न करना और संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचना साइबर ठगी के खतरे को काफी कम कर सकता है।

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