जुलाई 19, 2026

“लखनऊ बना इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड का अड्डा! लग्जरी अपार्टमेंट से अमेरिकी नागरिकों को करोड़ों की चपत, पुलिस के छापे में बड़ा खुलासा”

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। 18 जुलाई 2026 को पुलिस ने एक लग्जरी अपार्टमेंट में चल रहे हाई-टेक फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश करते हुए अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया। यह गिरोह अमेरिकी नागरिकों को फर्जी टेक्निकल सपोर्ट और टैक्स रिफंड के नाम पर अपना शिकार बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दे रहा था।

इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि साइबर अपराधी अब अत्याधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का इस्तेमाल कर विदेशी नागरिकों को निशाना बना रहे हैं।


🚨 कैसे करता था यह गिरोह ठगी?

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी एक आलीशान अपार्टमेंट से कॉल सेंटर संचालित कर रहे थे। यहां से अमेरिकी नागरिकों को फोन कर खुद को सरकारी एजेंसी या टेक्निकल सपोर्ट कंपनी का प्रतिनिधि बताया जाता था।

ठग लोगों को यह विश्वास दिलाते थे कि—

  • उनके टैक्स रिफंड का भुगतान लंबित है।
  • उनके कंप्यूटर या बैंक खाते में सुरक्षा संबंधी समस्या है।
  • तुरंत भुगतान या बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करने पर उन्हें आर्थिक नुकसान हो सकता है।

डर और लालच का फायदा उठाकर आरोपी विदेशी नागरिकों से बड़ी रकम ऐंठ लेते थे।


💻 पुलिस के छापे में क्या-क्या मिला?

छापेमारी के दौरान पुलिस ने कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज बरामद किए हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • हाई-परफॉर्मेंस लैपटॉप
  • सर्वर और डिजिटल स्टोरेज डिवाइस
  • VOIP (Voice Over Internet Protocol) कॉलिंग सिस्टम
  • विदेशी बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज
  • डिजिटल लेनदेन से संबंधित कई रिकॉर्ड

बरामद सामग्री से अंदेशा है कि यह गिरोह लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय था।


👮 कई आरोपी गिरफ्तार, मास्टरमाइंड भी हिरासत में

पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान कई युवक और युवतियों को हिरासत में लिया है। शुरुआती जांच में गिरोह के मास्टरमाइंड की भी पहचान होने की जानकारी सामने आई है। सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।


🌍 अमेरिका और दुबई से जुड़े मिले तार

जांच एजेंसियों को इस साइबर रैकेट के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के संकेत मिले हैं। प्रारंभिक जांच के अनुसार, गिरोह के संपर्क अमेरिका और दुबई तक फैले हुए थे। यह भी पता लगाया जा रहा है कि ठगी से प्राप्त धनराशि को किन माध्यमों से विदेशों में ट्रांसफर किया जाता था।


⚖️ किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?

आरोपियों के खिलाफ निम्न कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है—

  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की संबंधित धाराएं।
  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़े प्रावधान।
  • वित्तीय अपराधों और मनी ट्रेल की जांच के लिए अन्य कानूनी पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

🔍 कई एजेंसियां कर रही हैं संयुक्त जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए कई एजेंसियां जांच में जुट गई हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • स्थानीय पुलिस
  • साइबर सेल
  • प्रवर्तन निदेशालय (ED)
  • वित्तीय और डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में लगी हैं कि इस गिरोह ने अब तक कितने विदेशी नागरिकों को अपना शिकार बनाया और ठगी की कुल रकम कितनी है।


⚠️ साइबर अपराध का बदलता चेहरा

यह घटना इस बात का संकेत है कि साइबर अपराध अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रह गए हैं। अपराधी अत्याधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का इस्तेमाल कर सीमाओं के पार अपराध को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे मामलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम होना समय की मांग बन गया है।


निष्कर्ष

लखनऊ में सामने आया यह साइबर ठगी रैकेट देश के लिए एक गंभीर चेतावनी है। लग्जरी अपार्टमेंट से संचालित इस फर्जी कॉल सेंटर ने यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित तरीके से काम कर रहे हैं। पुलिस और जांच एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई से एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

साइबर अपराध के खिलाफ सतर्कता और तकनीकी जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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