फ़रवरी 12, 2026

ईरान के विरुद्ध रणनीति के करीब पहुँचा इज़राइल: प्रधानमंत्री नेतन्याहू का बड़ा बयान

0

Anoop singh

तेल अवीव, 23 जून 2025 — इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को एक अहम बयान देते हुए कहा कि इज़राइल अपने निर्धारित रणनीतिक लक्ष्यों की प्राप्ति के “बहुत करीब” है। उन्होंने यह भी दोहराया कि उनका देश किसी लम्बे और थकाऊ युद्ध में नहीं उलझना चाहता, बल्कि वह एक स्पष्ट, निर्णायक और सीमित सैन्य रणनीति को प्राथमिकता दे रहा है।

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सुरक्षा मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहा,

“हमने जो लक्ष्य तय किए थे — विशेषकर ईरान के सैन्य और परमाणु ढांचे को लेकर — हम उनके काफी नजदीक पहुँच चुके हैं। लेकिन हम युद्ध को लम्बा नहीं खींचना चाहते।”

रणनीतिक संदेश और चेतावनी

नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में इज़राइली वायुसेना ने ईरान के कुछ सैन्य अड्डों और रडार ठिकानों को निशाना बनाया था। इन हमलों को लेकर इज़राइल ने खुलकर कोई विवरण नहीं दिया, लेकिन सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ये कार्रवाई ईरान की परमाणु प्रगति को रोकने के लिए की गई है।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी “युद्ध की ललक” से प्रेरित नहीं है, बल्कि यह एक “सुरक्षा मजबूरी” है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी आह्वान किया कि वह ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने के लिए ठोस दबाव बनाएं।

“थकाऊ युद्ध” से दूरी

“हम न तो किसी थकाऊ युद्ध में पड़ना चाहते हैं और न ही किसी अस्थिरता को बढ़ावा देना चाहते हैं,” नेतन्याहू ने कहा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इज़राइल की सैन्य कार्रवाइयों का उद्देश्य केवल “रणनीतिक प्रतिबंध और प्रतिरोध” है, न कि क्षेत्रीय युद्ध छेड़ना।

क्षेत्रीय प्रतिक्रिया और वैश्विक प्रभाव

ईरान ने अब तक इज़राइल की हालिया कार्रवाइयों पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है, लेकिन तेहरान के उच्च स्तरीय सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार की आक्रामकता का “मुंहतोड़ जवाब” दिया जाएगा।

उधर, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। अमेरिका की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन वाशिंगटन की खामोशी को राजनयिक पर्यवेक्षक “संकेतात्मक समर्थन” के रूप में देख रहे हैं।


निष्कर्ष:
इज़राइल का यह बयान एक स्पष्ट संकेत है कि वह सैन्य दृष्टिकोण से ईरान पर दबाव बनाकर अपने रणनीतिक उद्देश्यों को सीमित समय में पूरा करना चाहता है। ऐसे में आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया में तनाव और अधिक बढ़ सकता है, जिससे वैश्विक राजनीति और तेल बाजार पर भी गहरा असर पड़ने की आशंका है।


प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

इन्हे भी देखें