जून 29, 2026

1 जुलाई से उत्तर प्रदेश में शुरू होगा ‘चलो स्कूल अभियान’ का दूसरा चरण, शिक्षा को जनआंदोलन बनाने का आह्वान

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उत्तर प्रदेश में प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाने के उद्देश्य से 1 जुलाई से ‘चलो स्कूल अभियान’ के दूसरे चरण की शुरुआत की जा रही है। यह अभियान केवल स्कूलों में नामांकन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय से जोड़ने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने और शिक्षा के प्रति समाज में सकारात्मक वातावरण तैयार करने की व्यापक पहल है। सरकार ने प्रदेश के नागरिकों, शिक्षकों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों से इस अभियान को जनभागीदारी के माध्यम से सफल बनाने का आह्वान किया है।

हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने का संकल्प

‘चलो स्कूल अभियान’ का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। ऐसे बच्चे जो अब तक विद्यालय में नामांकित नहीं हो पाए हैं या किसी कारणवश पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं, उन्हें दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना अभियान की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके साथ ही नियमित उपस्थिति बढ़ाने और ड्रॉपआउट दर में कमी लाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

विद्यालयों को बनाएंगे बच्चों के लिए आकर्षक

अभियान के दूसरे चरण में विद्यालयों को बच्चों के लिए अधिक प्रेरणादायक और आनंददायक बनाने पर जोर दिया जाएगा। शिक्षकों से अपेक्षा की गई है कि वे कक्षा शिक्षण के साथ-साथ खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम, चित्रकला, संगीत, विज्ञान गतिविधियों और समूह आधारित शिक्षण जैसी रचनात्मक पहलें करें, ताकि बच्चों की विद्यालय के प्रति रुचि स्वाभाविक रूप से बढ़े।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जब बच्चे विद्यालय को सीखने के साथ-साथ आनंद का केंद्र मानते हैं, तो उनकी उपस्थिति और सीखने की क्षमता दोनों में सकारात्मक सुधार देखने को मिलता है।

अभिभावकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण

बच्चों की शिक्षा केवल विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार की भी समान भागीदारी आवश्यक है। अभिभावकों से आग्रह किया गया है कि वे बच्चों पर केवल परीक्षा में अधिक अंक लाने का दबाव न डालें, बल्कि उनकी मेहनत, जिज्ञासा और सीखने की प्रक्रिया को भी महत्व दें।

बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजना, पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण देना और उनकी समस्याओं को समझना परिवार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। जब घर और स्कूल मिलकर कार्य करते हैं, तब बच्चों का सर्वांगीण विकास अधिक प्रभावी ढंग से संभव होता है।

समाज की भागीदारी से मिलेगा अभियान को बल

‘चलो स्कूल अभियान’ को व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप देने पर विशेष जोर दिया गया है। इसमें ग्राम पंचायतों, स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों, युवा समूहों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण माना गया है।

यदि समाज का प्रत्येक वर्ग यह सुनिश्चित करने का संकल्प ले कि उसके आसपास का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, तो शत-प्रतिशत नामांकन और नियमित उपस्थिति का लक्ष्य प्राप्त करना कहीं अधिक आसान हो जाएगा।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा होगी प्राथमिकता

अभियान के दौरान केवल विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। गतिविधि आधारित शिक्षण, डिजिटल संसाधनों का उपयोग, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, पुस्तकालयों, खेल सुविधाओं और बच्चों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रयास किए जाएंगे।

इसके साथ ही विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच, समस्या समाधान की क्षमता, आत्मविश्वास और नैतिक मूल्यों का विकास भी शिक्षा प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।

भविष्य निर्माण की मजबूत नींव

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी राज्य की प्रगति उसकी शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर करती है। शिक्षित बच्चे ही भविष्य में सक्षम नागरिक बनकर समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे में ‘चलो स्कूल अभियान’ केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने का प्रयास है।

निष्कर्ष

1 जुलाई से शुरू होने वाला ‘चलो स्कूल अभियान’ का दूसरा चरण उत्तर प्रदेश में शिक्षा को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अभियान की सफलता तभी संभव है जब सरकार, शिक्षक, अभिभावक और समाज मिलकर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। प्रत्येक बच्चे का विद्यालय तक पहुंचना केवल उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि एक शिक्षित, सशक्त और विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण की आधारशिला है।

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