जी20 शिखर सम्मेलन 2023: भारत की ऐतिहासिक मेजबानी ने वैश्विक मंच पर बढ़ाया देश का प्रभाव

प्रस्तावना
सितंबर 2023 में भारत ने पहली बार जी20 (G20) शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर विश्व कूटनीति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित यह सम्मेलन केवल एक अंतरराष्ट्रीय बैठक नहीं था, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका, कूटनीतिक क्षमता और विकासोन्मुख दृष्टिकोण का प्रभावशाली प्रदर्शन भी था। इस आयोजन में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल नवाचार, खाद्य सुरक्षा और सतत विकास जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।
भारत की अध्यक्षता का मूल संदेश “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” (One Earth, One Family, One Future) था। यह विचार भारतीय संस्कृति के “वसुधैव कुटुंबकम्” दर्शन से प्रेरित है, जो पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने का संदेश देता है।
जी20 क्या है?
जी20 विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का एक अंतरराष्ट्रीय समूह है। इसमें 19 देश, यूरोपीय संघ (European Union) और 2023 से अफ्रीकी संघ (African Union) भी सदस्य हैं।
इस समूह की स्थापना 1999 में एशियाई वित्तीय संकट के बाद की गई थी ताकि विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं आर्थिक और वित्तीय चुनौतियों पर मिलकर काम कर सकें।
समय के साथ जी20 का दायरा केवल आर्थिक विषयों तक सीमित नहीं रहा। अब इसमें जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, व्यापार, खाद्य सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सतत विकास और वैश्विक सहयोग जैसे विषय भी शामिल हैं।
भारत की अध्यक्षता क्यों रही विशेष?
भारत की जी20 अध्यक्षता कई कारणों से ऐतिहासिक मानी गई।
सबसे पहले, भारत ने पहली बार इस प्रतिष्ठित समूह की मेजबानी की। दूसरी ओर, सम्मेलन के दौरान भारत ने विकसित और विकासशील देशों के बीच संवाद बढ़ाने का प्रयास किया।
भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान यह संदेश दिया कि वैश्विक समस्याओं का समाधान केवल सहयोग और साझेदारी से ही संभव है।
भारत ने यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि छोटे और विकासशील देशों की चिंताओं को वैश्विक मंच पर पर्याप्त महत्व मिले।
“एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” का संदेश
भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान जो थीम चुनी, वह केवल एक नारा नहीं बल्कि वैश्विक सहयोग की व्यापक सोच का प्रतीक थी।
इस विचार का उद्देश्य यह था कि जलवायु परिवर्तन, महामारी, आर्थिक संकट और खाद्य असुरक्षा जैसी चुनौतियों का समाधान तभी संभव है जब सभी देश मिलकर कार्य करें।
इस संदेश को दुनिया के अनेक देशों ने सकारात्मक दृष्टि से देखा।
अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्यता
भारत की अध्यक्षता की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक अफ्रीकी संघ (African Union) को जी20 का स्थायी सदस्य बनाया जाना था।
इस निर्णय के बाद अफ्रीका की आवाज़ को विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक निर्णय प्रक्रिया में औपचारिक स्थान मिला।
भारत लंबे समय से वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों के बेहतर प्रतिनिधित्व की वकालत करता रहा है। इसलिए इस निर्णय को भारत की महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता माना गया।
जलवायु परिवर्तन पर भारत का दृष्टिकोण
सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा।
भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा, हरित विकास, स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों और टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
साथ ही भारत ने विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्त और तकनीकी सहयोग की आवश्यकता को भी प्रमुखता से उठाया।
भारत का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास दोनों साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।
डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत का मॉडल
भारत ने सम्मेलन के दौरान अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (Digital Public Infrastructure) मॉडल को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।
आधार, यूपीआई, डिजिटल भुगतान प्रणाली और अन्य डिजिटल सेवाओं को उदाहरण के रूप में साझा किया गया।
कई देशों ने भारत के डिजिटल नवाचारों में रुचि दिखाई और उन्हें अपने यहां अपनाने की संभावनाओं पर चर्चा की।
भारत ने डिजिटल तकनीक को समावेशी विकास का प्रभावी माध्यम बताया।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर चर्चा
कोविड-19 महामारी के बाद विश्व अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से गुजर रही थी।
सम्मेलन में आर्थिक विकास, महंगाई, निवेश, रोजगार, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और वित्तीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार किया गया।
भारत ने वैश्विक आर्थिक सहयोग को मजबूत बनाने तथा विकासशील देशों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया।
भारतीय संस्कृति का भव्य प्रदर्शन
जी20 सम्मेलन भारत की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करने का भी अवसर बना।
सम्मेलन स्थल पर भारतीय कला, हस्तशिल्प, पारंपरिक संगीत, शास्त्रीय नृत्य, योग, खान-पान और सांस्कृतिक विरासत का आकर्षक प्रदर्शन किया गया।
देश के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झलकियों ने विदेशी प्रतिनिधियों को भारत की समृद्ध परंपराओं से परिचित कराया।
बहुपक्षीय सहयोग को नई दिशा
सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान किसी एक देश के लिए संभव नहीं है।
भारत ने बहुपक्षवाद, संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
विश्व के विभिन्न देशों ने भी साझा चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता को स्वीकार किया।
भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका
पिछले कुछ वर्षों में भारत की अंतरराष्ट्रीय भूमिका लगातार मजबूत हुई है।
जी20 शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी ने यह दिखाया कि भारत केवल क्षेत्रीय शक्ति ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता रखता है।
भारत ने विकास, शांति, सहयोग और समावेशी प्रगति पर आधारित अपनी विदेश नीति को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
भविष्य की संभावनाएं
जी20 सम्मेलन के बाद भारत की वैश्विक छवि और मजबूत हुई।
डिजिटल नवाचार, हरित ऊर्जा, जलवायु कार्रवाई, वैश्विक स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में भारत की भूमिका आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण हो सकती है।
भारत का लक्ष्य वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और अधिक प्रभावी बनाना भी है।
निष्कर्ष
जी20 शिखर सम्मेलन 2023 भारत के कूटनीतिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय साबित हुआ। नई दिल्ली में आयोजित इस सम्मेलन ने भारत की संगठनात्मक क्षमता, सांस्कृतिक समृद्धि और वैश्विक नेतृत्व को दुनिया के सामने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। अफ्रीकी संघ को जी20 की स्थायी सदस्यता दिलाने, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सतत विकास जैसे मुद्दों पर रचनात्मक पहल करने के कारण भारत की अध्यक्षता को व्यापक सराहना मिली।
यह सम्मेलन केवल भारत की उपलब्धि नहीं था, बल्कि वैश्विक सहयोग, साझा विकास और बहुपक्षीय कूटनीति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ। आने वाले वर्षों में भी भारत से ऐसी ही रचनात्मक और समावेशी वैश्विक नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की अपेक्षा की जाती है।