देहरादून स्थित प्रतिष्ठित सेंट जोसेफ अकादमी

देहरादून स्थित प्रतिष्ठित सेंट जोसेफ अकादमी में आयोजित उत्तराखंड पुलिस के विशेष जागरूकता अभियान ने विद्यार्थियों के भीतर सामाजिक जिम्मेदारी, डिजिटल सुरक्षा और नैतिक मूल्यों के प्रति नई सोच विकसित की। इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं था, बल्कि युवाओं को बदलते डिजिटल दौर की चुनौतियों के प्रति सजग और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करना भी था।
कार्यक्रम में एडीजी डॉ. वी. मुरुगेशन, एएसपी अंकुश मिश्रा तथा एएनटीएफ की एसआई प्रेरणा चौधरी ने छात्रों को संबोधित करते हुए साइबर अपराध, भ्रष्टाचार और नशे जैसी गंभीर सामाजिक समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। अधिकारियों ने युवाओं को बताया कि आधुनिक तकनीक जहाँ अवसर प्रदान करती है, वहीं लापरवाही कई बार बड़े खतरे का कारण भी बन सकती है।
साइबर सुरक्षा पर विशेष जोर
कार्यक्रम के दौरान छात्रों को ऑनलाइन ठगी, फिशिंग लिंक, फर्जी कॉल और डेटा चोरी जैसे साइबर अपराधों से बचने के व्यावहारिक तरीके समझाए गए। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जांचना जरूरी है। साथ ही, सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने में सावधानी बरतने की सलाह भी दी गई। साइबर अपराध से संबंधित शिकायतों के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 की जानकारी देकर छात्रों को तुरंत शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया गया।
भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूकता
एएसपी अंकुश मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि ईमानदारी किसी भी मजबूत समाज की आधारशिला होती है। उन्होंने छात्रों को जीवन में पारदर्शिता और नैतिकता अपनाने की प्रेरणा देते हुए बताया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों के लिए हेल्पलाइन नंबर 1064 की जानकारी भी साझा की गई।
नशा मुक्त समाज का संदेश
एसआई प्रेरणा चौधरी ने युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करते हुए कहा कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार और भविष्य को भी प्रभावित करता है। उन्होंने छात्रों से खेल, योग और सकारात्मक गतिविधियों को अपनाने का आह्वान किया ताकि वे स्वस्थ और अनुशासित जीवन जी सकें।
छात्रों की उत्साहपूर्ण भागीदारी
इस जागरूकता अभियान में 1200 से अधिक विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान छात्रों ने साइबर सुरक्षा, सोशल मीडिया जोखिम और नशा रोकथाम से जुड़े कई व्यावहारिक प्रश्न पूछे। अधिकारियों ने सरल भाषा में उत्तर देकर विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। इससे कार्यक्रम अधिक संवादात्मक और प्रभावशाली बन गया।
सामुदायिक पुलिसिंग की सकारात्मक पहल
यह कार्यक्रम इस बात का उदाहरण बना कि पुलिस की भूमिका केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को शिक्षित और जागरूक बनाना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उत्तराखंड पुलिस की इस पहल ने छात्रों और पुलिस प्रशासन के बीच विश्वास को मजबूत करने का कार्य किया।
निष्कर्ष
देहरादून में आयोजित यह जागरूकता कार्यक्रम युवाओं को डिजिटल सुरक्षा, ईमानदारी और नशा मुक्त जीवन की दिशा में प्रेरित करने वाला प्रभावी प्रयास साबित हुआ। ऐसे अभियानों से न केवल विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ती है, बल्कि समाज में जिम्मेदार नागरिकता की भावना भी मजबूत होती है। उत्तराखंड पुलिस का यह कदम आधुनिक समय की चुनौतियों से निपटने के लिए युवाओं को तैयार करने की दिशा में एक सराहनीय पहल माना जा रहा है।
