भारत के प्रधानमंत्री ने हाल ही में वैश्विक कूटनीति के स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाते हुए पश्चिम एशिया में चल रहे तनावपूर्ण हालात पर कई महत्वपूर्ण देशों के नेताओं से बातचीत की। इन देशों में , , , और शामिल हैं। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में शांति, स्थिरता और संवाद को बढ़ावा देना था।

प्रधानमंत्री मोदी ने सभी नेताओं के साथ बातचीत में भारत का स्पष्ट और संतुलित पक्ष रखते हुए कहा कि किसी भी संघर्ष का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने विशेष रूप से तनाव कम करने (de-escalation) और दीर्घकालिक शांति स्थापित करने पर जोर दिया। यह भारत की पारंपरिक विदेश नीति के अनुरूप है, जो हमेशा शांति, सहयोग और आपसी सम्मान पर आधारित रही है।
ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर भी प्रधानमंत्री ने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने क्षेत्र में ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बताया। खासतौर पर (होर्मुज़ जलडमरूमध्य) का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसके सुरक्षित और निर्बाध उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है, और इसकी सुरक्षा वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इन वार्ताओं के दौरान सभी देशों के नेताओं ने भी इस बात पर सहमति जताई कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना और ऊर्जा व अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को बाधित न होने देना अत्यंत जरूरी है। , और के साथ हुई चर्चाओं में भी यही साझा प्रतिबद्धता दोहराई गई।
प्रधानमंत्री ने इन नेताओं को विभिन्न त्योहारों की शुभकामनाएँ भी दीं, जो भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस तरह के gestures आपसी संबंधों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
इस बीच, भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उन्हें संघर्ष क्षेत्रों से सुरक्षित निकालने के प्रयासों में जुटी हुई है। अब तक और के रास्ते 913 फँसे हुए भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। यह अभियान भारत की आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता और अपने नागरिकों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
विदेश मंत्रालय द्वारा स्थापित कंट्रोल रूम ने इस दौरान बड़ी संख्या में कॉल्स को संभाला है, जिनमें से अधिकांश व्यापारिक जहाजों और समुद्री सुरक्षा से संबंधित थीं। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत न केवल अपने नागरिकों बल्कि वैश्विक व्यापारिक हितों की भी चिंता कर रहा है।
कुल मिलाकर, भारत ने इस संकट के दौरान एक जिम्मेदार और सक्रिय वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी भूमिका निभाई है। कूटनीतिक संवाद, मानवीय सहायता और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता के माध्यम से भारत ने यह संदेश दिया है कि वह न केवल अपने नागरिकों के लिए बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी पूरी तरह समर्पित है।
