ट्रैवल कंपनी द्वारा 17 लाख रुपये की कथित ठगी: अग्रिम जमानत याचिका वापस, दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश
प्रस्तावना
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ट्रैवल कंपनी के प्रबंध निदेशक पर लगे धोखाधड़ी के आरोपों से जुड़े मामले में दायर अग्रिम जमानत याचिका पर महत्वपूर्ण आदेश दिया। अदालत ने आरोपी द्वारा याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए उसे भविष्य में नए तथ्यों और दस्तावेजों के साथ पुनः आवेदन करने की छूट प्रदान की।

मामला क्या है
मामले के अनुसार, आरोपी काशीनाथ हजारी एक ट्रैवल कंपनी “ईडब्ल्यूडी होटल्स” के प्रबंध निदेशक बताए गए हैं। आरोप है कि उन्होंने फरवरी और मार्च 2023 के दौरान लगभग 100 लोगों से थाईलैंड यात्रा के नाम पर कुल 17 लाख रुपये एकत्र किए थे। यह यात्रा 16 अप्रैल से 28 अप्रैल 2023 के बीच आयोजित होने वाली बताई गई थी।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उनसे विमान टिकट और होटल बुकिंग की व्यवस्था कराने के लिए पैसे लिए गए थे, लेकिन बाद में न तो टिकट उपलब्ध कराए गए और न ही यात्रा की कोई व्यवस्था की गई।
फर्जी पीएनआर नंबर देने का आरोप
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि शिकायतकर्ताओं को जो पीएनआर नंबर दिए गए थे, वे वास्तविक नहीं थे। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (आपराधिक विश्वासघात) और 34 के तहत मामला दर्ज किया।
आरोपी का पक्ष
आरोपी की ओर से अदालत में दलील दी गई कि यह विवाद एक साधारण व्यावसायिक लेन-देन से जुड़ा है, जिसे आपराधिक रंग दे दिया गया है।
बचाव पक्ष का यह भी कहना था कि यात्रियों से प्राप्त धनराशि संबंधित एयरलाइन को भेज दी गई थी, लेकिन बाद में एयरलाइन दिवालिया हो गई, जिसके कारण टिकट जारी नहीं हो सके।
इसके अलावा यह भी दावा किया गया कि आरोपी ने शिकायतकर्ताओं को आंशिक राशि वापस भी कर दी है और जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं हो रही।
राज्य पक्ष का विरोध
सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त लोक अभियोजक ने अग्रिम जमानत देने का कड़ा विरोध किया। उनका कहना था कि शिकायतकर्ताओं को दिए गए पीएनआर नंबर फर्जी थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मामला केवल व्यावसायिक विवाद नहीं बल्कि धोखाधड़ी का है।
राज्य पक्ष ने यह भी बताया कि जिस एयरलाइन के दिवालिया होने की बात कही जा रही है, वह घटना बाद की है और इसका मामले से सीधा संबंध नहीं है।
अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत अदालत का उद्देश्य किसी प्रकार की धन वसूली करना नहीं होता। अदालत का कार्य केवल यह देखना होता है कि आरोपी को गिरफ्तारी से राहत दी जानी चाहिए या नहीं।
याचिका वापस लेने की अनुमति
सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें अग्रिम जमानत याचिका वापस लेने की अनुमति दी जाए, ताकि वे बाद में अतिरिक्त दस्तावेजों और तथ्यों के साथ नया आवेदन प्रस्तुत कर सकें।
अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए याचिका को वापस लिया हुआ मानते हुए खारिज कर दिया और भविष्य में पुनः आवेदन करने की स्वतंत्रता प्रदान कर दी।
निष्कर्ष
यह मामला ट्रैवल सेवाओं के नाम पर कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों से पैसे लिए जाने का आरोप है। फिलहाल अदालत ने अग्रिम जमानत पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है, बल्कि आरोपी को नए दस्तावेजों के साथ दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाने का विकल्प दिया है।
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