अप्रैल 11, 2026

साइबर ठगी का बढ़ता खतरा: सरकारी अधिकारी बनकर 6 लाख की ठगी

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सांकेतिक तस्वीर

चंडीगढ़ में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ठगों ने खुद को सरकारी अधिकारी बताकर एक व्यक्ति से करीब 6 लाख रुपये ठग लिए। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि डिजिटल युग में साइबर अपराध किस तेजी से बढ़ रहे हैं और लोग किस तरह इनके जाल में फंसते जा रहे हैं।

कैसे हुई ठगी?

मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित व्यक्ति को कुछ दिनों पहले एक कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को एक सरकारी विभाग का अधिकारी बताया। ठगों ने बड़ी चालाकी से पीड़ित को यह विश्वास दिलाया कि उसके दस्तावेजों में कुछ गड़बड़ी है और अगर उसने तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

इसके बाद ठगों ने फर्जी दस्तावेज और ईमेल भेजकर अपनी बात को और विश्वसनीय बना दिया। लगातार फोन कॉल और दबाव बनाकर पीड़ित को मानसिक रूप से भ्रमित किया गया। डर और जल्दबाजी में पीड़ित ने अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 6 लाख रुपये ठगों के खाते में ट्रांसफर कर दिए।

लंबे समय तक चलता रहा धोखा

इस मामले की खास बात यह रही कि ठगों ने एक ही बार में रकम नहीं ली, बल्कि कई दिनों तक लगातार संपर्क में रहकर धीरे-धीरे पैसे निकलवाए। इस दौरान वे अलग-अलग बहाने बनाते रहे, जैसे—जुर्माना, प्रोसेसिंग फीस, या वेरिफिकेशन चार्ज।

पुलिस की कार्रवाई

घटना का पता चलने के बाद पीड़ित ने तुरंत साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और ठगों की पहचान करने के लिए कॉल डिटेल्स, बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

कैसे बचें ऐसी ठगी से?

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की ठगी से बचने के लिए लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए:

  • किसी भी अनजान कॉल पर अपनी व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
  • सरकारी अधिकारी बनकर कॉल करने वालों की पहचान की पुष्टि जरूर करें।
  • डर या दबाव में आकर तुरंत पैसे ट्रांसफर न करें।
  • किसी भी संदिग्ध लिंक या ईमेल पर क्लिक करने से बचें।
  • ठगी की आशंका होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।

निष्कर्ष

चंडीगढ़ में सामने आया यह मामला साइबर अपराधियों की बढ़ती चालाकी और लोगों की जागरूकता की कमी को उजागर करता है। जरूरत है कि हर व्यक्ति सतर्क रहे और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना संबंधित अधिकारियों को दे, ताकि ऐसे अपराधों पर लगाम लगाई जा सके।

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