जुलाई 14, 2026

देशभर में डीआरआई का बड़ा अभियान: वन्यजीव तस्करी के अंतरराज्यीय नेटवर्क ध्वस्त, 440 से अधिक संरक्षित जीव बचाए गए, 33 आरोपी गिरफ्तार

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नई दिल्ली: देश में वन्यजीव अपराधों पर लगाम लगाने की दिशा में राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने एक व्यापक अभियान चलाकर बड़ी सफलता हासिल की है। विभिन्न केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के सहयोग से संचालित इस समन्वित कार्रवाई में कई राज्यों में सक्रिय वन्यजीव तस्करी के अंतरराज्यीय गिरोहों का पर्दाफोड़ किया गया। अभियान के दौरान 440 से अधिक संकटग्रस्त और संरक्षित वन्यजीवों को सुरक्षित मुक्त कराया गया, जबकि करीब 15 किलोग्राम हाथीदांत और हाथीदांत से निर्मित वस्तुएं जब्त की गईं। इस कार्रवाई में 33 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

कई राज्यों में एक साथ चला विशेष अभियान

डीआरआई ने पूर्व से प्राप्त खुफिया सूचनाओं के आधार पर कई राज्यों में एक साथ छापेमारी की। जांच में पता चला कि तस्करी से जुड़े नेटवर्क दुर्लभ वन्यजीवों, पक्षियों, सरीसृपों और प्रतिबंधित वन्यजीव उत्पादों की अवैध खरीद-बिक्री में शामिल थे। अधिकारियों ने समयबद्ध कार्रवाई करते हुए बड़ी संख्या में जीवों को सुरक्षित बरामद किया और उन्हें वन विभाग तथा अधिकृत संरक्षण केंद्रों की देखरेख में भेज दिया।

संगठित तस्करी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि गिरफ्तार आरोपी संगठित नेटवर्क के माध्यम से विभिन्न राज्यों में वन्यजीवों की तस्करी कर रहे थे। एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की वित्तीय गतिविधियों, संपर्कों और संभावित अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की भी जांच कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई से वन्यजीव तस्करी से जुड़े बड़े गिरोहों की गतिविधियों पर प्रभाव पड़ेगा।

हाथीदांत की तस्करी पर भी बड़ी चोट

अभियान के दौरान लगभग 15 किलोग्राम हाथीदांत और उससे बने सजावटी एवं अन्य उत्पाद बरामद किए गए। हाथीदांत का अवैध कारोबार दुनिया भर में वन्यजीव अपराधों का एक गंभीर स्वरूप माना जाता है, क्योंकि इसके लिए हाथियों का शिकार किया जाता है। इस जब्ती को हाथियों के संरक्षण और अवैध वन्यजीव व्यापार पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

आधुनिक तकनीक और खुफिया तंत्र की अहम भूमिका

डीआरआई ने इस अभियान में खुफिया जानकारी, डिजिटल विश्लेषण, निगरानी तंत्र और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय का प्रभावी उपयोग किया। समय पर मिली सूचनाओं और तकनीकी सहायता के कारण तस्करों की गतिविधियों का पता लगाया गया और एक साथ कई स्थानों पर सफल कार्रवाई संभव हो सकी। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि आधुनिक तकनीक वन्यजीव अपराधों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

जैव विविधता की रक्षा के लिए सख्त संदेश

विशेषज्ञों का मानना है कि वन्यजीवों की अवैध तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि पर्यावरण और जैव विविधता के लिए भी गंभीर खतरा है। दुर्लभ प्रजातियों की लगातार तस्करी से पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन प्रभावित होता है। ऐसे में इस तरह की कार्रवाई न केवल अपराधियों के खिलाफ सख्त संदेश देती है, बल्कि प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करती है।

आगे भी जारी रहेगा अभियान

डीआरआई और अन्य संबंधित एजेंसियों ने संकेत दिए हैं कि वन्यजीव तस्करी के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। जांच एजेंसियां गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही हैं ताकि इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों तक भी पहुंचा जा सके। साथ ही आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि यदि कहीं वन्यजीवों या वन्यजीव उत्पादों की संदिग्ध खरीद-बिक्री की जानकारी मिले तो तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।

निष्कर्ष

डीआरआई की यह कार्रवाई भारत में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। 440 से अधिक संरक्षित जीवों का सुरक्षित बचाव, 15 किलोग्राम हाथीदांत की जब्ती और 33 आरोपियों की गिरफ्तारी यह दर्शाती है कि वन्यजीव तस्करी के खिलाफ कानून प्रवर्तन एजेंसियां पूरी सतर्कता और समन्वय के साथ काम कर रही हैं। इस अभियान से न केवल संगठित अपराधियों पर दबाव बढ़ेगा, बल्कि देश की जैव विविधता और वन्यजीव संपदा की सुरक्षा को भी नई मजबूती मिलेगी।

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