अप्रैल 18, 2026

डिजिटल अरेस्ट स्कैम: डर के जरिए ठगी का नया चेहरा

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संकेतिक तस्वीर

भारत में साइबर अपराध तेजी से बदल रहे हैं और इन्हीं में एक नया व बेहद खतरनाक तरीका सामने आया है—डिजिटल अरेस्ट स्कैम। यह ठगी का ऐसा रूप है जिसमें अपराधी तकनीक और मनोवैज्ञानिक दबाव का इस्तेमाल कर लोगों को जाल में फँसाते हैं। कई राज्यों की पुलिस, खासकर बिहार पुलिस, इसको लेकर लगातार लोगों को जागरूक कर रही है।


डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या होता है?

डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग खुद को पुलिस अधिकारी, जांच एजेंसी के सदस्य या अदालत से जुड़ा व्यक्ति बताकर वीडियो कॉल करते हैं। वे पीड़ित को यह विश्वास दिलाते हैं कि वह किसी गंभीर अपराध में फँस गया है।

इस दौरान वे नकली दस्तावेज, फर्जी गिरफ्तारी वारंट, पुलिस वर्दी या कोर्ट जैसी पृष्ठभूमि का इस्तेमाल करते हैं ताकि सामने वाला व्यक्ति घबरा जाए। डर के माहौल में पीड़ित से पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं या उसकी निजी जानकारी हासिल कर ली जाती है।


हाल के चौंकाने वाले मामले

देश के अलग-अलग हिस्सों में इस तरह की घटनाएँ तेजी से बढ़ रही हैं:

  • उत्तर प्रदेश (बरेली): एक दंपति को कई घंटों तक वीडियो कॉल पर “डिजिटल हिरासत” में रखा गया। सौभाग्य से उनके बेटे ने समय रहते स्थिति समझ ली।
  • दिल्ली: एक बुजुर्ग महिला से करोड़ों रुपये ठग लिए गए, जहाँ अपराधियों ने खुद को पुलिस और जज बताया।
  • पुणे: एक वैज्ञानिक को इतना मानसिक दबाव दिया गया कि उन्होंने कर्ज लेकर और सोना गिरवी रखकर पैसे ट्रांसफर कर दिए।

ये घटनाएँ दिखाती हैं कि ठग अब सिर्फ तकनीकी ही नहीं, बल्कि मानसिक स्तर पर भी लोगों को निशाना बना रहे हैं।


जागरूकता के लिए पुलिस की पहल

बिहार पुलिस और अन्य राज्यों की साइबर सेल इस खतरे को गंभीरता से लेते हुए कई अभियान चला रही हैं।

  • सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से जागरूकता संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं।
  • प्रसिद्ध हस्तियों जैसे अमिताभ बच्चन को भी जोड़ा गया है ताकि अधिक लोगों तक संदेश पहुँच सके।
  • साइबर थानों और हेल्पलाइन सेवाओं को मजबूत किया गया है, जिससे पीड़ितों को तुरंत सहायता मिल सके।

खुद को कैसे सुरक्षित रखें?

डिजिटल अरेस्ट जैसे स्कैम से बचने के लिए कुछ आसान लेकिन जरूरी सावधानियाँ अपनानी चाहिए:

  • घबराएँ नहीं: कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती।
  • जानकारी साझा न करें: बैंक डिटेल, ओटीपी या पहचान से जुड़ी जानकारी किसी को न दें।
  • सत्यापन करें: अगर कोई खुद को अधिकारी बताता है, तो नजदीकी थाने से पुष्टि करें।
  • तुरंत रिपोर्ट करें: साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।

निष्कर्ष

डिजिटल अरेस्ट स्कैम का सबसे बड़ा हथियार है—डर। अपराधी इसी डर का फायदा उठाकर लोगों को मानसिक रूप से कमजोर करते हैं और ठगी को अंजाम देते हैं।

इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है जागरूकता, सतर्कता और सही समय पर कार्रवाई। अगर लोग समझदारी से काम लें और बिना पुष्टि किसी पर भरोसा न करें, तो इस तरह के अपराधों को काफी हद तक रोका जा सकता है।


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