गंगा एक्सप्रेसवे पर फिर दिखीं दरारें, अखिलेश यादव ने उठाए निर्माण गुणवत्ता पर सवाल
लखनऊ/उन्नाव। उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे…

लखनऊ/उन्नाव। उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। उन्नाव के पास एक्सप्रेसवे के उस हिस्से में नई दरारें दिखाई देने की खबर सामने आई है, जहां पहले बारिश और मिट्टी के कटाव के बाद मरम्मत का काम किया गया था। सड़क पर दोबारा दरारें दिखाई देने के बाद एक्सप्रेसवे की मजबूती, जल निकासी व्यवस्था और मरम्मत की गुणवत्ता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसी मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है।
अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लोगों को सावधान रहने की बात कहते हुए गंगा एक्सप्रेसवे पर दिखाई दे रही दरारों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने इन दरारों को नदी की धाराओं जैसा बताते हुए इसे भाजपा सरकार में कथित भ्रष्टाचार से जोड़ा और आरोप लगाया कि इस तरह की स्थिति लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है। हालांकि, भ्रष्टाचार से जुड़े उनके आरोप राजनीतिक आरोप हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।
बारिश के बाद सामने आई समस्या
गंगा एक्सप्रेसवे पर हाल के दिनों में भारी बारिश के बाद अलग-अलग स्थानों पर सड़क और उसके आसपास की मिट्टी से जुड़ी समस्याएं सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उन्नाव क्षेत्र में पहले मिट्टी के धंसने और कटाव की स्थिति बनी थी। इसके बाद संबंधित एजेंसियों की ओर से प्रभावित हिस्से पर मरम्मत और पैचवर्क कराया गया। लेकिन अब उसी तरह के क्षेत्र में दोबारा दरारें नजर आने से मरम्मत की स्थायित्व क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं।
27 अगस्त को सामने आई रिपोर्टों में बताया गया कि उन्नाव के पास गंगा एक्सप्रेसवे के पैचवर्क वाले हिस्से में दरारें दिखाई दीं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ दिन पहले इसी एक्सप्रेसवे के दूसरे हिस्से में बारिश के बाद बड़ा गड्ढा बनने की खबर आई थी। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता और बारिश के दौरान उसकी संरचनात्मक मजबूती को लेकर बहस को और बढ़ा दिया है।
कुछ दिन पहले बना था बड़ा गड्ढा
गंगा एक्सप्रेसवे पर 18 अगस्त को भी एक गंभीर घटना की रिपोर्ट सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, मेरठ-प्रयागराज मार्ग पर किलोमीटर 421 के आसपास भारी बारिश के बाद सड़क और उसके किनारे बने तटबंध का एक हिस्सा प्रभावित हुआ तथा करीब 10 मीटर गहरा गड्ढा बनने की बात सामने आई। इसके बाद सड़क की सुरक्षा, जल निकासी और निर्माण से जुड़े मानकों को लेकर सवाल उठे।
इससे पहले जुलाई में भी उन्नाव के सोनिक टोल प्लाजा के पास एक्सप्रेसवे से जुड़ी सड़क के एक हिस्से में बारिश के कारण नुकसान की खबर आई थी। मिट्टी के कटाव और सड़क के किनारे के हिस्से को हुए नुकसान के बाद वहां भी मरम्मत की गई थी। ऐसे में अगस्त में फिर से सामने आई दरारों ने पूरे मामले को राजनीतिक और तकनीकी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण बना दिया है।
अखिलेश यादव का भाजपा पर हमला
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने ताजा घटनाक्रम को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उनके पोस्ट का मुख्य मुद्दा सड़क की गुणवत्ता और आम लोगों की सुरक्षा रहा। उन्होंने वीडियो में दिखाई दे रही दरारों के आधार पर सरकार से जवाबदेही की मांग उठाने का राजनीतिक संदेश दिया।
अखिलेश यादव इससे पहले भी उत्तर प्रदेश में सड़क और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर भाजपा सरकार पर आरोप लगाते रहे हैं। 19 अगस्त की एक रिपोर्ट में भी उनके हवाले से कहा गया था कि राज्य में बड़ी लागत से तैयार की गई सड़कों और एक्सप्रेसवे में सामने आ रही समस्याएं सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं।
हालांकि, किसी सड़क पर दरार या बारिश से नुकसान होना अपने आप में भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसके पीछे मिट्टी की स्थिति, जल निकासी, अत्यधिक बारिश, निर्माण सामग्री, डिजाइन, रखरखाव और अन्य तकनीकी कारण हो सकते हैं। इसलिए वास्तविक कारण निर्धारित करने के लिए विशेषज्ञों की तकनीकी जांच आवश्यक होगी।
594 किलोमीटर लंबा है गंगा एक्सप्रेसवे
गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की प्रमुख सड़क परियोजनाओं में शामिल है। लगभग 594 किलोमीटर लंबा यह छह लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है और राज्य के 12 जिलों से होकर गुजरता है। इसका उद्देश्य दोनों शहरों के बीच यात्रा के समय को काफी कम करना और पूर्वी तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच तेज सड़क संपर्क विकसित करना है।
यह परियोजना राज्य के आर्थिक और परिवहन ढांचे के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में एक्सप्रेसवे पर शुरुआती दौर में ही सामने आने वाली तकनीकी समस्याएं स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान आकर्षित करती हैं। खासकर बारिश के मौसम में सड़क की सतह, तटबंध और जल निकासी व्यवस्था की मजबूती बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
निर्माण गुणवत्ता की जांच क्यों जरूरी?
सड़क पर दोबारा दरार आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मरम्मत के बाद समस्या फिर क्यों दिखाई दी। विशेषज्ञ जांच के जरिए यह पता लगाया जाना जरूरी है कि दरार का कारण केवल भारी बारिश और मिट्टी का कटाव है या इसके पीछे कोई अन्य तकनीकी कमी भी मौजूद है।
जांच में सड़क की ऊपरी परत के साथ-साथ नीचे की परतों, मिट्टी की मजबूती, जल निकासी, ढलान, तटबंध और मरम्मत में इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता का परीक्षण किया जा सकता है। यदि किसी स्थान पर निर्माण या मरम्मत संबंधी कमी मिलती है, तो जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की आवश्यकता होगी।
यात्रियों की सुरक्षा सबसे अहम
एक्सप्रेसवे जैसी तेज रफ्तार वाली सड़क पर सड़क की सतह की स्थिति सीधे यातायात सुरक्षा से जुड़ी होती है। इसलिए जहां भी दरार, धंसाव या सड़क की संरचना में असामान्यता दिखाई दे, वहां समय रहते निरीक्षण और आवश्यक सुधार जरूरी है।
गंगा एक्सप्रेसवे पर सामने आई ताजा तस्वीरों और वीडियो के बाद यात्रियों के बीच भी चिंता पैदा होना स्वाभाविक है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के लिए चुनौती यह होगी कि वे प्रभावित हिस्सों की वास्तविक स्थिति का आकलन करें और जरूरत पड़ने पर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाएं।
राजनीतिक आरोपों से आगे तकनीकी जवाब जरूरी
गंगा एक्सप्रेसवे पर आई दरारों ने एक ओर जहां विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका दिया है, वहीं दूसरी ओर यह मामला तकनीकी जवाबदेही की मांग भी करता है। अखिलेश यादव ने इसे भ्रष्टाचार से जोड़कर सरकार पर निशाना साधा है, जबकि वास्तविक कारणों का निर्धारण आधिकारिक और तकनीकी जांच के बाद ही किया जा सकता है।
ऐसे मामलों में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि जनता को स्पष्ट जानकारी दी जाए कि सड़क को नुकसान क्यों हुआ, मरम्मत किस आधार पर की गई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़ी आधारभूत संरचना परियोजना है। इसलिए इसकी गुणवत्ता और सुरक्षा पर उठ रहे सवालों का पारदर्शी तरीके से समाधान होना जरूरी है। यदि बारिश और मिट्टी के कटाव जैसी प्राकृतिक परिस्थितियां नुकसान का कारण हैं, तो ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए डिजाइन और जल निकासी व्यवस्था की समीक्षा होनी चाहिए। वहीं यदि तकनीकी या निर्माण संबंधी कमी सामने आती है, तो उसे सुधारने के साथ जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।
फिलहाल उन्नाव के पास सामने आई नई दरारों ने गंगा एक्सप्रेसवे को लेकर बहस फिर तेज कर दी है। आने वाले समय में संबंधित एजेंसियों की जांच और कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि ताजा नुकसान के पीछे वास्तविक वजह क्या थी। तब तक सड़क की सुरक्षा, यात्रियों की सुविधा और परियोजना की गुणवत्ता को प्राथमिकता देना सबसे जरूरी माना जाएगा।