जिनेवा में भारत की बड़ी सफलता: Codex आयोग ने अपनाए सात नए खाद्य मानक, काजू के वैश्विक मानक को भी मिली मंजूरी

नई दिल्ली: वैश्विक खाद्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के क्षेत्र में भारत ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जिनेवा में आयोजित Codex Alimentarius Commission के 49वें सत्र में भारत की सक्रिय भागीदारी के परिणामस्वरूप सात नए खाद्य मानकों और दिशा-निर्देशों को स्वीकृति मिली। इनमें सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि काजू के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक तैयार करने के भारतीय प्रस्ताव को मंजूरी मिलना है। यह कदम भारतीय कृषि और खाद्य उत्पादों के वैश्विक व्यापार को नई मजबूती प्रदान करेगा।
वैश्विक खाद्य मानकों में बढ़ा भारत का प्रभाव
इस सत्र में भारत ने केवल अपनी बात प्रभावी ढंग से नहीं रखी, बल्कि कई ऐसे मानकों को अपनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिनका सीधा संबंध खाद्य गुणवत्ता, उपभोक्ता सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत अब वैश्विक खाद्य नीति निर्माण में सक्रिय और प्रभावशाली भागीदार बन चुका है।
धनिया बीज के लिए मिला अंतरराष्ट्रीय मानक
आयोग ने सूखे धनिया बीजों के लिए नया Codex मानक स्वीकार किया। धनिया दुनिया के सबसे अधिक उपयोग और व्यापार किए जाने वाले मसालों में शामिल है। नए मानक के लागू होने से विभिन्न देशों में गुणवत्ता संबंधी एकरूपता आएगी और व्यापारिक प्रक्रियाएँ अधिक सरल एवं पारदर्शी बनेंगी।
पहली बार तय हुआ करी पत्ते का वैश्विक मानक
ताजे करी पत्तों के लिए पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुणवत्ता मानक निर्धारित किए गए हैं। दक्षिण एशियाई व्यंजनों में व्यापक रूप से उपयोग होने वाले करी पत्ते के लिए यह फैसला निर्यातकों और किसानों दोनों के लिए लाभकारी माना जा रहा है।
वनीला और बड़ी इलायची के लिए गुणवत्ता मानक
वनीला और बड़ी इलायची जैसे महत्वपूर्ण मसालों के लिए भी नए गुणवत्ता मानक अपनाए गए। इससे वैश्विक बाजार में उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी, व्यापार में पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत होगा।
खाद्य उत्पादन में सुरक्षित जल उपयोग को बढ़ावा
आयोग ने खाद्य उत्पादन के दौरान पानी के सुरक्षित उपयोग और पुनः उपयोग के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश भी स्वीकार किए। यह निर्णय जल संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और सुरक्षित खाद्य उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुर्गी मांस की सुरक्षा के लिए नए दिशा-निर्देश
खाद्यजनित बीमारियों को कम करने के उद्देश्य से Campylobacter और Salmonella जैसे हानिकारक बैक्टीरिया के नियंत्रण के लिए नए सुरक्षा मानक तय किए गए। इससे पोल्ट्री उत्पादों की गुणवत्ता और उपभोक्ता सुरक्षा में सुधार होने की उम्मीद है।
पैकेजिंग और लेबलिंग के नियम हुए स्पष्ट
संयुक्त पैकेजिंग और मल्टीपैक उत्पादों की लेबलिंग के लिए भी नए नियम बनाए गए हैं। इन नियमों से उपभोक्ताओं को उत्पादों की सही और स्पष्ट जानकारी मिलेगी तथा बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी।
काजू के लिए भारत के प्रस्ताव को मिली मंजूरी
इस सत्र की सबसे बड़ी उपलब्धि काजू के लिए वैश्विक Codex मानक विकसित करने के भारतीय प्रस्ताव का अनुमोदन रहा। इस मानक के लागू होने के बाद काजू की गुणवत्ता और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताएँ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक समान होंगी। इससे भारतीय काजू निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और तकनीकी व्यापार बाधाओं को कम करने में सहायता मिलेगी।
भारत की सक्रिय भूमिका
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजित पुनहानी ने किया। FSSAI और स्पाइसेस बोर्ड के विशेषज्ञों ने तकनीकी स्तर पर सक्रिय योगदान देकर भारत के प्रस्तावों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
भारत बना वैश्विक मानक निर्धारण में प्रभावशाली भागीदार
यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत अब केवल अंतरराष्ट्रीय खाद्य नियमों का पालन करने वाला देश नहीं है, बल्कि वैश्विक मानकों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विज्ञान-आधारित नीतियों, गुणवत्ता सुधार और खाद्य सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है।
निष्कर्ष
जिनेवा में Codex Alimentarius Commission के 49वें सत्र में मिली यह सफलता भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। नए खाद्य मानकों से भारतीय मसालों, काजू और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, वैश्विक बाजार में उनकी स्वीकार्यता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को अधिक सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद उपलब्ध होंगे। यह उपलब्धि भारत की बढ़ती वैश्विक नेतृत्व क्षमता और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में उसकी मजबूत भूमिका का स्पष्ट प्रमाण है।