केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की 45वीं बैठक: संरक्षण और देखभाल पर जोर

नई दिल्ली में आयोजित केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) की 45वीं बैठक में देशभर के चिड़ियाघरों की स्थिति, प्रबंधन और पशु कल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक चर्चा की गई। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने की।
बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत के चिड़ियाघरों में पशुओं की देखभाल, संरक्षण और प्रबंधन के मानकों को और बेहतर बनाना था। इस दौरान विभिन्न राज्यों से आए अधिकारियों और विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए और आधुनिक तकनीकों तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाने पर जोर दिया।
प्रकाशन का विमोचन: बेहतर देखभाल की दिशा में पहल
बैठक के दौरान ‘कैद में देखभाल: चिड़ियाघरों की सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रदर्शित करने वाला एक संकलन’ शीर्षक से एक महत्वपूर्ण प्रकाशन भी जारी किया गया। यह संकलन देश के विभिन्न चिड़ियाघरों में अपनाई जा रही उत्कृष्ट व्यवस्थाओं और नवाचारों को सामने लाता है।
इस प्रकाशन का उद्देश्य चिड़ियाघर प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को एक मार्गदर्शिका प्रदान करना है, जिससे वे पशुओं की देखभाल के उच्च मानकों को अपनाकर उनके स्वास्थ्य और कल्याण को सुनिश्चित कर सकें।
पशु कल्याण और संरक्षण पर विशेष ध्यान
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि चिड़ियाघर केवल मनोरंजन का माध्यम न होकर वन्यजीव संरक्षण के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। इनका उपयोग संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण, प्रजनन और शोध के लिए किया जाना चाहिए।
मंत्री ने कहा कि चिड़ियाघरों में पशुओं के प्राकृतिक व्यवहार को बनाए रखने के लिए उनके आवास को अधिक प्राकृतिक और अनुकूल बनाना आवश्यक है। साथ ही, पशुओं के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए समृद्धि (enrichment) गतिविधियों को बढ़ावा देने की जरूरत है।
आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण की भूमिका
बैठक में डिजिटल मॉनिटरिंग, स्वास्थ्य ट्रैकिंग सिस्टम और वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धतियों के उपयोग पर भी चर्चा हुई। कर्मचारियों के नियमित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई, ताकि वे बदलती जरूरतों के अनुरूप बेहतर सेवाएं दे सकें।
भविष्य की दिशा
केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने आने वाले समय में देशभर के चिड़ियाघरों के लिए एकीकृत मानक विकसित करने और उनकी नियमित निगरानी को और सख्त करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, जनता के बीच वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए भी विशेष अभियान चलाने की योजना है।
निष्कर्ष
यह बैठक और जारी किया गया प्रकाशन भारत में चिड़ियाघरों के प्रबंधन और पशु कल्याण को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल पशुओं की बेहतर देखभाल सुनिश्चित होगी, बल्कि देश में वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।
