मई 25, 2026

प्रतापगढ़ में शैक्षिक अनियमितताओं के खिलाफ अभाविप का प्रदर्शन, 17 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रशासन पर बढ़ा दबाव

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प्रतापगढ़। जनपद में शिक्षा विभाग में व्याप्त कथित शैक्षिक अनियमितताओं, निजी विद्यालयों की मनमानी और छात्रों-अभिभावकों के आर्थिक शोषण के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अभाविप कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री को संबोधित 17 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपते हुए जल्द कार्रवाई की मांग की।

विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो संगठन प्रदेश स्तर पर बड़ा धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करेगा।

री-एडमिशन के नाम पर “उगाही” का आरोप

अभाविप ने आरोप लगाया कि जिले के कई निजी विद्यालयों में री-एडमिशन के नाम पर छात्रों और अभिभावकों से दो से तीन गुना तक फीस वसूली की जा रही है। विद्यालय प्रबंधन मनमाने तरीके से शुल्क बढ़ाकर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहे हैं।

संगठन का कहना है कि हर वर्ष नए सत्र की शुरुआत में अभिभावकों को मजबूरन भारी फीस जमा करनी पड़ती है, जबकि इस पर शिक्षा विभाग द्वारा कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं किया जा रहा। इससे मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है।

एक ही दुकान से ड्रेस और किताबें खरीदने का दबाव

अभाविप कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्कूलों में छात्रों को केवल एक तय दुकान से ही ड्रेस, किताबें और अन्य शैक्षिक सामग्री खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है। इससे अभिभावकों को महंगे दामों पर सामान खरीदना पड़ता है।

विद्यार्थी परिषद ने इसे खुला आर्थिक शोषण बताते हुए मांग की कि विद्यालयों को इस प्रकार की अनिवार्यता लागू करने से रोका जाए और अभिभावकों को अपनी सुविधा के अनुसार बाजार से सामग्री खरीदने की स्वतंत्रता दी जाए।

17 सूत्रीय मांगों के साथ सौंपा गया ज्ञापन

अभाविप द्वारा जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में कुल 17 प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें फीस नियंत्रण, निजी विद्यालयों की मनमानी पर रोक, छात्रों के हितों की सुरक्षा, शिक्षा विभाग में पारदर्शिता, शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार और अभिभावकों के आर्थिक शोषण पर रोक जैसे मुद्दे शामिल थे।

ज्ञापन सौंपते समय जिलाधिकारी द्वारा आश्वासन दिया गया था कि जब भी इस विषय पर प्रशासनिक कोर टीम की बैठक आयोजित होगी, उसमें विद्यार्थी परिषद के चार पदाधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा ताकि छात्र पक्ष की बात सीधे प्रशासन तक पहुंच सके।

बैठक में शामिल न किए जाने से बढ़ी नाराजगी

अभाविप नेताओं के अनुसार शनिवार को इस मुद्दे को लेकर बैठक आयोजित की गई, लेकिन विद्यार्थी परिषद के किसी भी पदाधिकारी को उसमें नहीं बुलाया गया। इससे संगठन के कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि बाद में उनके पीआरओ के पास फोन आया कि जिलाधिकारी महोदय ने सुबह 10 बजे मिलने के लिए बुलाया है। इसके बाद जब परिषद के पदाधिकारी और कार्यकर्ता जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे, तो उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया और बताया गया कि जिलाधिकारी अन्य कार्यों में व्यस्त हैं।

“एक सप्ताह का समय दिया था”

विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन की ओर से प्रशासन को पहले ही एक सप्ताह का समय दिया गया था ताकि छात्रों और अभिभावकों की समस्याओं का समाधान किया जा सके। लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।

अभाविप नेताओं ने कहा कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि परिषद हमेशा छात्र हितों की लड़ाई लड़ती रही है और आगे भी पीछे नहीं हटेगी।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

इस प्रदर्शन ने जिले की शिक्षा व्यवस्था और निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अभाविप का कहना है कि शिक्षा को व्यवसाय बनाकर छात्रों और अभिभावकों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है।

कार्यकर्ताओं ने कहा कि शिक्षा विभाग को निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली पर सख्त निगरानी रखनी चाहिए और फीस, किताब, ड्रेस तथा अन्य व्यवस्थाओं को लेकर स्पष्ट नियम लागू करने चाहिए।

प्रदर्शन में मौजूद रहे कई पदाधिकारी

इस प्रदर्शन में अभाविप के कई प्रमुख पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। मुख्य रूप से शुभम मिश्र, अनिल कुमार, स्वतंत्र पांडेय, दुर्गेश मिश्रा, शशांक सिंह, रोहित उपाध्याय, सुशांत राजपूत तथा शौर्य मिश्रा सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

प्रदेश स्तर के आंदोलन की चेतावनी

अभाविप नेताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि प्रशासन ने जल्द ही छात्रों के हित में प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो संगठन प्रदेश स्तर पर व्यापक धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।

प्रतापगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठी यह आवाज अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि छात्र हितों और निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली को लेकर बड़े आंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है।

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