मार्च 16, 2026

दिल्ली आबकारी नीति मामला: हाईकोर्ट ने केजरीवाल और सिसोदिया को जवाब दाखिल करने के लिए दिया अतिरिक्त समय

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दिल्ली की विवादित आबकारी नीति से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अहम घटनाक्रम सामने आया है। अदालत ने दिल्ली के मुख्यमंत्री , पूर्व उपमुख्यमंत्री और अन्य आरोपियों को केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दे दिया है। यह याचिका ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देती है, जिसमें सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया था। इस मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल 2026 को तय की गई है।

मामला क्या है

यह पूरा विवाद दिल्ली सरकार की नई शराब नीति से जुड़ा है, जिसे लेकर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। सीबीआई ने जांच के दौरान दावा किया था कि इस नीति के लागू होने में नियमों का उल्लंघन किया गया और कुछ निजी पक्षों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

हालांकि 27 फरवरी 2026 को ट्रायल कोर्ट ने सबूतों की कमी का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया था। अदालत के इस फैसले के बाद सीबीआई ने इसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। एजेंसी का कहना है कि ट्रायल कोर्ट का निर्णय कानून के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है और इसे पुनः जांच की आवश्यकता है।

हाईकोर्ट में क्या हुआ

इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति की पीठ के सामने हुई। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि आरोपियों को अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए, ताकि वे विस्तृत जवाब दाखिल कर सकें।

सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट का आदेश “गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण” है और इसे ऐसे ही रहने देना न्याय के हित में नहीं होगा।

वहीं बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि ट्रायल कोर्ट का आदेश लगभग 500 पन्नों का है। इतने विस्तृत फैसले का अध्ययन कर उचित जवाब तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले से संबंधित एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) सुप्रीम कोर्ट में भी दायर की गई है।

अगली सुनवाई कब

दिल्ली हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल 2026 को तय की है। उस दिन अदालत यह तय करेगी कि ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपियों को दी गई राहत बरकरार रहेगी या फिर सीबीआई की अपील पर नए सिरे से कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुलेगा।

राजनीतिक और कानूनी महत्व

यह मामला केवल कानूनी विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका राजनीतिक असर भी काफी व्यापक माना जा रहा है। यह प्रकरण आम आदमी पार्टी की छवि से भी जुड़ा हुआ है, क्योंकि विपक्ष लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाता रहा है।

कानूनी दृष्टि से देखा जाए तो यदि हाईकोर्ट ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट देता है, तो आरोपियों के खिलाफ मुकदमा फिर से शुरू हो सकता है। वहीं यदि बरी करने का आदेश बरकरार रहता है, तो यह आरोपियों के लिए बड़ी राहत साबित होगा।

निष्कर्ष

दिल्ली आबकारी नीति से जुड़ा यह मामला देश की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया दोनों के लिए महत्वपूर्ण बन चुका है। दिल्ली हाईकोर्ट का ताजा निर्णय यह दर्शाता है कि अदालत सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर देना चाहती है। अब 6 अप्रैल की सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी, क्योंकि वहीं से इस बहुचर्चित मामले की अगली दिशा तय होगी।

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