मार्च 30, 2026

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पंचायत चुनावों पर लगाई रोक, आरक्षण विवाद बना कारण

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Anoop singh

नैनीताल, 23 जून 2025 – उत्तराखंड में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। नैनीताल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने राज्य में प्रस्तावित पंचायत चुनावों पर आरक्षण विवाद को देखते हुए यह निर्णय लिया है। यह रोक राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा हाल ही में जारी चुनावी अधिसूचना पर लगाई गई है।

राज्य निर्वाचन आयोग ने दो दिन पहले घोषणा की थी कि पंचायत चुनाव दो चरणों में आयोजित किए जाएंगे। पहले चरण के तहत 10 जुलाई और दूसरे चरण के तहत 15 जुलाई को चुनाव होने थे। यह चुनाव हरिद्वार को छोड़कर उत्तराखंड के 12 जिलों में होने थे। आयोग ने यह भी कहा था कि मतगणना 19 जुलाई को कराई जाएगी और उसी दिन परिणामों की घोषणा की जाएगी।

हालांकि, हाईकोर्ट में कई स्थानों से आरक्षण व्यवस्था को लेकर याचिकाएँ दाखिल की गई थीं। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि पंचायत चुनावों के लिए तय की गई आरक्षण नीति में कई अनियमितताएं हैं। पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से इस मामले में विस्तृत जवाब मांगा था, जिसे सरकार ने 23 जून को प्रस्तुत किया।

हाईकोर्ट ने आरक्षण और संबंधित विषयों पर सुनवाई के बाद चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। कोर्ट के अनुसार, जब तक आरक्षण विवाद पूरी तरह से स्पष्ट और समाधानित नहीं हो जाता, तब तक पंचायत चुनाव कराना उचित नहीं होगा।

राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार ने इससे पहले बताया था कि नामांकन प्रक्रिया 25 जून से 28 जून तक चलेगी और पूरे राज्य में आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो गई है। उन्होंने कहा था, “जिला अधिकारी 23 जून को अधिसूचना जारी करेंगे, और नामांकन की प्रक्रिया 25 से 28 जून तक चलेगी।” परंतु अब हाईकोर्ट के निर्णय के बाद यह पूरा कार्यक्रम अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया है।

यह फैसला उत्तराखंड की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक अहम मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ न्यायपालिका ने निष्पक्ष आरक्षण नीति के लिए दखल देते हुए चुनावों पर रोक लगाई है। आगामी दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग इस विवाद को कैसे सुलझाते हैं।


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