गिलगित में आज बड़े विरोध प्रदर्शन की तैयारी, आम जनता की समस्याओं पर जोर

गिलगित, पाकिस्तान-अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान: अवामी एक्शन कमेटी (एएसी) ने आज इत्तेहाद चौक पर एक बड़े विरोध रैली का आह्वान किया है। इस प्रदर्शन का उद्देश्य पाकिस्तान-अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान (पीओजीबी) के निवासियों को प्रभावित करने वाले गंभीर मुद्दों को उजागर करना है।
बिजली संकट और बढ़ते टैक्स विरोध का केंद्र
रैली में बिजली संकट, उच्च कराधान, व्यापार पर लगाए गए प्रतिबंध और बढ़ती महंगाई जैसे दीर्घकालिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। खासकर बिजली की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और लंबे समय तक बिजली कटौती ने लोगों का जीवन कठिन बना दिया है।
गिलगित-बाल्टिस्तान के लोग लंबे समय से बिजली दरों में बढ़ोतरी और बिजली आपूर्ति में बार-बार रुकावट की शिकायत कर रहे हैं। इन समस्याओं ने न केवल घरेलू जीवन बल्कि व्यापार और वाणिज्यिक गतिविधियों को भी प्रभावित किया है।
कराकोरम हाइवे पर अवैध टोल टैक्स पर रोष
अवामी एक्शन कमेटी ने कराकोरम हाइवे पर लगाए गए अवैध टोल टैक्स पर भी कड़ा विरोध जताया है। एएसी का कहना है कि यह कर गिलगित-बाल्टिस्तान के निवासियों पर अनुचित वित्तीय बोझ डाल रहा है।
बढ़ती महंगाई और व्यापारिक प्रतिबंध
महंगाई की बढ़ती दर और व्यापार पर लगाए गए प्रतिबंध स्थानीय निवासियों के लिए बड़ी समस्याएं बन गई हैं। एएसी का मानना है कि सरकार द्वारा की जा रही इन नीतियों से आम जनता को असहनीय परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जनता की नाराजगी और मांगें
इस विरोध प्रदर्शन के जरिए एएसी सरकार से मांग कर रही है कि बिजली संकट को तुरंत सुलझाया जाए, बिजली दरों में कटौती की जाए और कराकोरम हाइवे पर लगाए गए अवैध टोल टैक्स को हटाया जाए। साथ ही व्यापारिक प्रतिबंधों को समाप्त कर स्थानीय लोगों को राहत दी जाए।
रैली के लिए बड़े पैमाने पर तैयारी
आज होने वाली रैली में बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों के शामिल होने की उम्मीद है। गिलगित के लोग अपने अधिकारों और समस्याओं को सरकार के समक्ष लाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
निष्कर्ष
गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों की समस्याएं लंबे समय से उपेक्षित रही हैं। अवामी एक्शन कमेटी का यह प्रदर्शन क्षेत्र के निवासियों की समस्याओं को उजागर करने और उनके लिए समाधान मांगने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। अब यह देखना होगा कि इस विरोध के बाद सरकार इन मांगों पर कितना ध्यान देती है।
