चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कुछ सर्दी-जुकाम की FDC दवाओं पर रोक, सरकार का बड़ा फैसला

नई दिल्ली। बच्चों के स्वास्थ्य और दवा सुरक्षा को लेकर भारत सरकार ने 22 अगस्त 2026 को एक महत्वपूर्ण नियामकीय कदम उठाया है। सरकार ने चार वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए क्लोरफेनिरामाइन मेलिएट और फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड वाले फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। यह फैसला विशेषज्ञ समिति और ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है।
इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य छोटे बच्चों को ऐसी दवाओं के संभावित जोखिमों से बचाना है, जिनका इस्तेमाल सामान्यतः सर्दी, नाक बहने, छींक और नाक बंद होने जैसी समस्याओं में किया जाता है। सरकार का संदेश स्पष्ट है कि कम उम्र के बच्चों में दवाओं का इस्तेमाल विशेष सावधानी और चिकित्सकीय सलाह के साथ किया जाना चाहिए।
क्या है सरकार का नया फैसला?
सरकारी निर्णय के तहत उन सभी फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन दवाओं पर रोक लागू की गई है, जिनमें क्लोरफेनिरामाइन मेलिएट और फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड दोनों सक्रिय घटक मौजूद हैं और जिन्हें चार वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
FDC ऐसी दवा होती है जिसमें दो या उससे अधिक सक्रिय औषधीय घटकों को एक ही दवा में निश्चित अनुपात में मिलाया जाता है। इसका उद्देश्य कई लक्षणों या स्थितियों को एक साथ नियंत्रित करना हो सकता है। हालांकि, छोटे बच्चों के मामले में अलग-अलग दवाओं की आवश्यकता, मात्रा और उनके शरीर पर प्रभाव को लेकर अतिरिक्त सावधानी जरूरी होती है।
सरकार ने Drugs and Cosmetics Act, 1940 की धारा 26A के तहत यह नियामकीय कार्रवाई की है। संबंधित दवा निर्माताओं को पैकेजिंग, लेबल और प्रचार सामग्री में स्पष्ट चेतावनी देने का निर्देश भी दिया गया है कि यह FDC चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
क्लोरफेनिरामाइन और फिनाइलएफ्रिन क्या हैं?
क्लोरफेनिरामाइन मेलिएट एक एंटीहिस्टामिन दवा घटक है। इसका उपयोग एलर्जी से जुड़े लक्षणों, जैसे छींक आने, नाक बहने और कुछ अन्य एलर्जिक प्रतिक्रियाओं को कम करने के लिए किया जाता है।
दूसरी ओर, फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड को डीकंजेस्टेंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य नाक में होने वाली सूजन को कम करके बंद नाक से राहत प्रदान करना है।
दोनों घटकों का उपयोग कुछ सर्दी-जुकाम से संबंधित दवाओं में किया जाता रहा है। लेकिन बच्चों, विशेषकर बहुत कम उम्र के बच्चों में किसी भी औषधीय घटक की उपयोगिता और सुरक्षा का आकलन उनकी उम्र तथा शरीर की संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर किया जाना आवश्यक है।
छोटे बच्चों में क्यों बढ़ जाती है सावधानी?
बच्चों का शरीर वयस्कों से अलग तरीके से दवाओं को अवशोषित और संसाधित करता है। कम उम्र में शरीर के विभिन्न अंग और जैविक प्रणालियां अभी विकास की अवस्था में होती हैं। ऐसे में ऐसी दवाओं का उपयोग, जिनकी जरूरत स्पष्ट रूप से स्थापित न हो, अतिरिक्त जोखिम पैदा कर सकता है।
कफ और कोल्ड से संबंधित दवाओं में मौजूद कुछ घटकों के कारण बच्चों में असामान्य हृदय गति, अत्यधिक बेचैनी, नींद में बदलाव या अन्य प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। यही वजह है कि छोटे बच्चों को दवा देने से पहले उम्र, वजन, लक्षण और बीमारी की वास्तविक वजह को समझना महत्वपूर्ण है।
सरकार का मौजूदा कदम इसी व्यापक दवा-सुरक्षा दृष्टिकोण का हिस्सा माना जा रहा है।
माता-पिता के लिए क्या है महत्वपूर्ण संदेश?
बच्चों में सर्दी, खांसी या नाक बंद होने जैसी समस्या दिखाई देने पर अभिभावकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे अपने स्तर पर दवा का चुनाव न करें। किसी बड़े व्यक्ति के लिए उपयोग होने वाली दवा बच्चे के लिए उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है।
विशेष रूप से चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों के मामले में बिना चिकित्सकीय सलाह के कफ-कोल्ड या एलर्जी से संबंधित दवाएं देना उचित नहीं माना जाना चाहिए। बच्चे की उम्र और वजन के अनुसार दवा की मात्रा भी अलग हो सकती है।
सामान्य नाक बंद होने जैसी समस्या में चिकित्सक आवश्यकता के अनुसार सरल और अपेक्षाकृत सुरक्षित उपाय सुझा सकते हैं। उदाहरण के लिए, कुछ परिस्थितियों में सलाइन नेजल ड्रॉप्स या स्प्रे का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन छोटे बच्चे के लिए किसी भी उत्पाद का उपयोग करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्यकर्मी की सलाह लेना बेहतर है।
दवा कंपनियों के लिए क्या बदलेगा?
इस फैसले का सीधा असर उन फार्मा कंपनियों पर पड़ेगा जो संबंधित FDC दवाओं का निर्माण या विपणन करती हैं। कंपनियों को नियामकीय निर्देशों के अनुरूप अपने लेबल, पैकेजिंग और प्रचार सामग्री में आवश्यक बदलाव करने होंगे।
इसके साथ ही चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए इन दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण से संबंधित प्रतिबंध का पालन करना होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दवा बाजार में उपलब्ध होने के बावजूद उसे ऐसे छोटे बच्चों के लिए अनुचित तरीके से प्रचारित या उपलब्ध न कराया जाए।
यह कदम दवा उद्योग के लिए भी एक संदेश है कि किसी दवा की लोकप्रियता या लंबे समय से हो रहा इस्तेमाल उसकी सुरक्षा का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। दवाओं की सुरक्षा का मूल्यांकन वैज्ञानिक प्रमाण और नियामकीय समीक्षा के आधार पर लगातार किया जाना आवश्यक है।
विशेषज्ञ समिति और DTAB की भूमिका
दवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण नियामकीय निर्णयों में विशेषज्ञों की राय अहम होती है। संबंधित विशेषज्ञ समिति द्वारा सुरक्षा और उपयोग से जुड़े पहलुओं की समीक्षा के बाद मामला ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड के समक्ष पहुंचा। बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने मौजूदा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाया है।
इस प्रक्रिया का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि बच्चों से जुड़ी दवा नीति में लाभ और संभावित जोखिम के बीच संतुलन बनाना जरूरी होता है। यदि किसी दवा के स्थान पर सुरक्षित उपचार उपलब्ध हैं, तो कमजोर आयु वर्ग में अनावश्यक जोखिम को कम करना सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।
पहले भी उठाए गए हैं दवा सुरक्षा के कदम
भारत में FDC दवाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार समय-समय पर समीक्षा करती रही है। विभिन्न संयोजनों के लाभ, जोखिम और चिकित्सकीय आवश्यकता का मूल्यांकन किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर कुछ दवाओं पर प्रतिबंध, चेतावनी या उपयोग संबंधी शर्तें लागू की जाती हैं।
2025 में भी कुछ FDC दवाओं के संबंध में आयु-विशिष्ट चेतावनियां सामने आई थीं। अब संबंधित क्लोरफेनिरामाइन मेलिएट और फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड वाले संयोजनों के मामले में चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाया गया है।
हाल के समय में सरकार ने अन्य FDC दवाओं की सुरक्षा को लेकर भी नियामकीय कार्रवाई की है। इससे संकेत मिलता है कि दवा सुरक्षा और तर्कसंगत औषधि उपयोग को लेकर निगरानी लगातार मजबूत की जा रही है।
जनस्वास्थ्य के लिए व्यापक महत्व
यह फैसला केवल एक दवा संयोजन पर प्रतिबंध तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक संदेश यह है कि बच्चों के लिए दवा का इस्तेमाल विशेष सावधानी के साथ होना चाहिए। सामान्य सर्दी-जुकाम जैसी समस्या को देखकर तुरंत दवा देना हमेशा जरूरी नहीं होता।
कई बार बच्चों में वायरल संक्रमण या सामान्य मौसमी समस्या अपने आप भी ठीक हो सकती है। लेकिन यदि बच्चे को लगातार तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक कमजोरी, पानी की कमी के संकेत या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
इसलिए अभिभावकों को दवा की बोतल पर लिखे नाम या किसी पुराने अनुभव के आधार पर निर्णय लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए।
निष्कर्ष
चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए क्लोरफेनिरामाइन मेलिएट और फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड युक्त FDC दवाओं पर सरकार का फैसला बाल दवा सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण नियामकीय कदम है। इसका उद्देश्य छोटे बच्चों को संभावित प्रतिकूल प्रभावों से बचाना और दवाओं के अधिक जिम्मेदार इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
अभिभावकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि बच्चे को सर्दी, खांसी, एलर्जी या नाक बंद होने की समस्या होने पर खुद से दवा देने से बचें। खासकर चार वर्ष से कम उम्र में किसी भी दवा का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह के आधार पर किया जाना चाहिए।
दवा कंपनियों की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्हें सरकारी निर्देशों का पालन करते हुए लेबलिंग, बिक्री और प्रचार व्यवस्था में आवश्यक बदलाव करने होंगे। कुल मिलाकर, यह फैसला बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाली ऐसी नीति को मजबूत करता है, जिसमें दवा की उपलब्धता से अधिक महत्व उसके सुरक्षित और तर्कसंगत उपयोग को दिया जाता है।