रक्षा अधिग्रहण परिषद का बड़ा फैसला: सशक्त होती भारतीय सैन्य ताकत

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भारत की सामरिक क्षमता को व्यापक रूप से मज़बूत करने की दिशा में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में लगभग ₹3.60 लाख करोड़ के पूंजीगत रक्षा प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। यह निर्णय केवल हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय सशस्त्र सेनाओं की दीर्घकालिक तैयारी, तकनीकी आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता की रणनीति का हिस्सा है।

भारतीय वायुसेना के लिए नई ताकत

1. मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA – राफेल श्रेणी)
वायुसेना की मारक क्षमता और वायु प्रभुत्व को और सशक्त करने के लिए उन्नत मल्टी-रोल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी गई है। इन विमानों के निर्माण में भारत की औद्योगिक भागीदारी बढ़ेगी, जिससे रक्षा उत्पादन क्षेत्र को बल मिलेगा।

  • लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता
  • अत्याधुनिक एवियोनिक्स और रडार प्रणाली
  • बहुआयामी युद्ध अभियानों में उपयोगिता

2. उन्नत कॉम्बैट मिसाइल प्रणाली
नई मिसाइल प्रणालियाँ दुश्मन के ठिकानों पर दूर से ही सटीक प्रहार करने में सक्षम होंगी।

  • स्टैंड-ऑफ अटैक क्षमता
  • उच्च परिशुद्धता
  • रणनीतिक निवारक संतुलन को मजबूती

3. एयर-शिप आधारित हाई-एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट (AS-HAPS)
उच्च ऊंचाई पर लंबे समय तक तैनात रहने वाले ये प्लेटफ़ॉर्म निगरानी और संचार क्षमता को नए स्तर पर ले जाएंगे।

  • निरंतर सर्विलांस
  • इलेक्ट्रॉनिक और सिग्नल इंटेलिजेंस
  • सैन्य कम्युनिकेशन के लिए समर्थन

थलसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में कदम

1. विभव एंटी-टैंक माइंस
मैकेनाइज़्ड युद्ध परिदृश्य में दुश्मन की प्रगति को रोकने के लिए उन्नत एंटी-टैंक माइंस की स्वीकृति दी गई है।

  • रणभूमि में प्रभावी अवरोध
  • सामरिक रक्षा को सुदृढ़ करना

2. वाहन और बख्तरबंद प्लेटफ़ॉर्म का उन्नयन
T-72 टैंकों, BMP-II इन्फेंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स और आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल्स के व्यापक ओवरहॉल की योजना भी शामिल है।

  • परिचालन जीवनकाल में वृद्धि
  • बेहतर गतिशीलता और विश्वसनीयता
  • युद्धकालीन तत्परता में सुधार

रणनीतिक और आर्थिक प्रभाव

यह बड़ा रक्षा निवेश केवल सैन्य शक्ति बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की रक्षा औद्योगिक क्षमता को गति देगा। स्वदेशी उत्पादन और तकनीकी हस्तांतरण पर जोर देने से ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही, भारत वैश्विक रक्षा आपूर्ति शृंखला में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में भी आगे बढ़ेगा।

समग्र रूप से, रक्षा अधिग्रहण परिषद का यह निर्णय भारतीय सशस्त्र बलों को आधुनिक, सक्षम और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। यह संकेत देता है कि देश अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टिकोण अपना रहा है।

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रक्षा अधिग्रहण परिषद का बड़ा फैसला: सशक्त होती भारतीय सैन्य ताकत

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:फ़रवरी 12, 2026

भारत की सामरिक क्षमता को व्यापक रूप से मज़बूत करने की दिशा में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में लगभग ₹3.60 लाख करोड़ के पूंजीगत रक्षा प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। यह निर्णय केवल हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय सशस्त्र सेनाओं की दीर्घकालिक तैयारी, तकनीकी आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता की रणनीति का हिस्सा है।

भारतीय वायुसेना के लिए नई ताकत

1. मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA – राफेल श्रेणी)
वायुसेना की मारक क्षमता और वायु प्रभुत्व को और सशक्त करने के लिए उन्नत मल्टी-रोल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी गई है। इन विमानों के निर्माण में भारत की औद्योगिक भागीदारी बढ़ेगी, जिससे रक्षा उत्पादन क्षेत्र को बल मिलेगा।

2. उन्नत कॉम्बैट मिसाइल प्रणाली
नई मिसाइल प्रणालियाँ दुश्मन के ठिकानों पर दूर से ही सटीक प्रहार करने में सक्षम होंगी।

3. एयर-शिप आधारित हाई-एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट (AS-HAPS)
उच्च ऊंचाई पर लंबे समय तक तैनात रहने वाले ये प्लेटफ़ॉर्म निगरानी और संचार क्षमता को नए स्तर पर ले जाएंगे।

थलसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में कदम

1. विभव एंटी-टैंक माइंस
मैकेनाइज़्ड युद्ध परिदृश्य में दुश्मन की प्रगति को रोकने के लिए उन्नत एंटी-टैंक माइंस की स्वीकृति दी गई है।

2. वाहन और बख्तरबंद प्लेटफ़ॉर्म का उन्नयन
T-72 टैंकों, BMP-II इन्फेंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स और आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल्स के व्यापक ओवरहॉल की योजना भी शामिल है।

रणनीतिक और आर्थिक प्रभाव

यह बड़ा रक्षा निवेश केवल सैन्य शक्ति बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की रक्षा औद्योगिक क्षमता को गति देगा। स्वदेशी उत्पादन और तकनीकी हस्तांतरण पर जोर देने से ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही, भारत वैश्विक रक्षा आपूर्ति शृंखला में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में भी आगे बढ़ेगा।

समग्र रूप से, रक्षा अधिग्रहण परिषद का यह निर्णय भारतीय सशस्त्र बलों को आधुनिक, सक्षम और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। यह संकेत देता है कि देश अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टिकोण अपना रहा है।