चित्रकूट-बांदा में अवैध पान मसाला नेटवर्क का खुलासा, 185 करोड़ की कर चोरी का दावा; संचालक गिरफ्तार

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चित्रकूट/बांदा। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट और बांदा जिलों में पान मसाला, सुगंधित जर्दा और गुटखा के कथित अवैध उत्पादन से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का DGGI ने खुलासा किया है। वस्तु एवं सेवा कर खुफिया महानिदेशालय (DGGI) की लखनऊ जोनल यूनिट ने दोनों जिलों में छह ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। जांच के दौरान अधिकारियों को बड़ी संख्या में ऐसी मशीनें मिलीं, जिनका संबंधित अधिकारियों के समक्ष कथित तौर पर खुलासा नहीं किया गया था। कार्रवाई में लाखों तैयार पाउच और भारी मात्रा में कच्चा व पैकेजिंग माल भी बरामद किया गया।

DGGI के अनुसार, प्रारंभिक जांच में GST, HSNS Cess और केंद्रीय उत्पाद शुल्क समेत करीब 185 करोड़ रुपये की कर एवं शुल्क चोरी का पता चला है। मामले में निर्माण इकाई के संचालक को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी को अदालत में पेश किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। एजेंसी की जांच अभी जारी है और आगे भी दस्तावेजों, तैयार माल तथा अन्य साक्ष्यों की बरामदगी की संभावना जताई गई है।

आधी रात शुरू हुई छह ठिकानों पर कार्रवाई

जानकारी के मुताबिक DGGI की टीम ने विशेष खुफिया सूचना के आधार पर 18 अगस्त 2026 की आधी रात के आसपास चित्रकूट और बांदा में छह परिसरों पर समन्वित तलाशी अभियान शुरू किया। ये परिसर दो फर्मों से जुड़े बताए गए हैं। इनमें से एक फर्म का संबंध पान मसाला और उससे जुड़े उत्पादों के निर्माण से, जबकि दूसरी फर्म का संबंध व्यापारिक गतिविधियों से बताया गया है।

तलाशी के दौरान अधिकारियों को ऐसे उत्पादन केंद्र मिले, जहां कथित तौर पर बिना घोषित मशीनरी के जरिए पान मसाला और तंबाकू उत्पादों की पैकिंग की जा रही थी। जांच एजेंसी ने इस व्यवस्था को सामान्य पंजीकृत उत्पादन व्यवस्था से अलग और छिपे हुए उत्पादन नेटवर्क के तौर पर देखा है।

27 पैकिंग मशीनें मिलीं

कार्रवाई की सबसे महत्वपूर्ण बरामदगी 27 पाउच-पैकिंग मशीनों की रही। अधिकारियों के अनुसार इनमें छह मशीनें सुगंधित जर्दा, नौ मशीनें पान मसाला और 12 मशीनें दोहरा/देसी गुटखा उत्पादों की पैकिंग से संबंधित थीं। इसके अलावा सुपारी को मिलाने, पीसने और सुखाने में इस्तेमाल होने वाली मशीनें भी मिलीं।

इतनी बड़ी संख्या में मशीनों की बरामदगी से जांच एजेंसी को यह संकेत मिला कि संबंधित परिसरों में उत्पादन गतिविधियां छोटे स्तर तक सीमित नहीं थीं। हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

15.50 लाख से अधिक तैयार पाउच बरामद

तलाशी अभियान के दौरान अधिकारियों ने 15,50,922 तैयार पाउच जब्त किए। इनमें पान मसाला, चबाने वाला तंबाकू, सुगंधित जर्दा और सुगंधित सुपारी से जुड़े उत्पाद शामिल बताए गए हैं।

इसके साथ ही बड़ी मात्रा में कच्चा माल और पैकेजिंग सामग्री भी बरामद हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 32.9 मीट्रिक टन सुपारी, 2.8 मीट्रिक टन तंबाकू और 8.4 मीट्रिक टन पैकेजिंग सामग्री जब्त की गई। इसके अलावा कत्था पाउडर, ग्लिसरीन, एसेंस और बिना पैक किया हुआ पान मसाला भी मिला।

बिना घोषित उत्पादन पर जांच का फोकस

DGGI की जांच का मुख्य बिंदु कथित तौर पर ऐसा उत्पादन है, जिसकी जानकारी कर अधिकारियों को नहीं दी गई थी। एजेंसी के मुताबिक, तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों, मशीनरी, तैयार उत्पाद और कच्चे माल से उत्पादन तथा उसकी आपूर्ति से संबंधित गतिविधियों की जांच की जा रही है।

प्रारंभिक जांच में यह आरोप सामने आया है कि उत्पादों को आवश्यक कर और शुल्क का भुगतान किए बिना बाजार में भेजा जाता था। इसी आधार पर GST के साथ अन्य लागू शुल्कों में कथित अनियमितता की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने अब उत्पादन की वास्तविक मात्रा, बिक्री, आपूर्ति श्रृंखला और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन का विस्तृत मिलान शुरू किया है।

185 करोड़ रुपये की कर चोरी का आंकड़ा

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा आंकड़ा करीब 185 करोड़ रुपये की कथित कर और शुल्क चोरी का है। DGGI ने बताया कि अब तक की जांच में GST, Health Security and National Security (HSNS) Cess और केंद्रीय उत्पाद शुल्क से संबंधित इतनी राशि की देनदारी सामने आई है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह आंकड़ा जांच एजेंसी द्वारा अब तक की जांच के आधार पर सामने आया है। जांच आगे बढ़ने के साथ राशि में बदलाव हो सकता है। अंतिम कर देनदारी और कानूनी स्थिति संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

संचालक गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजा गया

DGGI के मुताबिक, निर्माण फर्म के संचालक की भूमिका कथित गुप्त उत्पादन और तैयार माल की निकासी से जुड़ी पाई गई। इसके बाद उसे 19 अगस्त 2026 को संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया। आरोपी को लखनऊ स्थित विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (कस्टम्स) की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

एजेंसी ने संकेत दिया है कि मामले में अभी कई पहलुओं की जांच बाकी है। विशेष रूप से यह पता लगाया जा रहा है कि तैयार उत्पाद कहां-कहां भेजे जाते थे, किन लोगों या कारोबारियों से नेटवर्क जुड़ा था और कथित तौर पर कितने समय से यह गतिविधि चल रही थी।

देशभर में चल रही है कार्रवाई

चित्रकूट-बांदा की कार्रवाई को पान मसाला और तंबाकू क्षेत्र में कर चोरी के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान से भी जोड़कर देखा जा रहा है। DGGI के अनुसार, 1 फरवरी 2026 से देशभर में ऐसे मामलों में कार्रवाई तेज हुई है। विभिन्न DGGI इकाइयों ने अब तक 27 मामले दर्ज किए हैं, जिनमें करीब 668 करोड़ रुपये की ड्यूटी, टैक्स और सेस चोरी का पता लगाया गया है। इन कार्रवाइयों में 131 पाउच-पैकिंग मशीनें जब्त और 17 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी भी दी गई है।

कारोबारियों के लिए बढ़ी निगरानी

चित्रकूट और बांदा में हुई कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि कर विभाग अब केवल कागजी रिकॉर्ड के आधार पर ही नहीं, बल्कि उत्पादन क्षमता, मशीनरी और वास्तविक कारोबार के बीच अंतर को भी जांच का हिस्सा बना रहा है। पान मसाला और तंबाकू उत्पादों के क्षेत्र में मशीनों की संख्या और उत्पादन क्षमता जैसे पहलुओं का महत्व बढ़ गया है।

ऐसे में कारोबारियों के लिए उत्पादन, मशीनरी, स्टॉक, बिक्री और कर भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड को नियमानुसार रखना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। किसी भी तरह की कथित कर चोरी सामने आने पर संबंधित कानूनों के तहत जांच और कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

जांच अभी जारी

चित्रकूट-बांदा में DGGI की यह कार्रवाई फिलहाल प्रारंभिक जांच के चरण में है। छह ठिकानों से बरामद मशीनें, लाखों पाउच, कच्चा माल और दस्तावेज जांच के महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं। करीब 185 करोड़ रुपये की कथित कर चोरी का मामला सामने आने के बाद अब जांच एजेंसी उत्पादन और आपूर्ति के पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

आने वाले दिनों में जांच से जुड़े और नाम, दस्तावेज तथा वित्तीय विवरण सामने आने की संभावना है। फिलहाल इस कार्रवाई ने चित्रकूट-बांदा क्षेत्र में कथित अवैध पान मसाला और तंबाकू उत्पादन के नेटवर्क को लेकर प्रशासनिक और कर विभाग की निगरानी को और तेज कर दिया है।

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