खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता की ओर भारत का बड़ा कदम: राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन से तिलहन उत्पादन बढ़ाने की नई रणनीति

नई दिल्ली, 5 अगस्त 2026। भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद्य तेल उपभोक्ता देशों में शामिल है, लेकिन घरेलू उत्पादन और बढ़ती मांग के बीच लंबे समय से बड़ा अंतर बना हुआ है। इस कमी को पूरा करने के लिए देश को हर वर्ष बड़ी मात्रा में खाद्य तेल का आयात करना पड़ता है। आयात पर निर्भरता कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 3 अक्टूबर 2024 को राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन–तिलहन (National Mission on Edible Oil–Oilseeds : NMEO-Oilseeds) को मंजूरी दी।
इस मिशन का प्रमुख लक्ष्य वर्ष 2022-23 में 3.9 करोड़ टन (39 मिलियन टन) रहे प्राथमिक तिलहन उत्पादन को वर्ष 2030-31 तक बढ़ाकर 6.97 करोड़ टन (69.7 मिलियन टन) करना है। सरकार का मानना है कि इस पहल से खाद्य तेलों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।
भारत में तिलहन उत्पादन की वर्तमान स्थिति
भारत में सरसों, सोयाबीन, मूंगफली, सूरजमुखी, तिल, अलसी, कुसुम और अन्य तिलहनी फसलें बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं। इसके बावजूद देश की घरेलू मांग इतनी अधिक है कि खाद्य तेलों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करना पड़ता है।
आयात पर अधिक निर्भरता का प्रभाव देश के विदेशी मुद्रा भंडार, खाद्य तेलों की कीमतों और किसानों की आय पर भी पड़ता है। इसी कारण घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन का उद्देश्य
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य तिलहन उत्पादन बढ़ाना, किसानों को बेहतर तकनीक उपलब्ध कराना, उन्नत बीजों का उपयोग बढ़ाना और खाद्य तेलों के क्षेत्र में भारत को अधिक आत्मनिर्भर बनाना है।
इसके साथ ही उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करने और किसानों को बेहतर आर्थिक अवसर उपलब्ध कराने का भी लक्ष्य रखा गया है।
किसानों को कैसे मिलेगा लाभ?
यदि मिशन का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो किसानों को उन्नत बीज, आधुनिक कृषि तकनीक, वैज्ञानिक सलाह, बेहतर सिंचाई व्यवस्था और कृषि विस्तार सेवाओं का लाभ मिल सकता है।
उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों की आय में वृद्धि की संभावना भी बढ़ेगी। तिलहन फसलों की बेहतर उत्पादकता से कृषि क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित हो सकती हैं।
आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगा बल
आत्मनिर्भर भारत अभियान का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में देश की आयात निर्भरता कम करना है। खाद्य तेल ऐसा क्षेत्र है जहां भारत अभी भी बड़ी मात्रा में आयात करता है।
यदि घरेलू उत्पादन बढ़ता है तो न केवल आयात बिल कम होगा, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी। इससे वैश्विक बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर भी अपेक्षाकृत कम हो सकता है।
आधुनिक तकनीक की होगी महत्वपूर्ण भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल खेती का क्षेत्र बढ़ाने से लक्ष्य हासिल नहीं होगा। इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाले बीज, बेहतर सिंचाई, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग, कीट नियंत्रण और आधुनिक कृषि तकनीकों का व्यापक उपयोग आवश्यक होगा।
ड्रोन, डिजिटल कृषि, मौसम पूर्वानुमान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी तकनीकें भी किसानों को बेहतर निर्णय लेने में सहायता कर सकती हैं।
अनुसंधान और नवाचार पर जोर
तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि अनुसंधान संस्थानों और वैज्ञानिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। नई जलवायु-अनुकूल किस्मों का विकास, रोग प्रतिरोधी बीज और अधिक उत्पादक फसलें किसानों के लिए लाभदायक साबित हो सकती हैं।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) तथा कृषि विश्वविद्यालय इस दिशा में लगातार अनुसंधान कर रहे हैं।
राज्यों की भागीदारी आवश्यक
भारत के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तिलहनी फसलें उगाई जाती हैं। इसलिए प्रत्येक राज्य की जलवायु, मिट्टी और कृषि परिस्थितियों के अनुसार रणनीति तैयार करना आवश्यक होगा।
केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय इस मिशन की सफलता का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।
चुनौतियां भी कम नहीं
विशेषज्ञों के अनुसार उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों को उचित बाजार, भंडारण, प्रसंस्करण और मूल्य समर्थन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध करानी होंगी। यदि उत्पादन बढ़े लेकिन किसानों को उचित मूल्य न मिले, तो मिशन के अपेक्षित परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।
जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा और प्राकृतिक आपदाएं भी तिलहन उत्पादन के सामने महत्वपूर्ण चुनौतियां बनी हुई हैं।
खाद्य तेल क्षेत्र में दीर्घकालिक प्रभाव
यदि मिशन अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल रहता है, तो भारत खाद्य तेलों के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बन सकता है। इससे आयात खर्च में कमी, किसानों की आय में वृद्धि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती और कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ने जैसी सकारात्मक संभावनाएं उत्पन्न हो सकती हैं।
इसके साथ ही खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और तेल मिलों को भी पर्याप्त घरेलू कच्चा माल उपलब्ध होने की संभावना बढ़ेगी।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन–तिलहन (NMEO-Oilseeds) भारत को खाद्य तेलों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। वर्ष 2030-31 तक तिलहन उत्पादन को 3.9 करोड़ टन से बढ़ाकर 6.97 करोड़ टन करने का लक्ष्य महत्वाकांक्षी होने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ा अवसर भी है।
यदि उन्नत तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज, वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रभावी नीति, राज्यों का सहयोग और किसानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाती है, तो यह मिशन न केवल खाद्य तेलों के आयात को कम करने में मदद करेगा, बल्कि भारतीय किसानों की आय बढ़ाने, कृषि क्षेत्र को मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।