अप्रैल 1, 2026

त्रिनिडाड और टोबैगो की प्रधानमंत्री को पीएम मोदी का उपहार: महाकुंभ का पवित्र जल और राम मंदिर की प्रतिकृति

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पोर्ट ऑफ स्पेन [त्रिनिडाड और टोबैगो], 4 जुलाई 2025:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने त्रिनिडाड और टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला पसाद-बिस्सेसर को भारतीय सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े अनमोल उपहार भेंट किए। इन उपहारों में संगम और सरयू नदी का पवित्र जल, महाकुंभ से प्राप्त जल और अयोध्या के भव्य राम मंदिर की प्रतिकृति शामिल थी। यह उपहार गुरुवार को स्थानीय समयानुसार भेंट किए गए।

इस ऐतिहासिक अवसर पर पीएम मोदी ने त्रिनिडाड और टोबैगो में बसे भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए बिहार की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने भारतीय प्रवासी समुदाय के साहस और योगदान की सराहना की और प्रधानमंत्री कमला पसाद-बिस्सेसर को “बिहार की बेटी” कहकर संबोधित किया। उन्होंने बताया कि बिस्सेसर के पूर्वज बिहार के बक्सर जिले से संबंधित थे और स्वयं कमला जी ने 2012 में अपने पैतृक गांव भेलुपुर (इटाढ़ी प्रखंड, बक्सर) का दौरा किया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,

“आप सभी जानते हैं कि इस वर्ष महाकुंभ, जो विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक आयोजन है, सम्पन्न हुआ। मुझे गर्व है कि मैं वहां से पवित्र जल लेकर आया हूं। मैं कमला जी से अनुरोध करता हूं कि वे इस जल को सरयू और महाकुंभ के जल के साथ मिलाकर गंगा धारा को अर्पित करें।”

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा त्रिनिडाड और टोबैगो का उनका पहला आधिकारिक दौरा है। स्थानीय समयानुसार गुरुवार को उन्हें त्रिनिडाड के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गार्ड ऑफ ऑनर के साथ सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया।

कमला पसाद-बिस्सेसर ने भारतीय समुदाय के कार्यक्रम में भाग लेते हुए कहा कि भारत से उनका भावनात्मक जुड़ाव अत्यंत गहरा है और बिहार से उनकी पारिवारिक जड़ें उन्हें भारत से जोड़ती हैं। उन्होंने पीएम मोदी को इस विशेष उपहार और सम्मान के लिए धन्यवाद दिया।

यह मुलाकात न केवल भारत और त्रिनिडाड व टोबैगो के बीच सांस्कृतिक संबंधों को प्रगाढ़ बनाती है, बल्कि विश्व मंच पर भारतीय विरासत और आध्यात्मिक परंपराओं की गरिमा को भी उजागर करती है।


लेखक का निष्कर्ष:
पीएम मोदी की यह सांस्कृतिक कूटनीति भारत की परंपराओं को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने की दिशा में एक सशक्त कदम है। महाकुंभ का जल और राम मंदिर की प्रतिकृति केवल उपहार नहीं, बल्कि भारतीय आस्था और मूल्यों के प्रतीक हैं, जो त्रिनिडाड और टोबैगो जैसे देशों में बसे भारतीय मूल के लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम बनते हैं।

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