15वाँ ब्रिक्स ट्रेड यूनियन फोरम शिखर सम्मेलन: मज़दूर कल्याण, नवाचार और वैश्विक सहयोग की दिशा में भारत का सशक्त संदेश

हैदराबाद: भारत ने 15वें ब्रिक्स ट्रेड यूनियन फोरम शिखर सम्मेलन की मेज़बानी कर श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा और टिकाऊ विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने किया। इस दौरान ब्रिक्स देशों के श्रमिक संगठनों, नीति-निर्माताओं और प्रतिनिधियों ने बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में श्रमिकों के हितों की रक्षा और नए अवसरों पर व्यापक चर्चा की।
भारत की अध्यक्षता का प्रमुख विषय
सम्मेलन में भारत ने अपनी अध्यक्षता का केंद्रीय विषय “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के निर्माण” (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) रखा। इस विषय का उद्देश्य ऐसी कार्य-व्यवस्था विकसित करना है, जो भविष्य की आर्थिक और तकनीकी चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो तथा श्रमिकों के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करे।
श्रमिकों के लिए समावेशी विकास पर बल
अपने संबोधन में डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि किसी भी देश की आर्थिक प्रगति तभी सार्थक मानी जा सकती है, जब उसका लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर श्रमिकों तक पहुँचे। उन्होंने कहा कि कौशल विकास, सुरक्षित कार्यस्थल, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक रोजगार आधुनिक श्रम व्यवस्था के चार महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि डिजिटल अर्थव्यवस्था और नई तकनीकों के विस्तार के साथ श्रमिकों को नए कौशल प्रदान करना समय की आवश्यकता है, ताकि वे बदलते रोजगार बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रह सकें।
ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग की आवश्यकता
सम्मेलन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच श्रम नीति, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार सृजन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत किया जाए। प्रतिनिधियों ने अनुभव साझा करते हुए इस बात पर सहमति व्यक्त की कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने के लिए साझा रणनीति और निरंतर संवाद आवश्यक है।
तकनीक और श्रम के बीच संतुलन
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वचालन और डिजिटल तकनीकों के बढ़ते उपयोग के बीच यह चर्चा भी हुई कि तकनीकी प्रगति के साथ श्रमिकों के अधिकारों और रोजगार सुरक्षा का संतुलन बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि नई तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ श्रमिकों के पुनः कौशल प्रशिक्षण (Reskilling) और कौशल उन्नयन (Upskilling) पर विशेष निवेश किया जाना चाहिए।
सामाजिक सुरक्षा को मिली प्राथमिकता
सम्मेलन में श्रमिकों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली विकसित करने पर भी विचार-विमर्श हुआ। इसमें असंगठित क्षेत्र के कामगारों, महिला श्रमिकों, प्रवासी श्रमिकों और गिग एवं प्लेटफ़ॉर्म अर्थव्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों के लिए बेहतर सुरक्षा और कल्याणकारी उपायों की आवश्यकता पर बल दिया गया।
भारत की श्रम सुधार पहलों की प्रस्तुति
भारत ने सम्मेलन के दौरान श्रम सुधार, डिजिटल सेवाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों और श्रमिक-केंद्रित नीतियों से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए। इन पहलों का उद्देश्य रोजगार के अवसर बढ़ाना, श्रम कानूनों को अधिक प्रभावी बनाना तथा श्रमिकों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना है।
निष्कर्ष
15वाँ ब्रिक्स ट्रेड यूनियन फोरम शिखर सम्मेलन केवल एक अंतरराष्ट्रीय बैठक नहीं, बल्कि श्रमिकों के बेहतर भविष्य के लिए साझा दृष्टिकोण तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। हैदराबाद में आयोजित इस सम्मेलन ने स्पष्ट किया कि बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में नवाचार, सहयोग, सामाजिक सुरक्षा और सतत विकास के माध्यम से ही श्रमिकों के हितों की प्रभावी रक्षा की जा सकती है। भारत ने अपनी अध्यक्षता के माध्यम से यह संदेश दिया कि आर्थिक विकास का वास्तविक आधार वही समाज है, जहाँ श्रमिक सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त हों।