मार्च 24, 2026

टीवी9 समिट 2026: वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत का आत्मविश्वासी दृष्टिकोण

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में का संबोधन समकालीन वैश्विक परिस्थितियों और भारत की उभरती भूमिका पर एक व्यापक और स्पष्ट दृष्टि प्रस्तुत करता है। यह भाषण ऐसे समय में दिया गया, जब दुनिया विभिन्न संघर्षों, अस्थिरताओं और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही है।

सांकेतिक तस्वीर

वैश्विक संकट और भारत की संतुलित नीति

प्रधानमंत्री ने अपने विचार रखते हुए कहा कि वर्तमान समय में दुनिया कई टकरावों से घिरी हुई है, जिनका असर हर देश पर पड़ रहा है। ऐसे दौर में भारत ने एक संतुलित और परिपक्व नीति अपनाई है। भारत न तो किसी एक धड़े में बंधा है और न ही किसी दबाव में निर्णय लेता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का मूल मंत्र है—देशहित सर्वोपरि, शांति का समर्थन और संवाद का मार्ग। यही कारण है कि भारत आज विभिन्न वैश्विक समूहों के बीच एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में उभरा है।

चुनौतियों के बीच निरंतर प्रगति

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि महामारी के बाद से दुनिया लगातार नई-नई चुनौतियों का सामना कर रही है, लेकिन भारत ने हर कठिनाई को अवसर में बदलने का प्रयास किया है।

देश ने न केवल संकटों का मजबूती से सामना किया, बल्कि विकास की गति को भी बनाए रखा। हाल के समय में देशभर में इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, उद्योग और कृषि से जुड़े अनेक बड़े निर्णय और परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जो भारत के तेज़ी से आगे बढ़ने का संकेत देती हैं।

आर्थिक और सामाजिक सुधारों का प्रभाव

भाषण में प्रधानमंत्री ने पिछले वर्षों में हुए बदलावों को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत में अब विकास की गति पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज हो गई है।

  • सड़क निर्माण की रफ्तार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है
  • स्टार्टअप्स की संख्या में अभूतपूर्व उछाल आया है
  • बैंकिंग सेवाओं का विस्तार हुआ है, जिससे करोड़ों लोग जुड़े हैं
  • स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में अवसर बढ़े हैं

इन सभी सुधारों का उद्देश्य आम नागरिक के जीवन को बेहतर बनाना है।

पूर्वी भारत का उभरता परिदृश्य

प्रधानमंत्री ने देश के पूर्वी हिस्से के विकास को विशेष महत्व दिया। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में पहले विकास की गति धीमी थी, अब वहां नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

असम, ओडिशा, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में औद्योगिक निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और नई परियोजनाओं के जरिए आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। यह बदलाव देश के संतुलित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

राजनीति और राष्ट्रहित पर संदेश

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में आलोचना और विरोध आवश्यक हैं, लेकिन जब यह विरोध देश के विकास के खिलाफ हो जाए, तो यह चिंता का विषय बन जाता है।

उन्होंने यह स्पष्ट किया कि राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि राष्ट्र के हितों को प्राथमिकता देना होना चाहिए। देशहित को सर्वोपरि रखते हुए ही मजबूत और समृद्ध भारत का निर्माण संभव है।

आत्मनिर्भरता और वैश्विक पहचान

प्रधानमंत्री ने भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज देश कई क्षेत्रों में विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है।

डिजिटल तकनीक, स्टार्टअप्स, मैन्युफैक्चरिंग और स्वास्थ्य सेवाओं में भारत की प्रगति यह दर्शाती है कि देश आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

प्रेरणा का स्रोत

भाषण के अंत में प्रधानमंत्री ने देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों , और को श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही के विचारों का स्मरण करते हुए उन्होंने देशहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा दी।


निष्कर्ष

टीवी9 समिट 2026 में दिया गया यह संबोधन भारत के आत्मविश्वास, संतुलित कूटनीति और तेज़ विकास का प्रतिबिंब है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत जिस तरह से आगे बढ़ रहा है, वह न केवल देश के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक सकारात्मक संदेश है।

यह स्पष्ट है कि यदि देशहित को प्राथमिकता दी जाए और सभी मिलकर प्रयास करें, तो भारत को विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने का लक्ष्य अवश्य प्राप्त किया जा सकता है।

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