फ़रवरी 23, 2026

IndiaAIImpactSummit2026: एआई युग में साइबर सुरक्षा और क्वांटम-सुरक्षित संचार की अनिवार्यता

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कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आज भारत की विकास यात्रा का अहम स्तंभ बन चुकी है। स्वास्थ्य सेवाओं में स्मार्ट डायग्नोस्टिक्स, बैंकिंग में जोखिम विश्लेषण, रक्षा में स्वचालित निगरानी, शिक्षा में वैयक्तिकृत अध्ययन और शासन में डेटा-आधारित निर्णय—हर क्षेत्र में एआई का प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। लेकिन जैसे-जैसे एआई का उपयोग और दायरा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे साइबर खतरों की जटिलता और गंभीरता भी बढ़ती जा रही है।

इसी पृष्ठभूमि में आयोजित #IndiaAIImpactSummit2026 में QNu Labs के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (CTO) ने जोर देकर कहा कि सुरक्षित डिजिटल ढांचा ही भारत की एआई महत्वाकांक्षा की वास्तविक नींव है। यदि सुरक्षा मजबूत नहीं होगी, तो एआई की प्रगति लंबे समय तक टिकाऊ नहीं रह पाएगी।


एआई के विस्तार के साथ बढ़ता जोखिम

एआई सिस्टम विशाल मात्रा में डेटा एकत्रित और विश्लेषित करते हैं। इस डेटा में व्यक्तिगत विवरण, बैंकिंग रिकॉर्ड, चिकित्सा इतिहास, रणनीतिक दस्तावेज और सरकारी सूचनाएं शामिल हो सकती हैं। ऐसे में यह डेटा साइबर अपराधियों के लिए अत्यंत आकर्षक लक्ष्य बन जाता है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि एआई मॉडल्स पर डेटा पॉइजनिंग, रैनसमवेयर, नेटवर्क हैकिंग और पहचान चोरी जैसे हमले भविष्य में और अधिक उन्नत रूप ले सकते हैं। इसलिए केवल एआई विकसित करना पर्याप्त नहीं है; उसे शुरू से ही “सुरक्षा-आधारित डिज़ाइन” (Security-by-Design) सिद्धांतों पर तैयार करना जरूरी है।


क्वांटम कंप्यूटिंग: नई क्रांति, नई चुनौती

दुनिया में क्वांटम कंप्यूटिंग तकनीक तेजी से विकसित हो रही है। यह पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में कहीं अधिक जटिल गणनाएं बेहद कम समय में करने में सक्षम है। जहां यह विज्ञान, औषधि और रक्षा जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है, वहीं यह पारंपरिक एन्क्रिप्शन प्रणालियों के लिए गंभीर चुनौती भी पेश करती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर वर्तमान एन्क्रिप्शन एल्गोरिदम को तोड़ने में सक्षम हो सकते हैं। इस संभावित खतरे को देखते हुए “क्वांटम-सुरक्षित संचार” (Quantum-Safe Communication) की दिशा में काम तेज हो गया है।

क्वांटम-सुरक्षित एन्क्रिप्शन ऐसी तकनीकों पर आधारित होता है जो भविष्य के क्वांटम हमलों के सामने भी सुरक्षित रहें। भारतीय स्टार्टअप और शोध संस्थान इस क्षेत्र में स्वदेशी समाधान विकसित कर रहे हैं, जिससे देश की डिजिटल संरचना लंबे समय तक सुरक्षित रह सके।


एआई महत्वाकांक्षा और विश्वसनीय साइबर ढांचा

भारत ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, 5G नेटवर्क, क्लाउड सेवाओं और डेटा सेंटर विस्तार के माध्यम से एआई पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। परंतु विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि विकास की गति के साथ सुरक्षा की परत भी उतनी ही मजबूत होनी चाहिए।

CTO ने अपने संबोधन में कहा कि डेटा गोपनीयता, मजबूत एन्क्रिप्शन, सुरक्षित नेटवर्किंग और नियमित ऑडिट जैसी प्रक्रियाएं एआई प्रणाली का अनिवार्य हिस्सा बननी चाहिए। सरकारी निकायों, निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स के बीच तालमेल से ही एक भरोसेमंद डिजिटल वातावरण तैयार किया जा सकता है।


‘मेक इन इंडिया’ से ‘सिक्योर इन इंडिया’ की ओर

समिट में यह विचार भी सामने आया कि भारत को केवल एआई समाधानों के निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें सुरक्षित और वैश्विक मानकों के अनुरूप भी बनाना चाहिए। “मेक इन इंडिया” के साथ-साथ “सिक्योर इन इंडिया” की अवधारणा को अपनाना समय की मांग है।

स्वदेशी साइबर सुरक्षा और क्वांटम-सुरक्षित तकनीकों के विकास से भारत न केवल अपने डिजिटल भविष्य को सुरक्षित कर सकेगा, बल्कि वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दिशा में भी मजबूत कदम रखेगा।


निष्कर्ष

एआई आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था और शासन प्रणाली को नई दिशा देगा। लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि हम अपने डिजिटल बुनियादी ढांचे को कितना सुरक्षित बना पाते हैं। क्वांटम-सुरक्षित संचार, उन्नत एन्क्रिप्शन और साइबर सुरक्षा के समन्वित प्रयास ही भारत की एआई यात्रा को सुरक्षित, स्थायी और विश्वसनीय बना सकते हैं।

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