मार्च 22, 2026

पाठा क्षेत्र की समस्याओं पर उबाल—सातवें दिन भी जारी क्रमिक अनशन, समाधान तक पीछे हटने से इंकार

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कर्वी (चित्रकूट): बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व में पाठा क्षेत्र की जमीनी समस्याओं को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। शहीद स्मारक पार्क, एलआईसी तिराहा कर्वी में चल रहा क्रमिक अनशन रविवार को सातवें दिन भी बिना रुके जारी रहा। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे घर वापसी नहीं करेंगे।

अनशन स्थल पर मौजूद कार्यकर्ताओं का कहना है कि आंधी, बारिश या किसी भी तरह की विपरीत परिस्थितियां उनके हौसले को डिगा नहीं सकतीं। आंदोलन में शामिल लोगों ने क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के लिए आवाज उठाई जा रही है, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं।

जनसमस्याओं का बड़ा मुद्दा बना आंदोलन

पाठा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और पानी जैसी मूलभूत जरूरतें लंबे समय से अधूरी हैं। इसी को लेकर यह आंदोलन खड़ा हुआ है, जिसमें स्थानीय जनता का समर्थन लगातार बढ़ता जा रहा है। आंदोलनकारी नेताओं ने आमजन से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल कुछ मांगों की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास की है।

प्रमुख मांगों में विकास का व्यापक एजेंडा

अनशनकारियों ने सरकार के सामने 20 प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें सड़क चौड़ीकरण, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, शिक्षा संस्थानों की स्थापना, खेल सुविधाओं का विकास, पेयजल आपूर्ति, बिजली व्यवस्था में सुधार और रोजगार के अवसर सृजित करना शामिल है।

देवांगना घाटी से ददरी-मारकुंडी मार्ग के चौड़ीकरण से लेकर बहिलपुरवा रेलवे स्टेशन के अंडरपास के सुधार और मारकुंडी रेलवे फाटक पर फ्लाईओवर निर्माण जैसी मांगें क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने से जुड़ी हैं। वहीं, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंबुलेंस और डॉक्टरों की तैनाती की मांग स्वास्थ्य सेवाओं की खराब स्थिति को दर्शाती है।

शिक्षा और रोजगार पर भी जोर

आंदोलन में डिग्री कॉलेज, इंटर कॉलेज और बालिका शिक्षा संस्थानों की स्थापना के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। इसके अलावा, क्षेत्र में फैक्ट्रियों और अन्य रोजगार के साधनों की स्थापना कर पलायन रोकने की मांग भी की गई है।

स्थानीय प्रशासन पर बढ़ा दबाव

सात दिन तक लगातार चले इस अनशन ने प्रशासन पर भी दबाव बढ़ा दिया है। हालांकि अभी तक किसी बड़े स्तर की वार्ता या समाधान की घोषणा सामने नहीं आई है, लेकिन आंदोलन की तीव्रता को देखते हुए प्रशासन की सक्रियता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

जनसमर्थन बना आंदोलन की ताकत

स्थानीय ग्रामीणों, युवाओं और सामाजिक संगठनों का समर्थन इस आंदोलन को मजबूती दे रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक पाठा क्षेत्र को उसकी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल जातीं।

निष्कर्ष:
पाठा क्षेत्र का यह आंदोलन केवल मांगों का समूह नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा के खिलाफ एक व्यापक जनआवाज बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस जनदबाव का किस तरह जवाब देता है और क्या क्षेत्र की समस्याओं का समाधान वास्तव में जमीन पर उतर पाता है या नहीं।

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