अप्रैल 7, 2026

भारतीय तटरक्षक बल को मिलेगी नई ताकत: एफपीवी-4 और एफपीवी-7 जहाज निर्माण की शुरुआत

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रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए के लिए नए तेज़ गति वाले गश्ती जहाजों के निर्माण का कार्य औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। यह पहल देश की समुद्री सुरक्षा को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है।

सांकेतिक तस्वीर

6 अप्रैल 2026 को , में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान एफपीवी-4 जहाज की आधारशिला रखी गई, जबकि एफपीवी-7 के लिए प्लेट कटाई प्रक्रिया का शुभारंभ किया गया। यह दोनों कार्यक्रम 14 फास्ट पेट्रोल वेसल (FPV) परियोजना के अंतर्गत आयोजित किए गए।

इन अत्याधुनिक जहाजों को आधुनिक तकनीकों से लैस किया जा रहा है। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस सिस्टम शामिल होगा, जिससे जहाजों की कार्यक्षमता और सुरक्षा में वृद्धि होगी। इसके साथ ही बहुउद्देशीय ड्रोन की सुविधा भी दी जा रही है, जो निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया में मददगार साबित होंगे।

जहाजों में अधिकतम स्वदेशी उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। मैसूर की त्रिवेणी कंपनी द्वारा निर्मित गियर बॉक्स और एमजेपी इंडिया के वाटर जेट जैसे उपकरण इसमें लगाए जाएंगे, जो ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को मजबूती देते हैं।

लगभग 340 टन विस्थापन क्षमता वाले ये जहाज वाटर जेट तकनीक से संचालित होंगे, जिससे ये तेज़ गति से समुद्र में गश्त कर सकेंगे। इनका मुख्य उद्देश्य तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा, समुद्री कानून प्रवर्तन और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

एफपीवी-4 और एफपीवी-7 के निर्माण की यह पहल न केवल भारतीय तटरक्षक बल की क्षमता को बढ़ाएगी, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री उपस्थिति को भी और मजबूत करेगी। यह कदम देश की सुरक्षा और स्वदेशी रक्षा निर्माण को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक सिद्ध होगा।

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