साइबर ठगी पर यूपी पुलिस का सख्त प्रहार: उन्नाव में दो पीड़ितों के ₹1,02,007 वापस

डिजिटल युग में जहां ऑनलाइन लेन-देन ने लोगों की जिंदगी को आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश पुलिस लगातार सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के जरिए आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने में जुटी हुई है। हाल ही में उन्नाव जिले से एक सकारात्मक और भरोसा जगाने वाली खबर सामने आई है, जहां पुलिस की तत्परता से साइबर ठगी के शिकार दो लोगों को उनकी मेहनत की कमाई वापस दिलाई गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अज्ञात साइबर अपराधियों ने क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा देकर और यूपीआई के माध्यम से दो व्यक्तियों से कुल ₹1,02,007 की ठगी कर ली थी। ठगों ने बेहद चालाकी से पीड़ितों को अपने जाल में फंसाया और कुछ ही मिनटों में उनके खाते से पैसे निकाल लिए। हालांकि, पीड़ितों ने तुरंत मामले की जानकारी पुलिस को दी, जिसके बाद साइबर हेल्पडेस्क टीम सक्रिय हो गई।
उन्नाव पुलिस की साइबर टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए तकनीकी सहायता और बैंकिंग समन्वय के जरिए ठगी की गई पूरी राशि को ट्रेस किया और सफलतापूर्वक पीड़ितों के खातों में वापस कराया। इस सराहनीय कार्य ने न केवल पीड़ितों को राहत दी, बल्कि आम जनता में पुलिस के प्रति विश्वास को भी मजबूत किया है।
यूपी पुलिस ने इस मौके पर लोगों से अपील की है कि यदि किसी के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी होती है, तो वे तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें या आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। त्वरित सूचना देने से ठगी की रकम को वापस पाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
यह घटना इस बात का उदाहरण है कि जागरूकता और समय पर की गई कार्रवाई से साइबर अपराधों पर काबू पाया जा सकता है। साथ ही, यह भी जरूरी है कि लोग किसी भी अनजान कॉल, लिंक या ऑफर पर बिना पुष्टि किए भरोसा न करें और अपनी बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
अंततः, उन्नाव पुलिस की यह पहल “कैशबैक बाय कॉप्स” जैसी मुहिम को सार्थक बनाती है, जो यह संदेश देती है कि कानून के हाथ लंबे हैं और अपराधी कितने भी चालाक क्यों न हों, बच नहीं सकते।
