अप्रैल 10, 2026

खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र पर मंथन: शिलांग में महत्वपूर्ण बैठकों का आयोजन

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सांकेतिक तस्वीर

भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा कल शिलांग में संसदीय परामर्शदात्री समिति (Parliamentary Consultative Committee) और NIFTEM काउंसिल की अहम बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य देश के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की वर्तमान स्थिति का आकलन करना, चल रहे सुधार कार्यक्रमों की समीक्षा करना और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा करना था।

खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की व्यापक समीक्षा

संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक में मंत्रालय द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और नीतिगत पहलों का विस्तृत विश्लेषण किया गया। इस दौरान यह देखा गया कि किस प्रकार खाद्य प्रसंस्करण उद्योग किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजन करने और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

सरकार द्वारा लागू की गई योजनाओं का उद्देश्य किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना, फसल के नुकसान को कम करना और आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना है। बैठक में इन योजनाओं की प्रगति और प्रभावशीलता पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

सुधार कार्यक्रमों और नीतिगत पहलों पर जोर

बैठक में मंत्रालय के सुधार कार्यक्रमों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, कोल्ड चेन नेटवर्क का विस्तार, और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को प्रोत्साहन देने जैसे विषय शामिल रहे।

नीतिगत पहलों के तहत निवेश आकर्षित करने, उद्योगों को आसान नियमों के माध्यम से प्रोत्साहन देने और निर्यात को बढ़ाने के प्रयासों पर भी चर्चा की गई। इससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सके।

NIFTEM काउंसिल की बैठक का महत्व

NIFTEM (National Institute of Food Technology Entrepreneurship and Management) काउंसिल की बैठक में खाद्य प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया गया। इस दौरान यह चर्चा हुई कि कैसे आधुनिक तकनीकों और नवाचार के माध्यम से इस क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।

काउंसिल ने यह भी विचार किया कि युवाओं को इस क्षेत्र में प्रशिक्षित कर रोजगार के नए अवसर कैसे उत्पन्न किए जा सकते हैं। इससे देश में उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को नई दिशा मिलेगी।

पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए विशेष अवसर

शिलांग में इन बैठकों का आयोजन पूर्वोत्तर भारत के महत्व को भी दर्शाता है। यह क्षेत्र कृषि और बागवानी उत्पादों की विविधता के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां प्रसंस्करण सुविधाओं की कमी एक बड़ी चुनौती रही है।

सरकार का प्रयास है कि इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाकर स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जाए। इससे स्थानीय किसानों और उद्यमियों को सीधा लाभ मिलेगा।

निष्कर्ष

शिलांग में आयोजित इन बैठकों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। योजनाओं की समीक्षा और नई रणनीतियों पर विचार-विमर्श से यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में यह क्षेत्र और अधिक तेजी से विकास करेगा।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग न केवल कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाएगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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