राजेन्द्र भारती मामला: बैंक धोखाधड़ी केस में दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई, सजा पर अंतरिम रोक

दिल्ली हाईकोर्ट में मध्यप्रदेश के दतिया से कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेन्द्र भारती से जुड़े ग्रामीण विकास बैंक धोखाधड़ी मामले की सुनवाई जारी है। यह मामला उस फैसले के खिलाफ दायर अपील से जुड़ा है, जिसमें विशेष अदालत ने उन्हें तीन वर्ष के कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने फिलहाल अपील के अंतिम निर्णय तक उनकी सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए उन्हें जमानत का लाभ दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह प्रकरण ग्रामीण विकास बैंक में कथित वित्तीय अनियमितताओं और दस्तावेजों में हेरफेर से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के अनुसार बैंक रिकॉर्ड में कथित फर्जी बदलाव कर ब्याज भुगतान का अनुचित लाभ प्राप्त किया गया। इसी आधार पर राजेन्द्र भारती सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया और लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद विशेष अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया।
अदालत ने 2 अप्रैल 2026 को अपने फैसले में राजेन्द्र भारती को तीन साल की कैद और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इसी मामले में सह-आरोपी रघुबीर शरण प्रजापति को भी तीन वर्ष के कारावास के साथ ढाई लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
हाईकोर्ट में क्या हुआ?
सजा के खिलाफ दायर अपील पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई शुरू कर दी है। पूर्व विधायक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम और अधिवक्ता अभिक चिमनी ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान अदालत ने यह मानते हुए कि अपील पर विस्तृत विचार होना बाकी है, सजा के प्रभाव को फिलहाल स्थगित कर दिया। साथ ही उन्हें जमानत भी प्रदान की गई।
इसके अतिरिक्त, राजेन्द्र भारती ने अदालत से यह अनुरोध भी किया है कि उनकी विधानसभा सीट पर प्रस्तावित उपचुनाव की प्रक्रिया को अंतिम निर्णय तक रोका जाए। इस मांग पर न्यायालय का अंतिम निर्णय अभी आना शेष है।
किन कानूनी धाराओं के तहत हुई कार्रवाई?
इस मामले में अभियोजन पक्ष ने भारतीय दंड संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं, जिनमें शामिल हैं—
- धारा 120-बी – आपराधिक षड्यंत्र
- धारा 420 – धोखाधड़ी
- धारा 467 – मूल्यवान दस्तावेज की जालसाजी
- धारा 468 – धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी
- धारा 471 – जाली दस्तावेज का उपयोग
इन धाराओं के आधार पर अदालत ने साक्ष्यों और सुनवाई के बाद दोषसिद्धि का फैसला सुनाया था, जिसके विरुद्ध अब उच्च न्यायालय में अपील लंबित है।
राजनीतिक असर
दोषसिद्धि के बाद राजेन्द्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई। इसके चलते संबंधित सीट पर उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू होने की स्थिति बनी। यदि अदालत भविष्य में दोषसिद्धि या उससे जुड़े प्रभावों पर अलग निर्णय देती है, तो इसका असर उनके राजनीतिक भविष्य और निर्वाचन प्रक्रिया दोनों पर पड़ सकता है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही, सार्वजनिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रिया जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू जुड़े हुए हैं।
आगे क्या होगा?
अब सभी की निगाहें दिल्ली हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। अपील पर विस्तृत सुनवाई के बाद अदालत यह तय करेगी कि विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा जाए, उसमें संशोधन किया जाए या उसे निरस्त किया जाए। तब तक सजा पर लगी अंतरिम रोक प्रभावी रहेगी और राजेन्द्र भारती जमानत पर रहेंगे।
निष्कर्ष
राजेन्द्र भारती से जुड़ा यह मामला केवल एक आपराधिक मुकदमे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून के शासन, सार्वजनिक धन की सुरक्षा और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है। हाईकोर्ट का अंतिम निर्णय न केवल इस मामले की कानूनी दिशा तय करेगा, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों के लिए भी एक महत्वपूर्ण न्यायिक संदर्भ बन सकता है।
