जुलाई 7, 2026

बारिश बनी शहरों की सबसे बड़ी परीक्षा: जलभराव ने खोली शहरी विकास की पोल, आखिर कब बनेगा स्मार्ट ड्रेनेज सिस्टम?

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नई दिल्ली। मानसून की हर तेज बारिश के साथ देश के बड़े शहरों की एक पुरानी समस्या फिर सामने आ जाती है—जलभराव। कुछ घंटों की बारिश ही सड़कों को तालाब में बदल देती है, ट्रैफिक थम जाता है, लोगों की दिनचर्या प्रभावित होती है और करोड़ों रुपये की आर्थिक गतिविधियां बाधित हो जाती हैं। यह स्थिति एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारा शहरी विकास केवल ऊंची इमारतों और चौड़ी सड़कों तक सीमित रह गया है?

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक शहरों के विकास में जितना निवेश सड़कों, फ्लाईओवर और भवनों पर किया जाता है, उतना ही ध्यान जल निकासी व्यवस्था पर भी दिया जाना चाहिए। यदि ड्रेनेज सिस्टम समय के अनुरूप विकसित नहीं होगा, तो हर मानसून में नागरिकों को इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

तेजी से बढ़ते शहरीकरण, अनियोजित निर्माण, नालों पर अतिक्रमण और नियमित सफाई के अभाव ने जल निकासी व्यवस्था को कमजोर कर दिया है। परिणामस्वरूप थोड़ी देर की बारिश भी बड़े जलभराव का कारण बन जाती है। कई इलाकों में वाहन बंद हो जाते हैं, सार्वजनिक परिवहन प्रभावित होता है और लोगों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अब पारंपरिक ड्रेनेज व्यवस्था से आगे बढ़कर स्मार्ट ड्रेनेज सिस्टम अपनाने की आवश्यकता है। सेंसर आधारित जल निकासी तंत्र, वर्षा जल संचयन, डिजिटल मॉनिटरिंग, समय पर नालों की सफाई और वैज्ञानिक शहरी योजना जैसी व्यवस्थाएं जलभराव की समस्या को काफी हद तक कम कर सकती हैं।

इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन, नगर निकायों और नागरिकों की साझा जिम्मेदारी भी बेहद महत्वपूर्ण है। नालियों में कचरा फेंकने से बचना, जल निकासी मार्गों को अवरुद्ध न करना और समय-समय पर रखरखाव सुनिश्चित करना भी इस समस्या के समाधान का अहम हिस्सा है।

स्मार्ट शहर तभी सफल होंगे, जब जलभराव से मिलेगी आज़ादी

आज आवश्यकता केवल आधुनिक इमारतें बनाने की नहीं, बल्कि ऐसी आधारभूत संरचना विकसित करने की है जो बदलते मौसम और बढ़ती आबादी की चुनौतियों का सामना कर सके। यदि शहरी विकास योजनाओं में स्मार्ट ड्रेनेज सिस्टम को प्राथमिकता दी जाती है, तो भविष्य में बारिश लोगों के लिए परेशानी नहीं, बल्कि राहत का कारण बनेगी।

बारिश ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि मजबूत और टिकाऊ शहर केवल कंक्रीट से नहीं, बल्कि प्रभावी जल निकासी व्यवस्था, दूरदर्शी योजना और जिम्मेदार प्रशासन से बनते हैं। अब समय आ गया है कि शहरी विकास की परिभाषा में स्मार्ट ड्रेनेज सिस्टम को भी उतनी ही अहमियत दी जाए, जितनी सड़कों, फ्लाईओवर और ऊंची इमारतों को दी जाती है।

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