प्रतापगढ़ में हरे-भरे महुआ के पेड़ की कटाई से ग्रामीणों में आक्रोश

बाघराय थाना क्षेत्र के धमावा गांव में फलदार वृक्ष काटे जाने का आरोप, वन विभाग ने जांच शुरू की
प्रतापगढ़। जनपद के बाघराय थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम धमावा में हरे-भरे महुआ के पेड़ की कटाई का मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि धारूपुर निवासी रामसेवक गौतम द्वारा बिना अनुमति फलदार महुआ के पेड़ को कटवाकर धराशायी कर दिया गया। मामले की सूचना मिलते ही बाघराय पुलिस मौके पर पहुंची, जबकि वन विभाग ने भी घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार गांव में वर्षों पुराने महुआ के पेड़ को काट दिया गया, जिससे पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि महुआ का पेड़ न केवल फलदार और छायादार होता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
ग्रामीणों ने लगाया अवैध कटान का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि रामसेवक गौतम लंबे समय से क्षेत्र में हरे-भरे पेड़ों की कटाई करवा रहा है और हरियाली को लगातार नुकसान पहुंचा रहा है। लोगों का कहना है कि बिना किसी वैध अनुमति के पेड़ों की कटाई कराई जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही।
स्थानीय लोगों ने बताया कि धमावा गांव में काटा गया महुआ का पेड़ पूरी तरह हरा-भरा और फलदार था। पेड़ की कटाई की जानकारी मिलते ही गांव के लोगों में नाराजगी फैल गई और उन्होंने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
मौके पर पहुंची पुलिस और वन विभाग
घटना की सूचना मिलने पर बाघराय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी जुटाई। वहीं कुंडा रेंजर ने भी पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग की टीम को जांच के निर्देश दिए हैं।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि बिना अनुमति पेड़ काटे जाने की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग द्वारा मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
बिना लाइसेंस आरा मशीन संचालन का भी आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि धारूपुर निवासी रामसेवक गौतम द्वारा भाव चौराहे पर बिना लाइसेंस आरा मशीन भी संचालित की जा रही है। लोगों का कहना है कि इसी आरा मशीन के माध्यम से क्षेत्र में अवैध रूप से लकड़ी काटने और बेचने का काम किया जाता है।
हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।
फलदार और छायादार पेड़ों की कटाई बनी चिंता का विषय
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा हर वर्ष करोड़ों पौधे लगाए जाने के बावजूद फलदार और छायादार पेड़ों की कटाई लगातार जारी है। इससे पर्यावरण संतुलन पर गंभीर असर पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि महुआ जैसे पेड़ ग्रामीण जीवन और प्रकृति दोनों के लिए बेहद उपयोगी होते हैं। इन पेड़ों से लोगों को फल, छाया और आर्थिक लाभ मिलता है। ऐसे में हरे-भरे पेड़ों की कटाई भविष्य के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।
पर्यावरण संरक्षण को लेकर उठी मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग से क्षेत्र में अवैध कटान के खिलाफ विशेष अभियान चलाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो क्षेत्र में हरियाली लगातार समाप्त होती जाएगी।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बिना अनुमति पेड़ों की कटाई करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए तथा अवैध आरा मशीनों की भी जांच कर उन्हें बंद कराया जाए।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
फिलहाल वन विभाग पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और अवैध कटान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों को अब वन विभाग की कार्रवाई का इंतजार है।
