मई 10, 2026

महेशगंज थानाध्यक्ष का कथित ऑडियो वायरल, जातिसूचक टिप्पणी से गरमाया माहौल

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ब्राह्मण समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप, जांच और कार्रवाई की उठी मांग

प्रतापगढ़। जनपद के महेशगंज थाना प्रभारी से जुड़ा एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिले का माहौल गरमा गया है। वायरल ऑडियो में महेशगंज थाने के प्रभारी निरीक्षक राधे बाबू पर ब्राह्मण समाज को लेकर अभद्र और जातिसूचक टिप्पणी करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। मामला सामने आने के बाद न केवल सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।

बताया जा रहा है कि वायरल ऑडियो में थाना प्रभारी कथित तौर पर “दुबे ब्राह्मण नहीं होते” और “महेशगंज थाना क्षेत्र के सभी ब्राह्मण अनपढ़ हैं” जैसी बातें कहते सुनाई दे रहे हैं। हालांकि इस ऑडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ ऑडियो

ऑडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। लोग इस कथित टिप्पणी को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं। कई लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि कोई जिम्मेदार पुलिस अधिकारी इस प्रकार की भाषा का प्रयोग करता है तो इससे समाज में गलत संदेश जाता है।

क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि पुलिस विभाग समाज में कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होता है। ऐसे में किसी भी अधिकारी द्वारा कथित तौर पर जातिसूचक टिप्पणी किया जाना बेहद गंभीर मामला माना जा रहा है।

पहले भी उठते रहे हैं व्यवहार को लेकर सवाल

स्थानीय लोगों के मुताबिक महेशगंज थाना प्रभारी के व्यवहार को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। कुछ लोगों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर आरोप लगाया कि थाना परिसर में फरियादियों के साथ उनका व्यवहार कई बार विवादों का कारण बन चुका है।

हालांकि इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस विभाग की ओर से भी इस संबंध में कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। बावजूद इसके वायरल ऑडियो ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

वरिष्ठ पत्रकार ने की शिकायत

मामले को लेकर कुंडा तहसील के वरिष्ठ पत्रकार रूपेंद्र शुक्ला ने पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ़ और आईजी रेंज प्रयागराज को लिखित शिकायत भेजी है। शिकायत में वायरल ऑडियो की निष्पक्ष जांच कर संबंधित अधिकारी के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है।

शिकायत में कहा गया है कि यदि वायरल ऑडियो सही पाया जाता है तो यह एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी के लिए बेहद गंभीर विषय है। शिकायतकर्ता का कहना है कि ऐसी टिप्पणियां समाज में वैमनस्य बढ़ाने का काम कर सकती हैं और पुलिस विभाग की छवि को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं।

क्षेत्र में बढ़ा आक्रोश

ऑडियो वायरल होने के बाद क्षेत्र में विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोगों ने मामले में निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर सख्त विभागीय कार्रवाई की मांग की है।

लोगों का कहना है कि कानून व्यवस्था संभालने वाले अधिकारियों को समाज के सभी वर्गों के प्रति समान और सम्मानजनक व्यवहार रखना चाहिए। यदि कोई अधिकारी इस मर्यादा का उल्लंघन करता है तो उस पर कार्रवाई होना आवश्यक है।

पुलिस प्रशासन की चुप्पी पर भी उठे सवाल

मामले को लेकर अभी तक पुलिस प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इससे लोगों के बीच चर्चाएं और तेज हो गई हैं। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि वायरल ऑडियो की जांच कब शुरू होगी और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाएगा।

हालांकि पुलिस सूत्रों का कहना है कि वायरल सामग्री की सत्यता की जांच की जा रही है और जांच के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी सच्चाई

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वायरल ऑडियो कब का है और उसमें सुनाई देने वाली आवाज वास्तव में किसकी है। ऐसे में बिना आधिकारिक पुष्टि के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी माना जा रहा है।

अब पूरे मामले की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आ सकेगी। लेकिन इस घटना ने प्रतापगढ़ में पुलिस विभाग की कार्यशैली और अधिकारियों के व्यवहार को लेकर एक नई बहस जरूर छेड़ दी है।

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