नई दिल्ली में ब्रिक्स सुरक्षा संवाद: प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद और साइबर खतरों से निपटने के लिए सामूहिक कार्रवाई पर दिया जोर

नई दिल्ली। भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित 16वीं ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदस्य देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों से मुलाकात की और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि तेजी से बदल रहे अंतरराष्ट्रीय माहौल में आतंकवाद, साइबर अपराध और नई प्रौद्योगिकियों के दुरुपयोग जैसी चुनौतियों का मुकाबला केवल साझा प्रयासों और मजबूत सहयोग के माध्यम से ही किया जा सकता है।
नई दिल्ली में हुआ महत्वपूर्ण सुरक्षा मंथन
22 और 23 जून 2026 को आयोजित इस बैठक में ब्रिक्स समूह के पारंपरिक सदस्य देशों – भारत, ब्राज़ील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका – के अलावा नए सदस्य देशों मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के वरिष्ठ सुरक्षा प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने की।
प्रधानमंत्री मोदी ने साझा चुनौतियों पर दिया विशेष बल
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया कई जटिल चुनौतियों का सामना कर रही है। आतंकवादी संगठन नई तकनीकों का इस्तेमाल कर अपनी गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि साइबर हमलों और डिजिटल अपराधों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में ब्रिक्स देशों के बीच समन्वय और सूचना साझाकरण पहले से अधिक आवश्यक हो गया है।
उन्होंने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान अपनाए गए दृष्टिकोण “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” का उल्लेख करते हुए कहा कि लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास पर आधारित यह सोच सदस्य देशों के बीच व्यावहारिक साझेदारी को नई दिशा दे सकती है।
गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों पर भी हुई चर्चा
बैठक में केवल आतंकवाद और साइबर सुरक्षा ही नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य आपूर्ति, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियाँ पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़ चुकी हैं और इनके समाधान के लिए बहुआयामी रणनीति की आवश्यकता है।
इसके अलावा, आतंकवाद-रोधी सहयोग और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी सुरक्षा से संबंधित संयुक्त कार्य समूहों की हालिया बैठकों में हुई प्रगति की समीक्षा भी की गई। सदस्य देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई करने और साइबर खतरों का सामूहिक रूप से सामना करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत की भूमिका हुई और मजबूत
भारत की अध्यक्षता में आयोजित यह बैठक वैश्विक दक्षिण के देशों की प्राथमिकताओं को सामने लाने के प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है। इससे भारत को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहयोग, क्षमता निर्माण, तकनीकी नवाचार और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने का अवसर मिल रहा है। साथ ही, विभिन्न देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग और सूचनाओं के आदान-प्रदान को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
नई दिल्ली में आयोजित 16वीं ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया कि आधुनिक समय की चुनौतियाँ किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं। आतंकवाद, साइबर अपराध और उभरती तकनीकों से जुड़े जोखिमों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग और साझा रणनीति की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश भी इसी दिशा में केंद्रित रहा कि सुरक्षित, स्थिर और समावेशी भविष्य के निर्माण के लिए ब्रिक्स देशों को मिलकर आगे बढ़ना होगा।
